लाजवर्द,Lapis Lazuli रत्न धारण करने के लाभ और जानकारी

लाजवर्द (Lapis Lazuli)

विभिन्न नाम – लाजवर्द(हिंदी), राजावर्त (संस्कृत) अंग्रेजी में लेपिस लजूली कहते है।

लाजवर्द (Lapis Lazuli) -गहरे नील रंग का अपारदर्शक अल्पमोली रत्न है। प्राचीन काल में लगभग सभी देशो में इसकी मान्यता थी। लाजवर्द (Lapis Lazuli) बहुत ही चमकीला, काला, नीला, साफ चिकना रत्न होता है। जो सोने की खानों से प्राप्त होता है। जिस रत्न में सोने का कुछ भाग मिला होता है, उसको कीमती और बढ़िया लाजवर्द (Lapis Lazuli) समझा जाता है।
तांबे की खानों से निकलने वाला लाजवर्द गुणों की दृष्टि से घटिया होता है।

वह लाजवर्द बढ़िया समझा जाता है जो सख्त, साफ, नीला और उस पर सोने के रंग के दाग हो और उसकी नीलाहट में लाली और हरियाली की झलक हो।

जब असली लाजवर्द (Lapis Lazuli) को पिसा जाता है तो उसके रंग में अंतर नहीं आता। परंतु बनावटी लाजवर्द रत्न को पीसने पर रंग में अंतर आ जाता है।

लाजवर्द (Lapis Lazuli) रत्न का रंग नीला, स्वाद फीका होता है। लाजवर्द (Lapis Lazuli) रूस, साइबेरिया, चिल्ली (दक्षिण अमेरिका) और अफगानिस्तान में मिलता है।

लाजवर्द,LAPIS LAZULI
लाजवर्द,LAPIS LAZULI रत्न धारण करने के लाभ

लाजवर्द (Lapis Lazuli) गुण और धारण करने के लाभ –

लाजवर्द (Lapis Lazuli) रत्न का सुन्दर नीला रंग होने से इसे शनि ग्रह का रत्न माना गया है। शनि ग्रह से सम्बंधित लाभ प्राप्त होता है। जन्म कुंडली में अगर शुक्र के बुरे प्रभाव है तो लाजवर्द रत्न धारण करने से शुक्र के बुरे प्रभाव ख़त्म होते है,शुभ प्रभाव बढ़ते है और सफलता मिलती है। अगर कुंडली में राहु केतु के बुरे प्रभाव है तो भी लाजवर्द (Lapis Lazuli) रत्न धारण करने से राहु केतु के बुरे प्रभाव नष्ट होते है। व्यापार व्यवसाय में अच्छी सफलता मिलती है,धन आगमन के अवसर बढ़ते है और सामजिक मान सम्मान की प्राप्ति होती है। लाजवर्द रत्न को धारण करने से हिम्मत बढ़ती है ,विषाद रोग दूर होता है।

लाजवर्द हृदय को शक्ति देता है, प्रदर रोग में लाभकारी होता है, रक्त की शुद्धि करता है, मानसिक रोगों, परेशानियों को दूर करता है। घबराहट, दुख, और रक्त दोष, और मानसिक रोगों में लाभकारी होता है।

जिन लोगों पर राहु के बुरे प्रभाव हो उनको यह लाजवर्द (Lapis Lazuli) रत्न आवश्य धारण करना चाहिए। गले में लाजवर्द (Lapis Lazuli) रत्न का लॉकेट धारण करना चाहिए।

ऐसे रोगी जिनके शरीर में दर्द रहता हो, उन्हें 10ct का लाजवर्द रत्न की अंगूठी शनिवार के दिन संध्या में धारण करनी चाहिए।

बढ़िया लाजवर्द (Lapis Lazuli) गहरे नीले रंग का होता है। घटिया प्रकार के लाजवर्द का रंग हल्का होता है और उसमें सफेद मटियाली धारियां होती है। कठोरता के कारण इस में छेद करना बहुत कठिन होता है। गर्म करने पर इसका रंग खराब हो जाता है।

पुराने जमाने में बादशाह और धनवान लोग इसके बर्तन बनवाते थे, इसके आभूषण, चाकुओं के दस्ते, घड़ियों के केस और अन्य नक्काशी की वस्तुएं तैयार की जाती थी।

अफगानिस्तान में बदखशान के समीप इस रत्न की बहुत पुरानी खाने हैं।

1271 ईस्वी में प्रसिद्ध पर्यटक मार्कोपोलो ने अफगानिस्तान में इन खानों को देखा। इन खानों का लाजवर्द (Lapis Lazuli) भारत, चीन, रूस और जर्मनी में बिकता है। साइबेरिया की खानों में भी लाजवर्द मिलता है। हजारों वर्ष पहले लाजवर्द की मुहरे बनाई जाती थी। एक प्राचीन बादशाहतोतन खान की कब्र खोदने पर जो वस्तुएं निकली उनमें लाजवर्द जड़ा हुआ था। लेपिस लजूली का अर्थ होता है नीला पत्थर।

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