वृषभ राशि का संपूर्ण जीवन

वृषभ राशि में जन्म लेने वालों का भाग्य फल

राशि – वृष/वृषभ
राशि का स्वामी – शुक्र
राशि के अक्षर – ई , ऊ , ए , ओ , वा , वी , बू , बे , वो
दिनांक – २१ अप्रैल से २० मई तक

वृषभ राशि भूमि तत्व राशि, संज्ञक राशि, दक्षिण दिशा का प्रतिनिधित्व करने वाली, स्त्री जाति, सफेद वर्ण की, कांति हीन, वैश्य वर्ण, शिथिल शरीर, शुभ कारक, तथा महा शब्दकारी होती है।

वृषभ राशि स्वभाव से स्वार्थी, सांसारिक कार्यों को लेकर उत्साहित, और हर क्षेत्र में अपनी बुद्धि से कार्य करने वाली होती है। वृष राशि एक अर्थ जल राशि भी होती है।

वृषभ राशि से मुख और जबड़ों के बारे में विचार किया जाता है।

वृष राशि

वृष राशि, राशिचक्र की दूसरी राशि है, अंग्रेजी में वृष राशि को Taurus बोला जाता है।वृष राशि के जातक सांसारिक सुखों को भोगने वाले, सांसारिक कार्यों में आगे रहने वाले, तेज तर्रार, मिलनसार व्यवहार वाले, सोच समझकर कार्य करने वाले, सौंदर्य को पसंद करने वाले, गीत संगीत के शौकीन होते है।

वृष राशि का स्वामी ग्रह शुक्र होता है, शुक्र सौंदर्य और काम वासना का ग्रह है। इसलिए, वृष राशि के जातकों में सौंदर्य और विपरीत लिंग के प्रति विशेष आकर्षण देखने को मिलता है।

वृष जातक और हीरा रत्न

वृष राशि का स्वामी शुक्र है, और शुक्र ग्रह का रत्न हीरा होने से वृष जातकों को हीरा धारण करना बहुत लाभकारी रहता है। इसके आलावा वृष जातक ओपल, क्रिस्टल, सफेद हकीक भी धारण कर सकते है।

ज्यादातर हीरा कोयले की खदानों से प्राप्त होता है। रासायनिक विश्लेषण के आधार पर देखा जाये तो हीरा एक प्रकार से कार्बन का ही रूप है।

हीरा शुक्र ग्रह का रत्न होने से यह शुक्र ग्रह की ही तरह श्वेत और रौशनी प्रतिबिंबित करने वाला रत्न है। हीरा रत्नों का सम्राट माना जाता है और यह एक बहुत सुन्दर, कीमती और मूलयवान रत्न है।

हीरा अति प्रभवशाली रत्न है, बहुत जल्दी अपने प्रभाव दिखाता है, हीरे को लेकर तो ढेरों कहानियां भी है, हीरे ने कई राजपाट ख़त्म कर दिए तो कइयों को सम्राट भी बना दिया।

हीरे की विशेषता तथा धारण करने से लाभ

शुक्र का रत्न हीरा धारण करने से शुक्र के बुरे प्रभाव ख़त्म होते है। जिन जातकों की जन्म कुंडली में शुक्र दुर्बल अवस्था में है, उन्हें हीरा जरूर धारण करना चाहिए, इसके आलावा वृषभ और तुला राशि, वृषभ और तुला लग्न वाले जातकों को भी हीरा जरूर धारण करना चाहिए। इन जातकों का हीरा रत्न धारण करने से इनका दुर्भाग्य सौभाग्य में बदल जाता है।

हीरे में इतने गुण है की जो व्यक्ति हीरा धारण करता है, उसका चेहरा तेजवान रहता है, चेहरे पर ख़ुशी और मुस्कान रहती है, वह हर प्रकार से संतुष्ट दिखता है, जीवन खुशहाल हो जाता है, जीवन के समस्त सुख प्राप्त होने लगते है। इसके आलावा व्यक्ति धन-धान्य से परिपूर्ण होने लगता है।

