भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषी और जाने भाग्य क्या है, हम भाग्य को क्यों कोसते है, क्या भाग्य हमारे कर्मों का नतीजा है

भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषी और भाग्य

प्रणाम दोस्तों, मै लक्ष्मी नारायण आपका बहुत बहुत स्वागत करता हूँ, प्रिये दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे की, भाग्य क्या है, हम भाग्य को क्यों कोसते है, क्या भाग्य हमारे कर्मों का नतीजा है।

Lakshmi Narayan Jyotish

लक्ष्मी नारायण

भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषी, लक्ष्मी नारायण

आपकी सेवाओं के लिए हमेशा उपलब्ध है, अगर आप अपने जीवन को लेकर संघर्षरत है, सफलता नहीं मिल रही है, धन या आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे है, या अन्य कोई परेशानियां है, तो आप लक्ष्मी नारायण से संपर्क कर सकते है,

लक्ष्मी नारायण आपकी समस्याओं का पूरी तरह से निवारण करेंगे और आपको शांत और तरक्की के मार्ग पर बढ़ने को अग्रसर करेंगे।

भाग्य

हमारे भविष्य और भाग्य में क्या होना है, जीवन में क्या क्या उतार चढ़ाव आएंगे और जीवन में क्या क्या सुख दुःख भोगने पड़ेंगे जैसी घटनाएं हमारे जीवन को बहुत प्रभावित करती है।

हमारा जीवन सुख दुःख, हारना जीतना, लाभ हानि जैसी घटनाओं पर ही निर्धारित है। जब कोई व्यक्ति अप्रत्याशित रूप से सुख, लाभ या जीत प्राप्त करता है तो वह अत्यंत ख़ुशी महसूस करता है,
लेकिन इसी के विपरीत जब वह जीवन में दुःख, कष्ट या हानि प्राप्त करता है तो अत्यंत विचलित हो उठता है।

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ज्योतिषशास्त्र में ऐसी ही घटनाओं को व्यक्ति के भाग्य और ग्रहों पर निर्धारित किया गया है, कई बार ऐसा होता है की व्यक्ति अपने जीवन में अप्रत्याशित रूप से सफलता प्राप्त करता है तो कई बार अप्रत्याशित रूप से हानि भी उठाता है,
जब वह सफलता प्राप्त करता है तो इसका श्रेय अपनी हिम्मत, मेहनत और लगन को देता है और जब वह हानियां और दुःख उठाता है तो वह इसका पूरा श्रेय अपनी किस्मत को देता है, अपनी किस्मत को कोसता है, उसका ऐसा मानना होता है की यह सब मेरे भाग्य में ही लिखा था।
तो कहने का तात्पर्य या हुआ की जब सब चंगा तो अपनी बढ़ाई और जब कष्ट आये तो उसका जिम्मेदार उसका भाग्य,
और वह व्यक्ति अपने भाग्य को अधिक से अधिक कोसने लगता है।
भाग्य को लेकर ऐसी स्तिथियां ज्यादातर देखने को मिलती है, जो की बिलकुल भी उचित नहीं है, ऐसा करने से वह अपने द्वारा की गई गलतियों को समझ नहीं पाता है, अपने उचित समय में लाभ नहीं लेता है, अशुभ समय में कार्यो को अंजाम देता है, उचित उपायों का सहारा नहीं लेता है और गलतियों को दोहराता रहता है, नुकसान उठाता रहता है और अपने भाग्य को कोसता रहता है।

जब कोई व्यक्ति थोड़े समय में ही तरक्की कर लेता है तो इसका पूरा श्रेय वह अपनी मेहनत और क़ाबलियत को देता है और जब वह हानि उठाता है तो उसका कहना रहता है की उसका समय अच्छा नहीं चल रहा है, उसके भाग्य में हानि ही लिखी है।

इसलिए यह बात विचारणीय है की अच्छे और तरक्की भरे समय में क्यों उसके भाग्य का योगदान नहीं है और क्यों केवल बुरे समय में ही उसका भाग्य जिम्मेदार है।
हम हमारे जीवन में भाग्य को लेकर सही आंकलन नहीं कर पाते और अक्सर भाग्य को लेकर गलत धारणाएं रखते है और अपने बुरे परिणामों के जिम्मेदार हम स्वयं होते है।

आज के इस युग में परेशानियों का अम्बार है, आर्थिक, धन, व्यावसायिक, संतान, वैवाहिक, दांपत्य जीवन, पारिवारिक जीवन, शारीरिक रोग जैसी समस्याओं से भरा पड़ा है।
इन समस्याओं का व्यक्ति सही ढंग से आंकलन नहीं करता और इसका सारा श्रेय अपने भाग्य को देता है।

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भाग्य क्या है,

शास्त्रों में भाग्य को दो प्रकार से बताया गया है, प्रथम तो यह है की हमारे भाग्य के रचेता भगवान ब्रह्मा है, उन्होंने ही प्रत्येक व्यक्ति का भाग्य निर्धारित किया है, प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सुख दुःख उन्होंने ही निर्धारित किये है, जिनको व्यक्ति को भोगना पड़ेगा, और इसे बदलना संभव नहीं है,

और दूसरा तर्क यह है की हमारा भाग्य हमारे पूर्व जन्मों का नतीजा है, पूर्व जन्म में किये अच्छे बुरे कर्मो का नतीजा है, अगर हमने अच्छे कर्म किये है तो हम अच्छा फल भोगते है और अगर हमारे पूर्व जन्म के कर्म बुरे है तो हम इस जीवन में बुरे फल भोगते है।
इन बुरे फलों को वह अपने इस जीवन में भोगता है और अगर कुछ बुरे फल रह जाये तो उन्हें वह अपने अगले जीवन में भोगता है।

यही वजय मानी जाती है की व्यक्ति अपने जीवन में सज्जन होता है, अच्छे कर्म भी करता है फिर भी वह अपने जीवन में कष्ट झेलता चला जाता है, परेशानियां झेलते झेलते वह सोचने लगता है की ईश्वर पता नहीं किन जन्मों का फल दे रहा है।

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लेकिन यह सत्य है की यह उसके पूर्व जन्मों के किये गए कर्मों के ही नतीजे होते है।

यह एकदम स्पष्ट है की जब इस धरती पर कोई व्यक्ति जन्म लेता है, तो उसके पूर्व जन्मों के कर्मों के अनुसार ही वह उन ग्रहों, राशियों और नक्षत्रों में जन्म लेता है जिसके अनुसार उसका समस्त जीवन निर्धारित रहता है और वह अपने जीवन के सुख दुःख भोगता है।

कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में लिखे सुख दुःख को पूरी तरह से ख़त्म नहीं कर सकता, लेकिन हमारे पूर्वजों के द्वारा रचित ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहों और नक्षत्रों के बुरे प्रभावों के बारे में जरूर जाना जा सकता है, जिन पूर्व जन्म के बुरे कर्मों की वजय से हमें इन ग्रहों, नक्षत्रों के बुरे प्रभाव झेलने पड़ेंगे,
इन कष्टकारी ग्रहों और नक्षत्रों को बदला तो नहीं जा सकता , लेकिन इतना जरूर है की इन्हें ज्योतिष उपायों द्वारा शांत करते हुए परेशानियों को कम जरूर किया जा सकता है और एक सुखी जीवन व्यतीत किया जा सकता है।

धन्यवाद !

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