धनु राशि वाले को कौन सा रत्न पहनना चाहिए

धनु जातक अक्सर इस बात को लेकर असमंजस में रहते है की कौन सा रत्न धारण करने से उनका भाग्य चमकेगा, किस रत्न के धारण करने से उन्हें जीवन में उनत्ति और तरक्की मिलेगी, धन लाभ होगा, अच्छा स्वास्थ्य मिलेगा, आइये आज इस पोस्ट में हम सम्पूर्ण रूप से इसी विषय पर चर्चा करेंगे की, धनु राशि वाले को कौन सा रत्न पहनना चाहिए, जिससे उन्हें जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति हो।

धनु राशि के अधिपति देवता ब्रहस्पति है, और पीला पुखराज ब्रहस्पति ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है, पीला पुखराज ब्रहस्पति ग्रह के समस्त शुभ प्रभावों का संचालन करते हुए धनु राशि के जातकों को भाग्यवृद्धि, धन लाभ, सामाजिक सम्मान, कारोबार में आर्थिक उनत्ति, उच्च शिक्षा, और अच्छा स्वास्थय प्रदान करता है।

इस पोस्ट में हम जानेंगे की :-धनु राशि वाले को कौन सा रत्न…

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धनु राशि

धनु राशि की आकृति हाथ में तीर लिए एक मनुष्य की है, जिसका पिछला हिस्सा एक घोड़े का है। यही वजय है की इस राशि को धनु बोला जाता है।

धनु राशि राशिचक्र के नौवें पायदान पर आती है। इस राशि के देवता ग्रह “ब्रहस्पति” है। धनु राशि गोरे वर्ण, सुन्दर काले बाल, और लम्बे कद को दर्शाती है।

२० दिसम्बर से १९ जनवरी के बीच जन्म लेने वाले जातकों की राशि धनु होती है, यह एक द्विस्वभाव राशि है, अग्नि तत्व राशि, और उत्तर पश्चिम दिशा की स्वामिनी है। यह राशि युद्ध क्षेत्रो में निवास करती है।
मनुष्य के शरीर में यह राशि जंघा और नितम्बों का प्रतिनिधित्व करती है।
सुनहरे रंग की इस राशि का रत्न पीला पुखराज होता है, इस राशि के देवता ब्रह्मा और शिव है। धनु राशि को राशि को मंत्री पद प्राप्त। है।

धनु राशि के जातक

धनु राशि में जन्म लेने वाले जातक बहुत दार्शनिक विचारों वाले रहते है, ईश्वर पर इनकी बहुत आस्था रहती है, यह लोग धार्मिक कार्यो में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है, जीवन में अपने लक्ष्यों को लेकर बहुत संजीदा और सक्रीय रहते है।
धनु जातक बहुत बुद्धिमान और विद्वान होते है, साहित्यकार और जीवन की सभी तरह की सांसारिक घटनाओं का ध्यान रखते है।

ज्यादातर धनु जातक उच्चकोटि के सलाहकार, किसी धार्मिक स्थल के महंत, अधिवक्ता, डॉक्टर, कला जगत से जुड़े हुए, उपदेशक, वैध, उच्च सरकारी पदों पर कार्यरत, आदि जगहों को देखने को मिलते है।

धनु जातकों का रूप रंग और स्वाभाव

धनु जातकों का डीलडोल अच्छा ऊँचा और आकर्षक होता है, देखने में यह पुराने भारत के समय के लगते है, इनकी आंखे सुन्दर होती है, अच्छा खासा चौड़ा सीना होता है, यह लोग सीधे तन कर चलते है, फुर्तीले, चुस्त, कार्यकुशल, वाकपटु, अपने कार्यो को बढ़ चढ़ कर, मन लगाकर करने वाले होते है।
धनु जातक अपने राशि चिन्ह की ही तरह हमेशा अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सदैव अग्रसर रहते है।

इनमें दुसरो की भावनाओं को जान लेने की अदभुत क्षमता होती है, इनको क्रोध जल्दी आ जाता है, समय की पाबन्दी का पालन करने वाले होते है, जो नहीं करता तो उनपर तुरंत नाराज हो जाते है, किसी भी काम को बहुत परिश्रम से करते है। ज्यादा सजना सवरना, तड़क भड़क इन्हें पसंद नहीं आती।

