Firoza stone ke fayde|Firoza,Turquoise|फिरोजा,एक भाग्यशाली रत्न

फिरोजा

फिरोजा एक बहुमूल्य रत्न है। निशापुरी फिरोजे में नीली झलक होती है और यह सर्वोत्तम माना जाता है। शीराज और करमान, ईरान की खानों से निकलने वाले फ़ीरोज़े का रंग सफेद युक्त होता है। रंग हरा ,नीला सा ,स्वाद फीका ,स्वभाव सर्द।

फिरोजा रत्न शुक्र का रत्न माना जाता है। इसलिए हीरे के बदले में इस रत्न को धारण करना उचित होता है। कुछ रत्न विशेषज्ञों का मत है कि यह बुध का रत्न है। इस रत्न का प्रयोग बुध ,शुक्र और शनि की खराब दशाओं में ,संकटों से बचने के लिए लोगों को धारण कराया ,जिसमें लोगों ने शुभता, सुख और शांति का अनुभव किया। उक्त तीनों ग्रहों के वृष ,मिथुन ,कन्या ,तुला अथवा मीन राशि में एक ग्रह या दो ग्रह साथ हो तो ,अथवा तीनों ग्रहों के एक साथ बैठे होने पर इस रत्न का प्रयोग किया। जिसमें लोगों को अधिक सफलता में लाभ मिला।

फिरोजा हृदय और मस्तिष्क को शक्ति देने के लिए अंगूठी में जड़वा कर पहना जाता है। वैध हकीम इसको हृदय और मस्तिष्क के रोगों में खिलाते हैं। विशुद्ध शराब में घिसकर पिलाने से विष के प्रभाव दूर करता है ,आंखों के रोगों में लाभप्रद है ,दृष्टि तेज करता है ,धनी बनने दुखों और कष्टों से छुटकारा पाने ,सुखी जीवन व्यतीत करने के लिए लोग फिरोजा रत्न को धारण करते हैं। इसको आंखों पर मलते रहने से आंखों के रोग दूर हो जाते हैं। कई विशेषज्ञों की राय है कि यदि फिरोजा पहनने पर उसका रंग फीका पड़ जाए और काफी समय तक फीका ही रहे ,तो उस व्यक्ति को फिरोजा नहीं पहनना चाहिए। घुड़दौड़ में जीतने के लिए फिरोजा और नीलम को मिलाकर धारण करते हैं। इसको पहनने से मनुष्य बुरी दृष्टि से बचा रहता है।

बुध और शनि की बुरी दृष्टि से बचने के लिए लोग फिरोजा धारण करना जरूरी समझते हैं। कोई स्त्री जब दूसरी स्त्री से प्रेम संबंधों को दृढ़ बनाना चाहती हो ,तो दोनों को फिरोजा अंगूठी में जड़वा कर धारण करना चाहिए।

प्राचीनकाल में लोग फिरोजा को भेंट स्वरूप मुफ्त दिया करते थे। इसको खरीदना उचित नहीं समझा जाता था। जो कोई भी अपने दोस्त या संबंधी को प्रेम से फिरोजा भेंट करता तो उससे पहनने वाले को प्रसनत्ता और सुख सुविधाएं प्राप्त होती है। यदि किसी मुसलमान स्त्री के फ़ीरोज़े का रंग बदल जाता है ,तो उसका पति यह समझता है कि मेरी स्त्री पथभ्रष्ट हो गई है।

मुसलमान फिरोजा को बहुत शुभ बहुमूल्य भाग्यशाली रत्न मानते हैं। नीले रंग के फ़ीरोज़े को मिश्र ,अरब ,तुर्की और ईरान निवासी अंगूठियों ,तलवारों की म्यान ,खंजर के दस्तों ,घोड़े की जिनों में जड़वा कर उसको हर समय अपने पास रखते हैं।
कहते हैं कि सबसे कीमती और बढ़िया फिरोजा इरान के बादशाह के पास है। यह फिरोजा साडे 3 इंच लंबा है। इसमें कोई दाग ,धब्बा ,रेखा ,दरार या कोई दोष नहीं है। गर्मी और आग से फिर फ़िरोजे का रंग ,चमक और उसका तेज समाप्त हो जाता है। पसीना लगने और अधिक समय तक पहनने से फ़िरोजे रंग फीका पड़ जाता है। इसमें सुष्म छेद होने के कारण तरल इसकी चमक ,सुंदरता व रंग पर बुरा प्रभाव डालता है। आभूषणों के लिए इसको अच्छा नहीं माना जाता। नेशापुर (ईरान) की आग उगलने वाली चट्टानों की दरारों और गहराइयों में फिरोजा मिलता है। जो नीले रंग का होता है। सेनाई के रेगिस्तान (मिश्र के समीप का क्षेत्र) में हजारों वर्षों से फ़िरोजे मिलते रहे हैं। मिस्र के लोग आज से 6000 वर्ष पहले फिरोजा की खानों से परिचित थे। उन हजारों वर्ष पुरानी खानों को खोज कर मेजर मैकडोनाल्ड ने वहां से बढ़िया प्रकार के फिरोजी निकालकर 1857 ईसवी की प्रदर्शनी में उनको रखा।

मुस्लिम देशों में मुसलमान लोग इस फ़िरोजा रत्न में कुरान की आयात खुदवाकर गले में धारण करते हैं। दुर्घटनाओं से रक्षा के लिए फ़िरोजा को गले में धारण करना चाहिए। फिरोजा रत्न शत्रुओं से भी बचाता है। कुछ देशों में अपनी रक्षा के लिए घुड़सवार लोग इस रत्न को धारण करते हैं। फरोजा रत्न के प्रभाव से शरीर में जहर का प्रभाव नष्ट होता है या कम हो जाता है। नेत्रों की पलकों पर धीरे-धीरे फ़िरोजा को फेरने से नेत्रों की बीमारी ठीक होती है। यह रत्न प्रतिष्ठा और सम्मान भी देता है।

मिश्र के फिरोजे प्रायः हरे और शीशे के भांति दिखाई देने वाले होते हैं। ईरान ,चीन, तिब्बत ,साइबेरिया ,मेक्सिको ,कैलिफोर्निया और अमेरिका के कई भागों में भी फिरोज मिलते हैं।

फिरोजा रत्न को पूर्वाफाल्गुनी व रेवती नक्षत्र एवं शुक्रवार के दिन मध्यमा अथवा कनिष्ठा उंगली में धारण करना अधिक हितकर होता है। इस रत्न की यह विशेषता है कि इसे धारण करने वाले के ऊपर यदि संकट आने वाला होता है , रोग , विवाह ,दुर्घटना आदि किसी प्रकार का संकट हो। अथवा कोई अपना मित्र या हितैषी धोखा देने वाला होता है ,तो यह रत्न चमकहीन होकर मलिन पड़ जाता है। और इस प्रकार आने वाले संकट को पहले ही सूचित कर देता है। कुछ देशों में यह रत्न बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। लोग शादी आदि संस्कारों में वर-वधू को उनके मंगल के लिए इस रत्न को अंगूठियां ,लॉकेट भेंट करते हैं।

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