best astrologer in india|ज्योतिष, भिलाई-दुर्ग

प्रणाम दोस्तों ! मै लक्ष्मी नारायण “ज्योतिष परामर्श केंद्र” में आपका स्वागत करता हूँ,(best astrologer in india)
साथियों ज्योतिषशास्त्र को लेकर सबका अपना अपना मत है, कोई इसे मानता है और कोई इसे नहीं मानता है,

लेकिन ज्योतिषशास्त्र एक सच्चाई है, जो इसमें यकीन नहीं करते निःसंदेह वह अपने जीवन में एक बहुत बड़ी भूल कर रहे है,
ज्योतिष एक वो शास्त्र है जिसके द्वारा आप अपने जीवन के भविष्य के बारे में जान सकते है, अच्छे बुरे समय के बारे में जानकारी ले सकते है, और बुरे वक़्त में ज्योतिष उपायों को अपनाकर आप अपने जीवन को सही मार्गदर्शन दे सकते है,

कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में बहुत सी अच्छी बुरी घटनाओं का सामना करता है, जीवन में ऐसे बहुत से समय आते है जो ग्रहों की अनुकूलता के साथ हमारे लिए बहुत लाभकारी रहते है, हम ऐसे लाभकारी समय के बारे में जानकर जीवन में बहुत अच्छी तरक्की कर सकते है, और बुरे समय को उपायों द्वारा शांत कर सकते है।

मनुष्य अपनी होनी को तो नहीं टाल सकता लेकिन ज्योतिशास्त्र का साहरा लेकर अपने दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकता है।

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Lakshmi Narayan

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क्या आप कुछ पूछना चाहते है?

लक्ष्मी नारायण देश के जाने माने ज्योतिष है, इनकी संस्था ज्योतिष परामर्श केन्द्र का ऑफिस छत्तीसगढ़, भिलाई में है, जहाँ से लक्ष्मी नारायण अपनी ज्योतिष की सेवाएं प्रदान करते है,
ज्योतिष परामर्श केन्द्र अपनी ज्योतिष सेवाएं ऑफिस के आलावा ऑनलाइन भी प्रदान करता है,
ऑनलाइन सेवाओं में जन्मपत्रिका सेवा, रत्न सेवा, ऑनलाइन जन्मपत्रिका विश्लेषण, ऑनलाइन भाग्यशाली रत्न परामर्श, लड़के-लड़की की जन्मपत्रिका मिलान, प्रेम विवाह में सफलता, नौकरी के योग, शिक्षा के योग, वैवाहिक अनबन, आर्थिक हानि आदि किसी भी विषयों पर परामर्श और उपाय प्रदान करते है।

अगर आप भी अपने जीवन से सम्बंधित कुछ भी जानना चाहते है तो निःसंकोच अपॉइंटमेंट ले और चर्चा करे।

ऑनलाइन कंसल्टेन्सी के नियम।

आपको अपना नाम, जन्म दिनांक, जन्म समय, जन्म स्थान whatsapp पर सेंड करना होगा, उसके बाद आपको कॉल करने का समय दिया जायेगा,
दिए गए समय पर आपको उपलब्ध रहना होगा अगर किसी वजय से बात नहीं होती है तो अगला अपॉइंटमेंट दिया जायेगा।

अपॉइंटमेंट टाइम मिलने पर आपको paytm, phonepe, google pay के जरिये ऑनलाइन पेमेंट करनी होगी, उसके बाद ही दिए गए समय पर चर्चा हो सकेगी।

  • ऑनलाइन कंसल्टेंसी के साधारण चार्ज – 201/- (आपकी जन्मपत्री पर पूर्ण परामर्श)
  • ऑनलाइन पेमेंट (paytm, phonepe, google pay) करने का मोबाइल नंबर- 98261-79774

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Janm-Patrika

जन्म पत्रिका

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ज्योतिष परामर्श केंद्र, ऑनलाइन जन्मपत्रिका का आर्डर लेते है, हमारे संसथान की जन्म पत्रिका आपको कुरियर द्वारा भेजी जाती है।

