जानिए ! मार्च माह में पैदा होने वालों की विशेषताएं|भाग्यशाली रत्न।

मार्च माह में पैदा होने वालों का भाग्यशाली रत्न :

मार्च का महीना मीन राशि के क्षेत्र में आता है। मार्च के महीने का अधिकांश क्षेत्र मीन राशि को दिया गया है। मीन राशि का स्वामित्व देव गुरु बृहस्पति को दिया गया है। अंततः इस महीने में जन्म लेने वाले लोगों का स्वभाव ,व्यवहार ,शारीरिक बनावट और क्षमता आदि के ऊपर बृहस्पति की प्रधानता देखी जाती है।

मार्च के महीने में जन्म लेने वालों के सामान्य गुण और प्रकृति।

ज्योतिष के अनुसार मार्च के महीने में पैदा होने वाले लोग चंचल स्वभाव ,उत्साही और जोशीले तो रहते ही हैं ,यह झगड़ालू प्रवृत्ति के भी होते हैं। यह लोग दूसरों के प्रति सदैव संदेह पाले रखते हैं और उनसे स्वय भी भयग्रस्त बने रहते हैं। इसलिए इन्हें दूसरों के साथ संबंध स्थापित करने में खासी दिक्कतें आती हैं।

यह लोग सदैव अपने मन में यह भय भी रखते हैं कि कहीं कोई दूसरा व्यक्ति उनके व्यवसाय ,उनके उद्योग ,दुकान या नौकरी को उनसे छीन ना ले या उनके व्यापार को नष्ट ना कर दें। इसलिए यह लोग दूसरों की दृष्टि में लालची या दूसरों के प्रति बुरा भाव ही बनाए रखते हैं।

शारीरिक रूप में यह लोग प्राय लंबे ,ऊंचे कद और ताकतवर होते हैं। यह लोग प्राय ऐसे व्यापार अथवा नौकरी में ज्यादातर सफलताएं प्राप्त करते हैं ,जिनमें शारीरिक श्रम का महत्व अधिक रहता है। यह लोग पुलिस ,सेना ,ड्राइविंग ,पायलट आदि जैसे jobs को अधिक पसंद करते हैं। यह लोग सदा भविष्य की चिंता में डूबे रहते हैं। इसलिए यह लोग विपत्तियां या भविष्य के डर से धन संग्रह पर भी अत्यधिक ध्यान देते हैं।

इन्हें नई बातें सोचने ,नई युक्तियां खोजने ,नए अनुसंधान ,और रिसर्च जैसे कार्यों में ज्यादा रुचि रहती है। इसलिए कभी-कभी यह लोग समाज में अपनी एक विशेष पहचान बनाने का प्रयास भी करते हैं।

इन्हें खानपान का भी बेहद शौक रहता है यह लोग प्राय स्वाद के लिए अधिक खाते रहते हैं। मीन राशि का स्वामी बृहस्पति को माना गया है। इस मास में जन्म लेने वाले लोगों के स्वभाव ए चरित्र में निम्नलिखित विशेषताएं पाई जाती हैं-:

मार्च के महीने में जन्म लेने वालों का सामान्य चरित्र और स्वभाव।

यह लोग जन्म से ही साहसी ,अन्वेषक ,खोजी प्रवृत्ति और अंतर्दृष्टि रखने वाले रहते हैं। यह लोग सफल बुद्धि संपन्न होते हैं। इसलिए इन्हें नई यात्राओं पर जाना ,ऐतिहासिक ,भौगोलिक ज्ञान या स्थान संबंधित विषयों को जानने समझने की गहरी जिज्ञासा रहती है। इसलिए यह बार-बार यात्राएं करते रहते हैं। यह अपने मित्र ,धयेय और सिद्धांतों के प्रति भी पूर्ण निष्ठावान और उत्तरदायित्व का सफलतापूर्वक निर्वाह करते हैं। यह लोग नियम कानून व्यवहार तथा परंपराओं का पूर्ण आदर मान करते हुए स्वयं भी उनका पूर्ण निष्ठा से पालन करते हैं। इसलिए यह प्रत्येक बात पर पर्याप्त सोच विचार के बाद ही अपनी राय प्रकट करते हैं।

इस मास में जन्म लेने वाले कुछ लोग जहां अत्यंत दृढ़ संकल्पवान एवं चरित्रवान रहते हैं ,वहीं कुछ लोग अत्यधिक दुर्बल चरित्र के भी पाए जाते हैं। कुछ लोग मादक द्रव्यों के आदी बन जाते हैं तो कुछ अन्य लोग भोग विलास में ही डूबे रहते हैं। इनके चरित्र में यह दुर्बलता सदैव बनी रहती है।
यदि कभी इन्हें मनोनुकूल अफसर अथवा लक्ष्य सिद्धि के मार्ग मिल जाए तो उस स्थिति में यह अपनी समस्त बुराइयों और दुर्बलताओं से एकदम मुक्ति पा लेते हैं और अपने उज्जवल चरित्र का उदाहरण पेश करते हैं।

