Benefits Of Gomed Ratna|Hassonite जिसे गोमेद कहा जाता है

Name: Hessonite Gomed
Colour: Brown
Origin: Shri Lankan, India, African

Hassonite जिसे गोमेद कहा जाता है

इस पोस्ट में हम जानेंगे की किन परिस्थितियों में राहु का रत्न गोमेद धारण करना चाहिये।

हेसोनाइट को गोमेद के रूप में भी जाना जाता है। जो गोमूत्र के रंग के समान हल्के से गहरे भूरे रंग में पाया जाता है। गोमेद वैदिक ग्रह राहु से जुड़ा है। राहु का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है , इसलिए राहु को छाया माना जाता है।

राहु को छायाग्रह कहा जाता है, हालांकि राहु एक बहुत ही ऊर्जावान ग्रह है। साथ ही यह एक बहुत ही विनाशकारी ग्रह भी माना जाता है ,जिसके परिणामस्वरूप विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं और राहु के नकारात्मक होने पर जातक दिमागी संतुलन भी खो सकता है। इसलिए राहु ग्रह के अनिष्टकारी प्रभावों से बचने के लिए राहु के उचित उपाय करने अत्यंत आवश्यक हो जाते है । कुंडली में दूषित राहु जातक को मानसिक अशांति देता है। धन,वैभव,पारिवारिक अशांति,घाटा ,नुकसान,बहरी हवा का प्रकोप आदि देता है।

ज्योतिष शास्त्र में इसे राहु का रत्न माना जाता है!यह एक प्रभावशाली रत्न है!गोमेद राहु के दोषों को दूर करता है!
यह राहु ग्रह की नकारात्मक उर्जाओ को कम करता है!कुंडली में राहु की ख़राब स्तिथि व्यक्ति को बुरी आदतों की ओर ले जाती है,स्वास्थ्य को ख़राब करती है,व्यापार व्यासाय में नुकसान करती है,डिप्रेशन,मानसिक परेशानियां,विद्यार्थियों को शिक्षा में रूकावटे डालती है और धन से सम्बंधित दरिद्रता देती है!

राहु का रत्न गोमेद धारण करने से ,इस छाया ग्रह के सभी नकारात्मक उर्जाओ को समाप्त करते हुए अप्रत्याशित लाभ प्रदान करता है । गोमेद रत्न में ग्रह के सभी नकारात्मक प्रभावों को समाप्त करके उन्हें सकारात्मक में बदलने की क्षमता होती है। धारणकर्ता के नकारात्मक प्रभावो को कम करते हुए अचानक और अप्रत्याशित लाभ प्रदान करता है।यह रत्न कालसर्प योगो के दोष निवारण करने के लिए भी पहना जाता है

व्यवसाय:

राहु ग्रह किसी भी कार्यो या लक्ष्यों को पूरा करने में देरी के लिए जिम्मेदार रहता है और व्यापार ,व्यवसाय नौकरी में भ्रम की स्थिति पैदा करता है। गोमेद रत्न धारण करने से मन की अस्थिरता से त्वरित सफलता मिल सकती है और जातक अपने व्यवसाय,नौकरी, कानून, यात्रा, पर्यटन, उद्योग आदि में आकाश को छू सकते हैं।

स्वास्थ्य:

जो छात्र अध्ययन पर ध्यान केंद्रित करने में विफल रहते हैं, उन्हें हेसोनाइट गोमेद पहनने की सलाह दी जाती है ,क्योंकि गोमेद धारण लक्ष्य प्रदान करता है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में सुधार लाता है।
इसके अलावा, हेसोनाइट गोमेद रत्न धारण करने वाले को उन्नत सोच के साथ पुनर्जीवित करता है।
यह सरकार और सरकारी एजेंसियों से भी भारी समर्थन प्रदान करता है और राजनीति और सरकारी कर्मचारियों के लिए जनता का समर्थन प्रदान करता है।

हेसोनाइट गोमेद मन को शांत करने और जातक को अवसाद, तनाव, या किसी भी मन से संबंधित समस्याओं, और किसी भी आत्महत्या की प्रवृत्ति से बचाने के लिए जाना जाता है।
यह त्वचा से संबंधित विभिन्न समस्याओं जैसे मिर्गी, संक्रमण और एलर्जी को ठीक करने में भी मदद करता है, इसके अलावा, यह कैंसर, कुष्ठ रोग, अनाड़ीपन, थकान रक्तचाप आदि के प्रचलित लक्षणों के लिए बहुत फायदेमंद है।हेसोनाइट जोड़े के दर्द को दूर करता है।

शादी:

गोमेद रत्न आपसी रिश्ते में विश्वास पैदा करता है। यह गलतफहमी को दूर करने में मदद करता है और एक सामंजस्यपूर्ण संबंध बनाए रखने में मदद करता है। ऐसा माना जाता है कि गोमेद रत्न धारण प्यार और जुनून को बढ़ाता है और पति पत्नी,प्रेमी प्रेमिका के रिश्तो को नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है।

जीवन:

हेसोनाइट गोमेद अलौकिक अस्तित्व के भय को दूर करता है और पहनने वाले के जीवन में स्थिरता लाता है। गोमेद पहनने वाले को बुरी ऊर्जा और दुर्भाग्य के आघात से बचाने में भी मदद करता है।
हेसोनाइट गोमेद आध्यात्मिक विकास को बढ़ाता है। यह जातक को नकारात्मकता से दूर करता है और उसे किसी भी दुश्मन से बचाता है। इसके अलावा, यह जिव जन्तुओं के डर को दूर करने में मदद करता है और चोटों और घातक दुर्घटनाओं को रोकता है।

कुंडली में मजबूत राहु आपकों सफल जीवन,अति उनत्ती,धन,वैभव,सफलता,प्रसिद्धि प्रदान करता है!