ज्योतिष परामर्श केंद्र की जन्मपत्रिका में आपके जीवन की सम्पूर्ण महत्वपूर्ण जानकारियां रहती है, जन्मपत्रिका में आपको अपने लग्न, राशि, नक्षत्र, ग्रह दशाएं, राशि विवरण, आपका शुभ अंक, लग्न के सभी भावों में ग्रहों की अवस्था, साढ़े साती समय, कालसर्प योग, मांगलिक योग, भौगोलिक विवरण, पंचांग विवरण, अवहकडा चक्र, ग्रहों की स्थिति, चंद्र कुंडली, नवमांश कुंडली, षोडशवर्ग, सुदर्शन चक्र, विशोंतरी अन्तर्दशा, रत्न विचार, आदि सभी जानकारियां उपलब्ध रहती है।

विशेष – आपके जन्मपत्रिका मंगवाने पर ज्योतिष परामर्श केंद्र आपको आपकी जन्मपत्रिका पर पूर्ण चर्चा करने का अवसर देता है, जो की योग्य ज्योतिष द्वारा दिया जायेगा, और इस चर्चा का किसी भी तरह से कोई भी शुल्क नहीं लिया जायेगा, यह पूरी तरह से निशुल्क होगा।

जन्मपत्रिका का मूल्य 501/- है, 50/- रूपए डिलीवरी चार्ज होगा।
जन्मपत्रिका का मूल्य पहले देना होगा, उसके बाद 7 दिन के अंदर डिलीवरी भेजी जाएगी।
जन्मपत्रिका की पेमेंट paytm, phonepe, google pay के जरिये ऑनलाइन करनी होगी।

जन्मपत्रिका बनवाने के लिए आवश्यक विवरण

  • नाम
  • जन्म दिनांक
  • जन्म समय
  • जन्म स्थान

जन्मपत्रिका -ऑनलाइन पेमेंट

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ज्योतिष शास्त्र और जन्म कुंडली

आइये आज की इस पोस्ट में चर्चा करते है की ज्योतिषशास्त्र का हमारे जीवन में क्या महत्त्व है, और किस प्रकार रत्न और रुद्राक्ष हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक है।

ज्योतिषशास्त्र एक ऐसा शास्त्र है जो व्यक्ति के भूत-भविष्य, प्रकृति, चरित्र को आसानी से जान लेता है। जिस तरह से प्रकाश में सब दिख जाता है, ठीक वैसे ही ज्योतिष भी एक ऐसी विद्या है जिसके नेत्रों से कुछ भी अदृश्य नहीं रह सकता।

ज्योतिषशास्त्र में व्यक्ति के शरीर और उसके जीवन को ग्रह, नक्षत्र और राशियों के अनुसार वर्गीकृत किया है।

व्यक्ति के पूर्वजन्म में किये गए कर्मों का फल उसे वर्तमान जीवन में भोगना होता है, जिसकी सूचना ज्योतिषशास्त्र ग्रह, नक्षत्र और राशियों की स्तिथि के माध्यम से देता है।

ज्योतिषशास्त्र में व्यक्ति के जीवनकाल में घटित होने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं पर विचार जन्मपत्रिका में ग्रहों की स्तिथि, ग्रहों की युति, दृष्टि, ग्रहों के परिवर्तन के आधार पर किया जाता है।
जन्मपत्रिका व्यक्ति के जीवन, चरित्र और व्यक्तित्व का आईना होता है।

जन्मपत्रिका के 12 कोष्ठक 12 भावों से जाने जाते है, और इनमें स्तिथ 12 राशियां और 9 ग्रहों की स्तिथि व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन के रहस्यों को उजागर कर देती है।

हर व्यक्ति को अपने जीवन के बारे में जानने की जिज्ञासा रहती है, सुख दुःख, परेशनियों, सफलताओं के बारे में जानने की इच्छा होती है, और इस सृष्टि में ज्योतिषशास्त्र ही एक ऐसा शास्त्र है जो व्यक्ति के जीवन के बारे में मार्गदर्शन कर सकता है, उसे हर प्रकार से अवगत कर सकता है, उचित मार्गदर्शन से उसकी समस्याओं का निवारण कर सकता है।

हर व्यक्ति के जीवन में ऐसे कई अवसर आते है जब वह बिना विचारे कार्यों को आरंभ कर देते है और बाद में बहुत पछताते है, यही अगर वह ज्योतिष का सहारा लेते हुए चले तो जीवन में बहुत से अप्रिय प्रसंगो से बचा जा सकता है।

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जन्म कुंडली क्या है?