धनु जातक अपने विपरीत लिंग यानि की स्त्रियों की तरफ विशेष आकर्षित रहते है, अगर ये किसी से लगाव करते है तो फिर उसमे किसी भी तरह का विश्वासघात या छलावा यह लोग बर्दाश्त नहीं करते,
धनु जातकों में काम वासना की अधिकता रहती है, उसके बावजूद भी यह लोग बहुत संयमित और शिष्ट ढंग से रहते है।

व्यापार करने की और व्यापारिक भावना धनु जातकों में जन्मजात ही होती है, चुपचाप रहकर दूसरों की बातों को सुनते रहते है, कभी भी अपनी प्रतिक्रिया नहीं देते,
और न ही कभी अपनी इच्छाओं को किसी के सामने प्रदर्शित नहीं करते है, हमेशा अपने मन की बातों को गुप्त रखते है, सोच समझकर योजना बनाते है और चुपचाप उसको अंजाम देते है।

अगर स्वास्थय की दृष्टि से देखा जाये तो धनु जातक ज्यादातर हृदय के रोग, बाईं आंख, सीने में तकलीफ, गुर्दो की समस्या, कान में समस्याओं को झेलते हुए देखे जा सकते है और उनकी जंघाओं में हमेशा दर्द रह सकता है।

धनु जातकों की आजीविका

धनु जातक अगर व्यवसाय से जुड़े रहते है, तो यह उनका अपना शुरू किया हुआ रहता है, जिससे यह अपने जीवन का यापन करते है और अच्छे स्तर तक ले जाते है।
ज्यादातर धनु जातक घर मकान निर्माता, किसी अनुसन्धान से जुड़े हुए, खोजकर्ता, बैंक में अधिकारी, डिज़ाइनर, लेखक, शिक्षाकर्मी, प्रोफेसर, सरकारी संस्थानों पर उच्च पदों पर आसीन, नामी जोतिषचार्य, वायुयान पायलट, आदि जैसे क्षेत्रो में कार्यरत मिलते है।

धनु जातक राजनीती से भी जुड़े हुए मिलते है, राजनीती में भी इन्हें अच्छे पदों पर देखा जा सकता है, धनु जातकों का राजनीती में स्वाभाव उग्र देखा गया है, जिसकी वजय से इनके बहुत से आलोचक होते है।

ये जिस किसी भी व्यवसाय से जुड़े हुए होते है, उस व्यवसाय में शिक्षा और ज्ञान का संबंध आवश्य ही होता है। यह लोग अपने जीवन में अच्छा धन कमाते भी है और खर्च भी करते है, धनु जातक भविष्य के लिए बहुत अधिक धन जोड़ने पर ध्यान नहीं देते।

धनु जातकों का शुरुआती जीवन साधारण रहता है, ४० वर्ष की उम्र में यह तरक्की करने लगते है, और इनका जीवन में स्थायित्व आ जाता है, इनका बुढ़ापा सुखद होता है।

धनु जातकों का वैवाहिक जीवन

अगर देखा जाये तो सामान्य तौर पर धनु जातकों का वैवाहिक जीवन बहुत मधुर नहीं होता है, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एक तो ये क्रोध अधिक करते है, और दूसरा इनमें अधिक कामवासना, जिसकी वजय से इनके वैवाहिक जीवन में झगड़े फसाद बने रहते है, अपने दोहरे स्वाभाव की वजय से भी इनकी अपने जीवन साथी से पटरी नहीं खाती।

फिर भी धनु जातक अपने जीवन साथी से कभी अलग नहीं होते, अपने परिवार को बहुत प्यार करने वाले होते है,
इनकी काफी संताने हो सकती है, और अपनी संतानो को बहुत प्यार करते है और उनका हर प्रकार से बहुत ख्याल रखते है।

