रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान|रुद्राक्ष कौन सा पहनना चाहिए?

रुद्राक्ष पहनने के फायदे

आज की इस भागदौड़ की जिंदगी में हर व्यक्ति किसी न किसी परेशानी से जूझ रहा है ,और इन्ही परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए इंसान कोई न कोई उपायों के जरिये प्रयत्न करता रहता है, आइये! इस पोस्ट में जानते है,रुद्राक्ष पहनने के फायदे। 

रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान

भगवान भोलेनाथ का रुद्राक्ष इन्ही उपायों में सबसे चमत्कारी है,आइये जानते है-रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान | रुद्राक्ष कौन सा पहनना चाहिए? जिससे की हमारे जीवन की परेशानियाँ ख़त्म हो। 

रुद्राक्ष (Rudraksh) पहनने के फायदे और नुकसान

रुद्राक्ष क्या है।

चलिए, सबसे पहले यह जानते है की, रुद्राक्ष क्या है ?
“रुद्राक्ष” , एक ‘इलियोकार्पस गेनिट्रस’ नमक पेड़ का फल है। यह फल जब पक जाता है, तब पेड़ से नीचे गिर जाता है। इस गोल आकार के फल के ऊपर बेर के समान एक परत होती है, जब इस परत को हटाया जाता है, फिर इसमें से निकलता है एक अमूल्य और पूजनीय “रुद्राक्ष”

फिर इस गुठली को साफ किया जाता है, और साफ करने के बाद रुद्राक्ष उभरकर सामने आता है, इसपर धारियां रहती है, और इन्ही धारियों को गिनकर यह निर्धारित किया जाता है की रुद्राक्ष कितने मुखी का है।

रुद्राक्ष यानी कि एक तरह से भगवान शंकर का वरदान, रुद्राक्ष यानी कि त्रिनेत्रधारी भगवान शिव का अंश। भारतीय संस्कृति में रुद्राक्ष का बहुत अधिक महत्व माना जाता है।

रुद्राक्ष इंसान को हर तरह की हानिकारक ऊर्जाओं से दूर रखता है, रुद्राक्ष के इस्तेमाल से जीवन की हर तरह की बाधाएं टल जाती है।  

आपने चमत्कारी रुद्राक्ष का महत्व तो जान लिया, लेकिन क्या आप जानते हैं रुद्राक्ष आपको कैसे  लाभ दे सकता है और किन हालातों में रुद्राक्ष आपको नुकसान भी कर दे सकता है। 

आइए जानते हैं रुद्राक्ष धारण करने के लिए कुछ खास नियम और सावधानियां-जिससे आप रुद्राक्ष का पूर्ण लाभ प्राप्त कर सकते हैं। 

रुद्राक्ष के प्राप्ति स्थान

भारत में रुद्राक्ष ऊँचे पहाड़ी इलाकों, खासकर हिमालय क्षेत्रों में पाया जाता है। इसके आलावा भारत में रुद्राक्ष देहरादून, हरिद्वार, बंगाल, गढ़वाल, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश और असम के जंगलों में मिलता है।

दक्षिण भारत के कुछ इलाकों मैसूर और कर्नाटक में भी रुद्राक्ष की उत्पत्ति होती है।

विदेशों में नेपाल, बर्मा, इंडोनेशिया, मलेशिया में रुद्राक्ष के पेड़ पाए जाते है। नेपाल के रुद्राक्ष भारत और अन्य क्षेत्रों के रुद्राक्षों से बड़े होते है, नेपाल और इंडोनेशिया के रुद्राक्ष की भारत में काफी बड़े पैमाने पर मांग रहती है और काफी बड़े स्तर पर इसका कारोबार होता है।

भद्राक्ष ! क्या है ? इसे भी जान ले

भद्राक्ष, भी एक प्रकार का बीज ही होता है, जो बिलकुल-लगभग रुद्राक्ष जैसा ही दिखता है। भद्राक्ष के हूबहू रुद्राक्ष की तरह दिखने की वजय से बाजार में इसे बड़े पैमाने पर बेच दिया जाता है।
जबकि गुणों के अनुसार यह रुद्राक्ष के आस पास भी नहीं होता है। इसलिए रुद्राक्ष धारण करने से पहले इसका अच्छे से परीक्षण कर लेना चाहिए।

रुद्राक्ष पहनकर क्या नहीं करना चाहिए?

मांस मदिरा से दूर रहे,नहीं तो बढ़ेंगे कष्ट 

 

रुद्राक्ष कौन से धागे में पहनना चाहिए?