हीरा व्यक्ति की शारीरिक दुर्बलता को ख़त्म करता है, शरीर में नवीन ऊर्जा का संचालन करता है, पौरुष शक्ति को बढ़ता है, मानसिक दुर्बलताओं का नाश करता है, दांपत्य जीवन में खुशियां लाता है, और सहवास क्रिया में स्तंभन शक्ति को बढ़ाता है। मानसिक चिंताओं को दूर करते हुए स्वस्थ जीवन देता है।

यही नहीं, हीरा इतना प्रभवशाली रत्न है की, इसके धारण से भूत प्रेत जैसी बाधाए बिलकुल भी पास नहीं फटकती। जादू टोना, किये कराये का कुछ असर नहीं होता।

हीरा धारण करने की विधि

जब भी हीरा धारण किया जाये, हीरा कम से कम २० सेण्ट का होना ही चाहिए, तभी वह प्रभावशाली रहेगा। २० सेण्ट के ऊपर तो आप अपनी क्षमता के अनुसार धारण कर सकते है, अधिक वजन, अधिक लाभकारी रहता ही है।

हीरे को हमेशा १८ कैरट गोल्ड या फिर चांदी की अंगूठी में ही धारण करना चाहिए। हीरा धारण करने का दिन शुक्रवार होता है और हीरे के ज्योतिषीय लाभ पाने के लिए सदा मध्यमा ऊँगली में ही धारण करना चाहिए।

हीरे की अंगूठी कभी भी धारण करने से पहले गंगाजल से शुद्ध करनी चाहिए, पूरी विधि विधान से पूजा करे, शुक्र मन्त्र का कम से कम १०८ बार जप करे, ( ‘ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:’ ) , जाप करने के बाद अपने इष्ट देव का स्मरण करें, शुक्र देव से अपनी इच्छाओं को पूरी होने का स्मरण करे, और अपने इष्ट देव के चरणों में स्पर्श करके धारण करें।

हीरा धारण किये गए दिन से ७ वर्ष तक जाग्रत और प्रभवशाली रहता है।

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वृषभ राशि / शारीरक रचना

वृषभ जातक दिखने में गठे हुए बदन के होते हैं। इनके कंधे अच्छे चौड़े , चौड़ा माथा और गर्दन मोटी होती है। 21 अप्रैल से 20 मई तक की तारीखों में जन्म लेने वाली वृष महिलाओं के पैर छोटे और उन्नत उरोज होते हैं।

वृषभ राशि में जन्म लेने वाले जातक शांत प्रवृत्ति के होते हैं। बहुत ही धैर्यवान होते हैं, मेहनत और परिश्रम से अपना जीवन जीने वाले होते हैं, और हर वक्त अपने कार्य में व्यस्त रहने वाले होते हैं। किसी भी तरह के व्यर्थ के खर्चे और फिजूल खर्चो से यह पूरी तरह से दूर रहते हैं।

वृषभ राशि पर शुक्र का प्रभाव

21 अप्रैल से 20 मई तक तारीख में जन्म लेने वाले जातकों पर शुक्र ग्रह अपना पूरा असर और अस्तित्व रखता है।
शुक्र ग्रह कफ और वीर्य आदि धातुओं का जनक माना जाता है। शुक्र का प्रभाव वृष जातकों पर रहने की वजह से इनका रंग गेहुआ होता है।

शुक्र ग्रह गीत, संगीत, काव्य, कविता, सुन्दर वस्त्र ,अच्छे-अच्छे वाहन, शैया, फूल, इत्र, स्त्रियां, प्रेमिका, और काम इच्छा ,आदि का कारक होता है।
शुक्र ग्रह से वृषभ राशि के जातकों की बुद्धिमता और चतुरता है। सांसारिक सुखों से संबंधित विचार किए जाते हैं।

जिन जातकों का जन्म इन दिनांक में हुआ हो तो शुक्र की स्थिति कुंडली में देखते हुए माता के संबंध में भी विचार किया जाता है।