बहुत से व्यक्ति जन्म कुंडली और उसके महत्व के बारे में जानते तक नहीं है। ज्योतिष शास्त्र एक इतना महत्वपूर्ण शास्त्र है, जिसका सहारा लेकर हम अपने जीवन से सम्बंधित बहुत कुछ जान समझ सकते है,
आइये दोस्तों ! इस पोस्ट में हम यही जानेंगे की जन्म कुंडली क्या है? और जन्म कुंडली के खाने (12 डब्बे)होते है, उनका व्यक्ति के जीवन से क्या सम्बन्ध है।

जब कोई प्राणी धरती पर जन्म लेता है, इस संसार में उसका आगमन होता है, उस प्राणी या जातक के जन्म लेने के समय “आकाशमंडल” में ग्रहों की क्या स्थिति थी, ग्रह कहाँ कहाँ स्तिथ थे, इसका आंकलन करके एक खाना बनाया जाता है, इस खाने में जो ग्रहों की स्तिथि बनती है ,उसी को ही “जन्म कुंडली” कहा जाता है ,

अर्थात जन्म कुंडली जातक के जन्म के समय आकाशमंडल में ग्रहों की स्थिति का अर्थात उस समय कौन सा ग्रह किस राशि में भ्रमण कर रहा था इसका नक्शा होता है।

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जन्म कुंडली

जन्म कुंडली किसी व्यक्ति के जीवन के बारे में जानने की ज्योतिष गणना है। जिसे व्यक्ति की जन्म तारीख़, पैदाइश का समय,और जन्म के स्थान के आधार पर बनाया जाता है।

जन्म कुंडली वह शास्त्र है जिसके द्वारा व्यक्ति के जीवन में घटने वाली घटनाओं की जानकारी प्राप्त की जा सकती है, जन्म कुंडली “वैदिक ज्योतिष शास्त्र” पर आधारित है।

जन्म कंडाली बनाते समय व्यक्ति के जन्म के समय सौरमंडल में ग्रहों की स्तिथि का आंकलन किया जाता है और उनकी स्तिथि के अनुसार जन्म कुंडली का निर्धारण किया जाता है।

क्यों जरूरी है जन्म कुंडली

हर व्यक्ति अपने जीवन में सफलता ,धन, सुख और ऐश्वर्ये की चाहत रखता है। लेकिन सही समय और मौका नहीं जान सकने की वजय से जीवन में अच्छे अच्छे मौके खो देते है, और जिन अशुभ घड़ियों में कार्यों को अंजाम नहीं देना है ,उसी समय नए कार्य आरम्भ कर देते है और नतीजा असफलता के रूप में मिलता।
इसलिए जीवन में सफलता प्राप्ति के लिए सही मार्गदर्शन जरुरी है ,और यह मार्गदर्शन “जन्म कुंडली” द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

अगर व्यक्ति ज्योतिषशास्त्र का सहारा ले कर, ग्रहों की दशा को जानते हुए आगे बढ़े, तो जीवन में सफलता का प्रतिशत बढ़ जाता है। व्यक्ति अपने जीवन के महत्वपूर्ण फैंसले जैसे की विवाह, कैरियर, पढ़ाई, नौकरी, और व्यापार आदि के लेते हुए आगे बढ़ सकता है।

जन्म कुंडली के खाने

जन्म कुंडली 12 खानों में विभाजित होती हैं, हर एक खाने को भाव कहा जाता है। यह 12 खाने ,12 राशियों के परिचायक होते हैं।