यह जल क्रीड़ा ,झील ,नदी तालाब आदि के पास अपना ज्यादा समय व्यतीत करना चाहते हैं। यह लोग समुद्र यात्रा के भी शौकीन होते हैं। इन्हें समुद्री वस्तुओं के कारोबार में विशेष सफलता मिलते देखी गई है। आयात ,निर्यात संबंधी, विदेश व्यापार में भी इन्हें बहुत कामयाबी मिलती है। इन लोगों को स्वार्थी और मिथ्यावादी मित्रों के संपर्क से सदैव दूर रहना चाहिए ,अन्यथा उनके कारण इन्हें भीषण हानि उठानी पढ़ती है। इनके कारण इन्हें मानसिक संताप भी झेलना पड़ता है।

एक उम्र के बाद इन लोगों की रुचि आध्यात्म के प्रति बढ़ने लगती है। यह इस क्षेत्र में विशेष रूचि लेने लगते हैं तो विशेष ख्याति भी पा लेते हैं। लेकिन आध्यात्मिकता को जब यह व्यापार के रूप में लेते हैं तो इनकी बदनामी का डर भी बना रहता है। इन्हें ज्ञान की नई-नई बातें जानने के प्रति विशेष रुचि रहती है। कई बार तो यह पागलपन की हद तक नई खोजों में लगे रहते हैं।

यह लोग धन संग्रह को ज्यादा महत्व नहीं देते। यह धन को जीवन यापन और लक्ष्य प्राप्ति का एक साधन भर मानते हैं। स्वभाव से यह परोपकारी होते हैं पर लोगों की मदद एक सीमा तक ही करते हैं। जहां इन्हें आर्थिक संकट में फंस जाने की संभावना दिखाई देती है वहां से यह तत्काल स्वयं को पीछे खींच लेते हैं। यद्यपि वे अपने प्रिय जनों के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहते हैं।

मार्च के महीने में पैदा होने वालों का स्वास्थ्य।

स्वास्थ्य के मामले में मार्च में जन्मे लोगों का शारीरिक स्वास्थ्य प्राय ठीक-ठाक ही रहता है। इन्हें मानसिक चिंताएं ,निराशा ,हताशा ,कुंठाएं भी लगी रहती हैं। इनसे यह काफी परेशानी उठाते हैं। इन्हें जन्म से ही फेफड़ों के रोग सता सकते हैं। यह लोग क्षय या अस्थमा जैसे रोगों के शीघ्र शिकार बन सकते हैं। इन्हें आंत्र वृद्धि ,पेट में रसौली ,हाथ पावों से पसीना निकलना एव पक्षाघात जैसी बीमारियों का खतरा भी अधिक रहता है। इन्हें मानसिक चिंताओं से स्वयं को मुक्त रखने का सदैव प्रयास करना चाहिए।

मार्च के महीने में पैदा होने वालों की आर्थिक स्थिति।

यह धन के प्रति अधिक उत्सुक नहीं रहते हैं यह धन को सहजता से एक जरूरत का साधन भर स्वीकार करते हैं, और बुरे दिनों के लिए भी कर कर नहीं रखते।। वृद्धावस्था में आर्थिक दुखों को नष्ट कर लेने के कारण यह लोग प्रायश्चित उठा उठाते हैं। महत्वकांक्षी आंखें जागृत होने पर यह पर्याप्त आर्थिक उत्तराधिकार भी अर्जित कर लेते हैं ।इनके भाग्य में निरंतर उतार-चढ़ाव की स्थितियाँ बनी रहती हैं।

मार्च के महीने में जन्म लेने वालों का लकी बर्थ स्टोन।

मार्च के महीने में जन्म लेने वालों के लिए पीतोनिया यानी (ब्लडस्टोन) को भाग्यशाली रत्न , Lucky Birth Stone माना गया है। कुछ पश्चिमी ज्योतिष और रत्न विशेषज्ञों के अनुसार पीतोनिया (Bloodstone)के अतिरिक्त बैरुज (Aquamarine) को भी इन लोगों के लिए भाग्यशाली रत्न माना गया है। पीतोनिया(Bloodstone) धारण करता के मन में नया जोश नया उत्साह तो जागता ही है ,यह उसके अंदर गर्मी भी बढ़ाने लगता है। इसको धारण करने से व्यक्ति को पाचन संबंधित कई रोगों से तो मुक्ति मिलती है।