धनु जातकों का शुभ वर्ष, वार, तिथियां और माह

धनु जातकों के लिए दक्षिण पच्छिम और दक्षिण पूर्व दिशाएं शुभ रहती है।
इनके लिए १, ३, ५, ७, ९, ११, १४, २१, २३, २७, और ३० तारीख शुभ होती है।
धनु जातकों के लिए रविवार, मंगलवार, ब्रहस्पतिवार, के दिन बहुत शुभ रहते है।
मार्च, मई, जुलाई, अक्टूबर, दिसम्बर महीने शुभ रहते है।
धनु जातकों के लिए जीवन के ३, १२, २१, और ३० वर्ष बहुत शुभ होते है।

धनु जातकों के शुभ रत्न

धनु जातकों के लिए पीला पुखराज सर्वथा शुभ रत्न रहता है, इसके अलावा धनु जातकों के लिए सिट्रीन, पीला जिरकॉन भी बहुत शुभ रहते है।

धनु राशि का अधिपति ग्रह ब्रहस्पति है, और ब्रहस्पति ग्रह का रत्न पीला पुखराज है, पीला पुखराज ब्रहस्पति के समस्त शुभ प्रभावों का संचालन करता है,
इसलिए धनु जातकों को अपने जीवन में पीला पुखराज सदा के लिए धारण करना चाहिए, इस रत्न को धारण करने से धनु राशि के जातकों के जीवन में चमत्कारिक रूप से परिवर्तन आते है, वे जीवन में तरक्की करते हुए, सामाजिक सम्मान के साथ जीवन जीते है।
पुखराज धारण करने से ज्ञान और बुद्धि की वृद्धि होती है, अगर धनु राशि के विध्यार्थी पीला पुखराज धारण करते है तो उन्हें शिक्षा में बहुत अच्छी तरक्की मिलती है।

धनु राशि के जातकों के लिए पीला पुखराज सफलता का कारक है, जीवन को खुशहाल करता है, जीवन में तरक्की और धन लाभ देता है।
ऐसे धनु जातक जो सरकारी पदों पर है, प्रोफेसर, वैज्ञानिक, जज, अधिवक्ता, राजनीती में है ऐसे धनु जातकों के लिए यह रत्न बहुत लाभकारी रहता है।

पुखराज रत्न के लाभ

अगर किसी जातक की जन्मपत्रिका में ब्रहस्पति शुभ भावों में होकर भी कमजोर और प्रभावहीन हो या राहु,केतु,शनि से पीड़ित है तो ऐसी दशा में पुखराज धारण करना अनिवार्य होता है ।

ब्रहस्पति की महादशा और अंतरदशा में भी पुखराज धारण करना बहुत लाभकारी होता है, पुखराज धारण करने से धन वृद्धि होती है, घर में स्वर्ण की वृद्धि होती है, कारोबार में आर्थिक उनत्ति होती है, और अच्छा स्वास्थय लाभ मिलता है।

भाग्यवृद्धि का कारक होता है पीला पुखराज, पुखराज धारण करने से व्यक्ति के अंदर धार्मिक आस्था की वृद्धि होती है, मन को मजबूत करता है और मन को शांत रखता है।

अगर किसी युवक और युवतियों की शादी में बाधाएं आ रही है, शादी बार बार टूट जाती है, या शादी में अन्य किसी तरह की रुकावटें आ रही है, तो ऐसी दशा में ब्रहस्पति का पीला पुखराज धारण करना चाहिए, ऐसा करने से शादी की बाधाएं कम होती है, और शादी के योग बनते है,
ऐसा इसलिए क्योंकि ब्रहस्पति ग्रह को विवाह और वैवाहिक जीवन का कारक माना जाता है, और ब्रहस्पति रत्न धारण करने से शुभ प्रभावों की वृद्धि होती है।

ब्रहस्पति को ज्ञान का कारक भी माना जाता है, ऐसे विद्यार्थी जिनका मन पढ़ाई में बार बार विचलित होता है, या ऐसे विध्यार्थी जो उच्च शिक्षा ग्रहण करना चाहते है, उनको भी पुखराज धारण करने से शिक्षा में बहुत लाभ मिलता है।

पुखराज के अलावा गोल्डन टोपाज भी ब्रहस्पति के लिए धारण किया जा सकता है।

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