प्रथम भाव को “लग्न” बोला जाता है।

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कुंडली में 12 खाने

  • प्रथम – जन्म और व्यक्ति का स्वभाव
  • द्वितीय – संपत्ति,दौलत, आंखें, मुंह, बोली, परिजन, कुटुंब
  • तृतीय – पराक्रम, छोटे भ्राता बहिन, दिमाग़ी संतुलन
  • चतुर्थ – माता, सुख, वाहन, प्रॉपर्टी, घर
  • पंचम – संतान, बुद्धि
  • षष्टम – रोग, शत्रु और ऋण
  • सप्तम – विवाह, जीवनसाथी, पार्टनर
  • अष्टम – आयु, खतरा, दुर्घटना
  • नवम – भाग्य, पिता, गुरु, धर्म
  • दशम – कर्म, व्यवसाय, पद, ख्याति
  • एकादश – लाभ, अभिलाषा, पूर्ति
  • द्वादश – खर्चा, नुकसान, मोक्ष

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लग्न

जन्म कुंडली पृथ्वी पर स्थित प्राणियों, अथवा घटनाओं आदि की बनाई जाती है। अंततः “लग्न” को उस जन्म स्थान का सूचक माना गया है।

जातक के जन्म समय आकाश मंडल में जो राशि पूर्वी क्षितिज में उदय हो रही होती है, उसी को जातक का “जन्म-लग्न” माना जाता है।

राशि

जन्म के समय आकाश मंडल में चंद्रमा जिस राशि में भ्रमण कर रहा होता है, उसे जातक की “जन्म-राशि” माना जाता है।

“जन्म-लग्न” तथा “जन्म-राशि” के इस अंतर को भलीभांति समझ

रत्नों और रुद्राक्ष का मानव जीवन पर प्रभाव

रत्नों और रुद्राक्ष का मनुष्य जीवन पर इतना प्रभाव रहता है की वह व्यक्ति के जीवन में कई तरह के बदलाव ला देते है, रत्न ग्रहों के नकारात्मक और बुरे प्रभावों में बदलाव लाने की असीम शक्ति रखते है, और रुद्राक्ष रोगों को खत्म करते है, मनुष्य के जीवन में सकारात्मकता लाते है और व्यक्ति को मोक्ष प्रदान करते है।

कब, कौन सा रत्न और रुद्राक्ष व्यक्ति के लिए लाभकारी रहेगा, इस विषय में एक योग्य ज्योतिषाचार्य ही बता सकता है, रत्न और रुद्राक्ष अपनी असीम ऊर्जाओं से मनुष्य जीवन में खुशियां लाते है, उनका जीवन मंगलमय और उनत्ति भरा बनाते है,

वर्तमान समय में इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति किसी ना किसी परेशानियों से घिरा हुआ है, कई तरह के मानसिक तनावों और रोगों घिरा हुआ है, ऐसे समय में रत्न और रुद्राक्ष बहुत लाभकारी सिद्ध हो रहे है, और लोग किसी विशिष्ठ ज्योतिष से सलाह लेकर इनका उचित समय पर लाभ ले रहे है।

लेकिन अधिकांश लोग अपने भाग्यशाली रत्न का लाभ नहीं ले पाते है, क्योंकि उनको अलग अलग ज्योतिषियों से अलग अलग रत्नों को धारण करना बताया जाता है, जबकि जन्मकुंडली का सटीक विश्लेषण करके रत्न धारण किया जाये तो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिणाम आवश्य देखने को मिलते है।

रुद्राक्ष तो भगवन शिव के आँसू ही है, जो अपने अंदर शिव की असीम शक्ति समेटे हुए है। इसलिए जो भी जातक रुद्राक्ष धारण करेगा उसे हर प्रकार से रक्षा और सुरक्षा प्राप्त होगी ही, वह व्यक्ति कष्टों से कोसो दूर रहेगा, अपने जीवन में निरंतर तरक्की करेगा।

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सूर्य रत्न माणिक्य कौन धारण कर सकते है पन्ना रत्न किसे पहनना चाहिए