Bloodstone Gemstone
Bloodstone Gemstone

ठंड बढ़ने के दौरान भी बीमार पड़ने से सुरक्षा प्राप्त होती है। पीतोनिया यानी (Bloodstone) को इंजीनियरिंग का काम करने वाले ,कृषि और उद्योग के क्षेत्र में काम करने वालों के लिए भी भाग्यशाली पत्थर माना गया है। उनके लिए भी यह रत्न धारण करने पर उन्नति कारक बन जाता है और उन्हें अपने क्षेत्र में विशेष सफलताएं प्रदान करता है। इसलिए अप्रैल महीने में जन्म लेने वाले व्यक्तियों के लिए पीतोनिया (Bloodstone)अत्यंत भाग्यशाली बर्थस्टोन माना गया है।

प्राचीन काल में पीतोनिया (Bloodstone)को बहादुरी का प्रतीक समझा जाता था। लड़ाई में जाने वाले सिपाही व फौजी इसको बहादुरी और विजय प्राप्त करने के धारण करते थे। मार्च महीने वालों के लिए बैरुज (Aquamarine) को भी भाग्यशाली रत्न माना गया है इसलिए यह लोग बैरुज (Aquamarine) को भी धारण कर सकते है।

पश्चिमी देशों में हजारों वर्ष से इस ब्लड स्टोन ,रत्न का प्रयोग किया जा रहा है। इसको अत्यधिक पवित्र रत्न के रूप में बहुत सम्मान दिया गया है। पुराने जमाने में इस रत्न को नई दुल्हन को उपहार स्वरूप भेंट के रूप में दिया जाता था। क्योंकि पुराने समय में रोमन लोगों का विश्वास था कि इस रत्न के प्रभाव से पहनने वालों में शुद्ध भावनाएं भरी रहती हैं और वह लोग उमंग और आमोद प्रमोद की भावनाओं से संपन्न रहते हैं। इस रत्न को धारण रखने से परस्पर प्रेम अनुराग और विश्वास में दृढ़ता का भाव बना रहता है।

Bloodstone
Bloodstone

बैरुज(अक्वामरीन) को लेकर तो अब भी अमेरिका और अनेक यूरोपियन देशों में ऐसा माना जाता है कि इस रत्न को धारण रखने वाले लोग बुद्धिमान ,साहसी ,वीर ,दृढ़ संकल्प वान , दृढ़ इच्छा शक्ति संपन्न एवं सदाचारी स्वभाव के बनते हैं। बैरुज(अक्वामरीन) धारण करने से मनुष्य में संगीत कला में भी विशेष ख्याति मिलती है।

पीतोनिया (ब्लडस्टोन) हरे रंग का पत्थर है। इसके ऊपर लाल रंग के छोटे-छोटे छींटे रहते हैं। इन छींटे के कारण यह पत्थर बहुत सुंदर दिखाई देता है। पुराने जमाने के लोगों में विश्वास था कि इस रत्न में असाधारण आध्यात्मिक गुप्त शक्तियां छिपी रहती है। इसलिए इसे धारण रखने से लोग बुरी नजर के प्रभाव से बचे रहते हैं।

प्राचीन काल में लोग विशेषकर पश्चिम जगत में इस रत्न का ताबीज बनाकर गले में धारण करते थे या अंगूठी में जड़वा कर धारण करते थे। पुराने समय में समुद्र या नदी में डूबने से बचने के लिए लोग पीतोनिया (ब्लडस्टोन) से बने ताबीज अपने पास रखते रहे हैं।पीतोनिया (ब्लडस्टोन) निर्मित ऐसे यंत्र या ताबीज को अपने पास रखने से व्यापार में भी निरंतर उन्नति मिलती है। प्रतियोगिताओं में सफलता प्राप्त होती है और वाद-विवाद से लेकर लड़ाई झगड़े तक में विजय श्री प्राप्ति होती है।

यह रत्न होटल ,शराब ,पान ,बीड़ी ,सिगरेट ,प्लास्टिक ,लौह धातु का व्यवसाय करने वाले ,व्यवस्थापक प्रबंधक का कार्य करने वाले व्यक्तियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है। परंतु इस रत्न को कुंभ या सिंह राशि वाले लोगों को धारण नहीं करना चाहिए। इस रत्न को हस्त नक्षत्र में खरीदना चाहिए और फिर सोने की अंगूठी में जड़वा कर पूजा पाठ करते हुए गंगाजल से अभिषेक संपन्न करके अपने शरीर पर धारण करना चाहिए।

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