राहु का रत्न गोमेद किसे धारण करना चाहिए और किसे नहीं करना चाहिए।

गोमेद बुध ,शुक्र और शनि के लग्न के लोग धारण कर सकते हैं – जैसे मिथुन लग्न, कन्या लग्न, वृष लग्न ,तुला लग्न , मकर लग्न और कुंभ लग्न के जातक गोमेद धारण कर सकते हैं।

मेष लग्न ,कर्क लग्न ,सिंह लग्न ,वृश्चिक लग्न ,धनु लग्न और मीन लग्न वाले जातकों को गोमेद धारण नहीं करना चाहिए।

गोमेद धारण करने से पहले कुंडली में राहु की स्थिति देखनी चाहिए कि राहु कुंडली में किस भाव और नक्षत्र और किस राशि में स्थित है।

कुंडली में अगर राहु तीसरे,दसवे ,और ग्यारवें भाव में स्थित है ,तो राहु का रत्न गोमेद धारण करना चाहिए। राहु की महादशा या अंतर्दशा चल रही है तब भी यह बहुत ही अच्छे शुभ फल प्रदान करेगा।

गोमेद धारण करने के लाभ:

आपको सही डिसिजन लेने में मदद करता है!
आपको व्यापार व्यवसाय में उनत्ती और तरक्की देता है!
धन की दृष्टि से आपको मजबूत करता है!
व्यापार व्यवसाय में सही निर्णय लेने में मजबूती प्रदान करता है!
सामाजिक मान सम्मान बढाता है!
राजनितिक सफलता प्रदान करता है!
विद्यार्थियों को शिक्षा में सफलता प्रदान करता है!

किन स्तिथियों में गोमेद धारण करना अति नुकसानदायक होगा।

शनि की साढ़ेसाती और शनि की ढैया में गोमेद धारण नहीं करना चाहिए। इसके अलावा शनि की अंतर्दशा में भी गोमेद धारण ना करना ही श्रेष्ठ होगा।
अगर जन्म पत्रिका में इनमें से कोई भी स्थिति बनती है तो गोमेद धारण करना वर्जित होता है।
यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा ,राहु की युति है, और दोनों की डिग्रियां आसपास है तो गोमेद धारण करना शुभ नहीं होगा, यह एक ग्रहण दोष है।

यदि राहु ,सूर्य के साथ युती में है ,तो भी यह ग्रहण दोष बनता है। इस स्थिति में भी गोमेद धारण करना नुकसानदायक होगा।

इसी के साथ अगर राहु ,मंगल के साथ युती में है ,और अंगारक योग का निर्माण करता है तो आपको गोमेद धारण नहीं करना चाहिए।
बुध और राहु के साथ जड़त्व योग में है तो भी गोमेद धारण करना वर्जित माना गया है।
बृहस्पति और राहु की युति के साथ गुरु चांडाल का निर्माण हो रहा है ,तो भी गोमेद धारण करना उचित नहीं है।
अगर शुक्र और राहु की युति के साथ लंपट योग का निर्माण हो रहा है ,तब भी गोमेद धारण करना शुभदायक नहीं होगा।
अगर शनि और राहु दोनों युती में है और श्रापित दोष का निर्माण हो रहा है ,तो भी गोमेद धारण करना श्रेयस्कर नहीं होगा।

राहु का रत्न गोमेद हर मास की 4,9 और 14 तिथि को धारण नहीं करना चाहिए। यह भी देखना चाहिए जिस दिन रत्न धारण करें उस दिन अमावस्या ,सूर्य ग्रहण, चंद्रग्रहण ना हो और संक्रांति के दिन भी धारण नहीं करना चाहिए।

शुभ स्थितियों में धारण किया गया गोमेद मानसिक तनाव को कम करता है। जीवन में चल रहे अनावश्यक भय को कम करता है। गोमेद धारण करने से राहु के शुभ फलों की प्राप्ति होनी शुरू हो जाती है। गोमेद धारण करने से अचानक तरक्की,सफलता और धन प्राप्ति के योग बनते हैं। बहुत कम परिश्रम में बहुत अधिक सफलता प्राप्त होती है। गोमेद को राजनीतिक का कारक भी कहा जाता है ,इसलिए गोमेद धारण करने से राजनीति में भी उच्च सफलता प्राप्त होती है। राजनीति में सफलता प्राप्त करना आसान हो जाता है। गोमेद धारण करने से जातक की वाणी दूसरों को प्रभावित करने वाली हो जाती है।

गोमेद रत्न धारण विधि:

गोमेद चांदी की अंगूठी में जड्वाकर शनिवार के दिन संध्या के समय मध्यमा ऊँगली में धारण किया जाता है!
गोमेद को चांदी या पंचधातु की अंगूठी में जड़वा कर ,इसे 15 से 20 मिनट के लिए पंचामृत के घोल में रखें और इसके पश्चात इसे दूध गंगाजल से स्नान कराएं और “ॐ रा राहवे नमः” का मंत्र जाप करें। गोमेद को शनिवार की रात्रि को ,शनि की होरा में या फिर राहु के नक्षत्र में धारण करना चाहिए। गोमेद को दाएं हाथ की मध्यमा उंगली में धारण करना चाहिए।

विशेष : बगैर पूजा,अभिमंत्रित,सिद्ध किया हुआ कोई भी रत्न किसी काम का नहीं होता!वह कोई लाभ प्रदान नहीं करता!

राहु मंत्र :

ॐ रां राहवे नम:

राहु का तांत्रोक्त मंत्र:

ऊँ ऎं ह्रीं राहवे नम:ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:

ऊँ ह्रीं ह्रीं राहवे नम:

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