वृषभ राशि / आर्थिक जीवन

वृषभ राशि में जन्म लेने वाले जातक अत्यंत ईमानदार, वफादार मित्र, सरकारी कर्मचारी, फौजी अफसर, सरकारी क्षेत्रों में उच्च अधिकारी या प्रमुख बनते हैं। वृषभ जातक नामी स्त्रियों के डॉक्टर या अस्पताल से संबंधित कार्यों में भी रहते हैं।

अपने जीवन में धन को जमा करना, संपत्ति बढ़ाना, इनके जीवन में विशेष महत्व होता है और इनमें इसकी इच्छा बहुत प्रबल रहती है।

अपने कार्यों में यह विशेष रूप से दिलचस्पी लेकर करने वाले होते हैं। हर कार्य को बहुत ही मेहनत और लगन से करते हैं और बड़े व्यवस्थित ढंग से करते हैं।
वृष जातकों को अपने जीवन में पैतृक संपत्ति और पैतृक धन प्राप्त होता है।

वृषभ राशि /व्यवहार

वृषभ जातकों में सामंजस्य को लेकर अंतर्निहित समझ होती है। इनको गीत-संगीत, कविताएं और कला के क्षेत्रों में बहुत अच्छी सफलता प्राप्त करते हुए देखा गया है। लेकिन ज्यादातर देखा गया है कि वृष जातक अपने गुणों और प्रतिभा का पूरी तरह से आर्थिक लाभ नहीं उठा पाते हैं।

वृष जातक अगर किसी झगड़े फसाद में पड़ जाए तो फिर वह खुलकर लड़ने में यकीन रखते हैं। फिर चाहे इसमें इनका नुकसान ही क्यों ना हो जाए।

वैसे तो ज्यादातर यह लोग शांत रहते हैं, लेकिन अगर एक बार इन्हें गुस्सा आ जाए इनके रक्त में उबाल आ जाए, फिर तो यह किसी भी तरह का समझौता करने के लिए तैयार नहीं रहते और ना ही किसी भी तरह का यह आत्मसमर्पण करते हैं।

ज्यादातर वृषभ राशि के जातक जब किसी की सहायता करते हैं, तो उसके बदले में उन्हें कटु अनुभव ही मिलते हैं। इनके जीवन में किसी भी तरह की सहकारिता, भागीदारी संपर्क को से इन्हें लाभ मिलता है।

वृषभ राशि / पारिवारिक जीवन

इनको बाहरी और सांसारिक जीवन से बहुत प्रेम होता है। जब तक इन्हें यह सभी सुख मिलते रहते हैं तब तक यह शांति पूर्वक अपना कार्य करते रहते हैं। अगर इनके जीवन में कोई प्रेम प्रसंग हो जाए तो यह बड़ी ही आसानी से उसके प्रभाव में आ जाते हैं।

वृषभ राशि के जातकों का सामान्य तौर पर अच्छे घरानों में विवाह होता है। इनके एक से अधिक विवाह होते हुए भी देखे जाते है।

वृष जातक अपनी राशि के अनुसार मानसिक रूप से बहुत मजबूत होते हैं और शारीरिक रूप से भी काफी शक्तिशाली होते है।

समाज के साथ जुड़कर रहते है, सामाजिक होते हैं और जिन से लगाव रखते हैं उनका आदर सत्कार करने में इन्हें बहुत प्रशांत प्रसन्नता होती है। यह बहुत शानदार मेजबान होते है।

यह लोग पारिवारिक होते हैं अपने बच्चों से बहुत प्यार करने वाले होते हैं। घर परिवार में विशेष रूचि रखते हैं, ध्यान देते हैं।

अपने परिवार में बच्चों की देखरेख करना, उनकी हर जरूरतों पर विशेष ध्यान रखना इन्हें बहुत अच्छा लगता है। यह लोग जीवन में बहुत ही आराम पसंद व्यक्ति होते है।