 

  • पीले या लाल डोरी में रुद्राक्ष धारण करे। 
  • सोमवार को रुद्राक्ष धारण करना ही उत्तम माना जाता है। 
  • रुद्राक्ष किसी धातु के साथ धारण करना और भी अच्छा माना जाता है। 
  • तांबे के साथ धारण करने पर रुद्राक्ष चमत्कारी परिणाम देता है। 
  • दूसरे की पहनी हुई रुद्राक्ष की माला कभी ना धारण करें। 
  • किसी शुभ मुहूर्त में रुद्राक्ष धारण करे।  
  • अंगूठी में रुद्राक्ष कभी भी धारण नहीं करना चाहिए। 

 

अगर आप पूर्ण विधि-विधान से रुद्राक्ष धारण करेंगे तो आपको जीवन में सभी प्रकार की सुखों की प्राप्ति होगी और परेशानियां और कष्ट दूर होंगे और साथ के साथ ही आपकी हर मनोकामना पूर्ण होगी। 

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कहते हैं कि शिवजी के प्रतीक रुद्राक्ष को धारण करने मात्र से ही भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। रुद्राक्ष धारण करने वाले पर  भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा रहती है। परेशानी कोई भी हो बाधाएं कैसी भी आ रही हो ,रुद्राक्ष धारण करने से सभी परेशानियों का समाधान होता है। 

 

जिस तरह भगवान भोलेनाथ के कई नाम है, उसी प्रकार रुद्राक्ष के भी कई प्रकार हैं और सभी रुद्राक्षों का अलग अलग महत्व है। तो आइए जानते हैं रुद्राक्ष कितने प्रकार के होते हैं और इनका क्या महत्व है। 

 

अगर हर इंसान अपनी जरूरत के अनुसार रुद्राक्ष धारण करें तो जीवन में हर प्रकार की सुख, शांति ,संपदा का आगमन होता है। 

मान्यता है कि रुद्राक्ष भगवान शिव की आंसुओं से प्रकट हुआ था, इसलिए इसमें दुनिया की हर समस्या का समाधान करने की क्षमता है। 

रुद्राक्ष जीवन में सफलता, धन और मान सम्मान दिलाने में सहायता करता है।  

 रुद्राक्ष कौन सा पहनना चाहिए?( रुद्राक्ष पहनने के फायदे )

14  प्रकार के रुद्राक्ष होते है, इनमे गौरी शंकर रुद्राक्ष भी होता है, जो की आपस में जुड़े रहते है। 

 

रुद्राक्ष कौन से धागे में पहनना चाहिए?

 

तो आइए जानते हैं कौन से रुद्राक्ष से क्या फायदा मिलता है- ( रुद्राक्ष पहनने के फायदे )

रुद्राक्ष पर धारियां होती है,इन धारियों को मुखी कहा जाता है और रुद्राक्ष के कितने मुखी होने का पता चलता है। 

 

  • स्वय भगवान शिव का रूप माना जाता है 1 मुखी रुद्राक्ष
  • अर्द्ध नारीश्वर का स्वरुप है 2 मुखी रुद्राक्ष।  
  • अग्नि का स्वरूप है 3 मुखी रुद्राक्ष   
  • साक्षात् ब्रह्मा का रूप  माना जाता है 4 मुखी रुद्राक्ष 
  • कालाग्नि रूद्र का स्वरुप है 5 रुद्राक्ष  
  • भगवान श्री कार्तिकेय का रूप है 6 मुखी रुद्राक्ष  
  • प्रभु अनंत का रूप है 7 मुखी रुद्राक्ष 
  • बटुक भैरव का रूप है  8 मुखी रुद्राक्ष 
  • मां दुर्गा का स्वरूप है 9 मुखी रुद्राक्ष   
  • श्री हरि विष्णु का स्वरुप है 10 मुखी रुद्राक्ष
  • रूद्र इंद्रदेव का स्वरूप है 11 मुखी रुद्राक्ष 
  • बारह आदित्य  का स्वरूप है 12 मुखी रुद्राक्ष   
  • इंद्रदेव का स्वरूप है 13 मुखी रुद्राक्ष 
  • बजरंगबली श्री हनुमान जी का स्वरूप माना जाता है 14 मुखी का रुद्राक्ष 
  • श्री गणेश और गौरी शंकर रुद्राक्ष भी होते हैं। 

 

रुद्राक्ष का इतना महत्व क्यों है ? असल में रुद्राक्ष एक फल की गुठली है और विशेष तौर पर रुद्राक्ष का औषधीय और आध्यात्मिक रूप से महत्व है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव की आंखों से निकले आंसुओ से रुद्राक्ष की उत्पति हुई। जीवन में रुद्राक्ष धारण करने से या उसके विशेष प्रयोग से विशेष फलो की प्राप्ति होती है। 

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रुद्राक्ष कौन पहन सकता है?