अपने जीवनसाथी से बहुत लगाव और प्यार करते हैं। किसी भी पत्नी के लिए वृष राशि का जातक एक बहुत ही अच्छा पति साबित होता है।

इनमें एक विशेष दिलचस्पी भी होती है, और वह है, इनका रतिक्रिया में बहुत दिलचस्पी लेना।

वृषभ राशि / स्वास्थय

वृष जातकों को मादकता बढ़ाने वाले व गरिष्ठ भोजन से दूर रहना चाहिए।

अपने जीवन के अंतिम समय में इन्हें जलोदर रोग होने की संभावना रहती है।

वैसे तो इनका स्वास्थ्य ठीक ही रहता है, फिर भी इन्हें मुख्य तौर पर निष्क्रियता और आत्मरति से खतरा रहता है। इन्हें अपने खानपान का विशेष ध्यान देना ही चाहिए। अगर इनका स्वास्थ्य खराब रहा तो इन्हें कई तरह के रोग हो सकते हैं। गुर्दों, गले और प्रजनन अंगों से संबंधित रोग हो सकते हैं।

वृषभ राशि महिलाएं

वृष राशि की महिलाओं में अच्छी व्यवसाईक योग्यता होती है और संगठन करने की अच्छी शक्ति होती है। वृष महिलाएं अपने स्वभाव के मूल गुण कला और प्रेम को अपने आस पास ही रखती हैं।

यह बहुत उधार और कोमल हृदय की होती हैं। यह अपने जीवन में जिस किसी पुरुष से भी प्रेम करती हैं, उनके लिए अपने जीवन में कुछ भी करने को तैयार रहती है। उनके लिए यह बड़े से बड़ा त्याग भी कर देती हैं।

इसी के विपरीत यदि किसी पुरुष से नफरत करने लगती है, तो मरते दम तक भी उससे घृणा ही रखती है।

वृषभ महिलाएं अपने आसपास के वातावरण को बहुत अच्छा रखना चाहती है।

वृष महिलाओं को अगर किसी भी तरह की प्रतिकूल परिस्थितियों में रहना पड़े या फिर रहने को विवश हो, तब ऐसी परिस्थितियों में यह काफी उदास हो जाती है।

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वृष राशि की स्त्रियों को जल्दी या कम उम्र में विवाह नहीं करना चाहिए। लेकिन दूसरी ओर वृष महिलाएं बहुत जल्दी दिखने लगती हैं।
इनकी मन में जल्दी विवाह की इच्छा उत्पन्न होने की वजह से यह विवाह में जल्दबाजी कर बैठती हैं।

भोजन के प्रति वृष जातिकाओं की विशेष रुचि रहती है और वृष जातिकाओं को अच्छे व्यंजन बनाने का बहुत शौक होता है।

घर को कलात्मक ढंग से सजाकर रखने का और घर में हर वस्तु अच्छी दिखे, इसका विशेष ध्यान रखती हैं।

इन्हें खुद और अपने रहन-सहन को अमीर दिखाना बहुत अच्छा लगता है।

यह अपनी भावनाओं और संवेदनाओं के वश में रहती हैं। इनके जीवन में प्रेम का बहुत प्रभाव रहता है।

वृषभ जातक / सावधानियां

वृष जातकों को अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष ध्यान रखना पड़ता है। वैसे तो इनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है, लेकिन अगर इनका स्वास्थ्य एक बार खराब हो जाए तो फिर इन्हें कई तरह के रोग होने का डर हो जाता है।

वृष जातकों को शराब के सेवन से दूर रहना चाहिए नहीं तो इनके इनको फेफड़ों के रोग होने की संभावना रहती है। खानपान का विशेष ध्यान रखें, ज्यादा तेल युक्त पदार्थों से दूर रहें, खट्टी चीजों से दूर रहे,
इनको अपने गले का भी ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इन्हें बार-बार टॉन्सिल जैसे रोग होने की संभावना बनी रहती है।

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