 
 

रुद्राक्ष कोई भी इंसान धारण कर सकता है। 

 
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रुद्राक्ष की विशेषता

रुद्राक्ष पहनने के फायदे

 

तंत्र – साधना के परिप्रेक्ष्य में रुद्राक्ष को अति प्रभावी और उपयोगी माना गया है। तंत्र विशेषज्ञों के अनुसार रुद्राक्षी एक ऐसा फल है, जो सदैव शुभ फल ही देता है। रुद्राक्ष का उपयोग सभी कर सकते हैं।

रुद्राक्ष जहां एक तरफ भाग्य को उज्जवल बनाता है, वही अशांत आत्माओं से भी बचाता है ,तथा स्वस्थ और निरोग भी रखता है। यह मस्तिष्क और हृदय को शक्ति  देता है। रक्त स्तोत्र और स्नायु को स्निग्ध्ता प्रदान करता है।

रुद्राक्ष धारण करने से जीवन में शांति और आत्म शक्ति प्राप्त होती है। शुद्ध रुद्राक्ष लघुता से गरिमा और प्रतिष्ठा की ओर ले जाता है।

कितने मुखी रुद्राक्ष पहनना चाहिए?

कितने मुखी रुद्राक्ष पहनना चाहिए?( रुद्राक्ष पहनने के फायदे )

 
 

1 मुखी रुद्राक्ष

एक मुखी रुद्राक्ष जीवन में सभी प्रकार सुख ,उनत्ति,तरक्की और मोक्ष प्रदान करता है अशुभ फलों और अनिष्टों से मुक्ति दिलाता है एक मुखी रुद्राक्ष। 

2 मुखी रुद्राक्ष 

दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मान सम्मान और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कई तरह के रोग बीमारियों को भी दूर भगाता है यह दो मुखी रुद्राक्ष। दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने से पति पत्नी और पारिवारिक जीवन में सुख शांति रहती है 

 

3 मुखी रुद्राक्ष 

अच्छी विद्या पाने के लिए तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करता है तीन मुखी रुद्राक्ष। 

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4 मुखी रुद्राक्ष 

धर्म अर्थ काम और मोक्ष प्रदान करने वाला होता है चार मुखी रुद्राक्ष। 

 

5 मुखी रुद्राक्ष 

अच्छी सेहत और समस्याओं के समाधान के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने से लीवर की समस्याएं भी दूर होती हैं। 

 

6 मुखी रुद्राक्ष 

पापों से मुक्ति और संतान देने वाला होता है छह मुखी रुद्राक्ष। काम क्रोध लोभ मोह पर नियंत्रण करने के लिए भी उत्तम होता है। छह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से बढ़ती है आत्मशक्ति। 

 

7 मुखी रुद्राक्ष 

जीवन बनाने में मदद करता है ,मृत्यु के कष्टों से छुटकारा भी दिलाता है सात मुखी रुद्राक्ष। सात मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से दूर होती है गरीबी। 

 

8 मुखी रुद्राक्ष 

लंबी आयु की कामना के लिए आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। मान सम्मान की प्राप्ति होती है। जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। 

 

9 मुखी रुद्राक्ष 

सभी मनोकामना की पूर्ति करता है नौ मुखी रुद्राक्ष। इसे धारण करने से वीरता, साहस और पराक्रम बढ़ता है। मृत्यु के डर से मुक्त करता है नौ मुखी रुद्राक्ष। 

 

10 मुखी रुद्राक्ष 

संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले इसे जरूर धारण करें। सभी बाधाओं को दूर करके सुख समृद्धि प्रदान करता है दस मुखी रुद्राक्ष। दस मुखी रुद्राक्ष धारण करने से जीवन सुंदर और सुखमय होता है 

 

11 मुखी रुद्राक्ष 

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने वाले को हर काम में सफलता मिलती है। 

 

12 मुखी रुद्राक्ष 

बाराह मुखी रुद्राक्ष सभी बाधाओं को दूर करने वाला रुद्राक्ष माना जाता है। सूर्य से जुड़ी तमाम परेशानियों को दूर करने के लिए 12 मुखी रुद्राक्ष धारण करें। धन प्राप्ति के रास्ते भी खोलता है बाराह मुखी रुद्राक्ष। 

 

13 मुखी रुद्राक्ष 

धन-संपत्ति सौभाग्य और कामना पूरी करने वाला रुद्राक्ष है 13 मुखी रुद्राक्ष। 

 

14 मुखी रुद्राक्ष 

सभी पापों को नष्ट करने वाला होता है चौदह मुखी रुद्राक्ष। हर तरह की परेशानी और बाधाओं से मुक्ति दिलाता है यह चौदह मुखी रुद्राक्ष। इसे धारण करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है। 

रुद्राक्ष पहनने के फायदे 

चमत्कारी शक्तियों से भरे  है शिव के रुद्राक्ष। तो आप भी रुद्राक्ष धारण करके अपने जीवन की तमाम मुश्किलों को दूर कर सकते हैं और साथ ही आपकी किस्मत भी चमकने लगेगी।  

जीवन में रुद्राक्ष को धारण करने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। रुद्राक्ष धारण करने वाले पर शिव की विशेष कृपा रहती है। 

 

लेकिन रुद्राक्ष धारण करने से पहले रुद्राक्ष की विधिवत पूजन किया जाना चाहिए, इसके बाद मंत्र जाप करते हुए इन्हें धारण करना चाहिए। 

 

चलिए ! आपको रुद्राक्ष से जुड़ी हुई कुछ विशेष बातों के बारे में बताते हैं।

 

चलिए ! आपको रुद्राक्ष से जुड़ी हुई कुछ विशेष बातों के बारे में बताते हैं। 

 

जिस इंसान को महादेव की कृपा जिसे हासिल हो जाती है, फिर उसे किसी का डर नहीं हो सकता। भोलेनाथ के हाथों से बने रुद्राक्ष से ज्यादा ताकतवर इस संसार में कुछ भी नहीं हो सकता। 

रुद्राक्ष को रुद्र का अंश या आँसु कहा जाता है। रुद्राक्ष इस धरती पर एक ऐसी वस्तु है जिसे मन्त्र जाप और ग्रहो को नियंत्रित करने के लिए सबसे उत्तम मन जाता है। ऐसा माना जाता है की अगर रुद्राक्ष को धारण करने के नियमो का पालन किया जाये, तो शनि की सभी तरह की परेशानियाँ दूर हो जाती है। शनि की साढ़े साती और ढैया भी खास प्रकार के रुद्राक्ष धारण करने से दूर हो जाती है। 

 

शनि की साढ़ेसाती हो तो उसके लिए गले में रुद्राक्ष की माला धारण करें। यह माला अगर पांच मुखी रुद्राक्ष की हो तो सबसे उत्तम है। 

 

कुंडली में अगर शनि अशुभ योग दे रहा हो तो रुद्राक्ष के प्रयोग से कैसे आप लाभ ले सकते हैं। 

कुंडली में अगर शनि का अशुभ योग हो तो, 1 मुखी और 11 मुखी रुद्राक्ष, एक साथ धारण करने से शनि ग्रह से संबंधित परेशानियों से शांति प्राप्त होती है। इसमें एक दाना 1 मुखी और दो  दाने 11 मुखी रुद्राक्ष रखें।  इनको एक साथ लाल धागे में सोमवार के दिन पूर्ण विधि विधान से धारण  करें और लाभ प्राप्त करे। 

 

रुद्राक्ष कुछ खास नियम होते हैं, अगर उन नियमों का पालन ना किया जाए तो कुछ बुरे प्रभाव भी हो सकते हैं या आने लगते हैं। अगर रुद्राक्ष का सही प्रकार से इस्तेमाल किया जाए तो शनि की टेढ़ी दृष्टि से होने वाली कष्टों से भी आप मुक्ति पा सकते हैं। 

रुद्राक्ष की क्या पहचान है?

रुद्राक्ष की परख 

वही रुद्राक्ष प्रयोज्य और प्रभावी होता है, जिसका दाना समूचा हो, कहीं से टूटा फूटा न हो, दरका या विकृत ना हो। उस पर धारियां स्पष्ट हो, तथा कांटे उभरे हुए हो। रुद्राक्ष दाना पानी में डूब जाए, तांबे के दो टुकड़ों के बीच में रखने से घूमने लगे। घना छिद्र युक्त ना हो, चमकीला और वजनदार हो, ऐसा दाना ही सर्वोत्तम और श्रेष्ठ माना जाता है।

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