मेष लग्न की कुंडली में योगकारक ग्रह|मेष लग्न

मेष लग्न की कुंडली में योगकारक ग्रह|मेष लग्न 

Image by Dorothe from Pixabay
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मेष लग्न की कुंडली में योगकारक ग्रह  मंगल, सूर्य, चंद्र और बृहस्पति होते है, शनि भी इनकी जन्म पत्रिका में शुभ भावों के कारक है।
इन ग्रहों के बारे में आगे विस्तार से जानेंगे।

मेष लग्न के जातक साहसी होते है, हर कार्य को चुनौती के रूप में लेते है और उसे पूरा करते है, उनके अपने विचार होते है, किसी की अधीनता स्वीकार नहीं करते, अपने जीवन में अपनी मेहनत और लगन से सफलता प्राप्त करते है। इनके जीवन में जल्दबाजी और गुस्सा इनको हमेशा नुकसान पहुँचता है।

मेष लग्न

मेष लग्न का स्वामी मंगल है, मेष अग्नितत्व लग्न है, रंग लाल है। मेष लग्न के स्वामी मंगल को ग्रहों के सेनापति का दर्जा दिया गया है, मंगल एक क्रूर, साहसी, बलशाली, गुस्सैल, निडर, स्पष्टवादी, महत्वकांशी, नेतृत्व करने वाला, जल्दबाज ग्रह है और यही सब गुण मेष लग्न के जातकों में देखने को मिलते है।

मेष लग्न के जातकों का स्वाभाव और परिचय


मेष लग्न के जातकों का शारीरिक विचार किया जाये, तो मेष जातक साधारण कद काठी यानि की ना बहुत लम्बे और ना ही छोटे होते है, इनके चेहरे का रंग मध्यम गोरा लेकिन कुछ लालिमा लिए हुए होता है, ऐसा इसलिए क्योंकि इनपर इनके स्वामी मंगल का प्रभाव होता है, और मंगल लाल ग्रह है।
इनकी आंखे बहुत चपल या कह ले चुलबुली होती है, इधर उधर दौड़ती , मेष जातक बुद्धि के तेज होते है, इनके बाल भूरे काले से होते है, चेहरा लम्बा और चमचमाते हुए दांत होते है।
इनका शरीर गठा हुआ, ना बहुत अधिक मोटे और ना पतले, शारीरिक रूप से बलशाली होता है।

मेष लग्न के जातक अपने सामने वाले व्यक्ति को देखकर उसकी स्तिथि को भाप लेने में माहिर होते है, मेष लग्न को चर लग्न की संज्ञा दी गई  है, जिसका मतलब होता है की चलते रहने वाला, बस यही स्वभाव मेष लग्न के जातकों में भी रहता है, वे कभी भी खाली नहीं बैठ सकते, वे किसी न किसी काम में लगे ही रहते है और ना ही इन्हे ऐसे आलसी व्यक्ति पसंद आते है जो काम में ढीले ढाले होते है, दिल में किसी के प्रति बुरी भावना नहीं रखते, अपने में मस्त रहते है, जिसे जो बोलना है मूँह पर साफ बोल देते है।
हर काम में आगे रहना, अनुशासनप्रिय और नेतृत्व वाला इनका स्वाभाव रहता है, ऐसा इसलिए होता है क्योकि इनके स्वामी मंगल को एक सेनापति ग्रह माना जाता है और बिलकुल यही स्वाभाव मेष लग्न के जातकों में देखने को मिलता है।  

 

 मेष जातक स्वतंत्र विचारों के होते है, उनकी खासियत होती है की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी वह डगमगाते नहीं है, और बड़ी दिलेरी से  संकटो का सामना करते हुए उसे पार करते है।
धर्म कर्म के मामलों में उनका स्वाभाव लचीला होता है, वह ईश्वर को मानाने वाले होते है और धार्मिक कार्यो शामिल होना पड़े तो अपनी निष्ठा के साथ शामिल होते है।

मेष लग्न के जातक अपनी मेहनत और लग्न से अपने जीवन में धीरे धीरे तरक्की करते हुए आगे बढ़ते जाते है, और उच्च पदों की प्राप्ति करते है। 

 

अगर इनके कुछ अवगुण देखे जाए तो , मेष जातकों का ऐसा नेचर रहता है की यह लोग एक ही वक्त में कई कार्यो को एकसाथ करने पर उतारू हो उठते है, होता यह है की ये लोग उलझ जाते है और किसी भी कार्य को पूरा नहीं कर पाते और कार्य को बीच में ही छोड़ देते है।
इनके इसी अवगुण के कारण मेष लग्न के जातक कोई भी कार्य को पूर्ण करने में असमर्थ हो जाते है।

मेष लग्न अग्नितत्व लग्न है, इसलिए मेष जातकों में अग्नि जैसा गर्म स्वाभाव देखने को मिलता है, उनका जीवन के प्रति उतावलापन, गर्म और जिद्दी मिजाज, जल्दबाजी और खाने को लेकर भी तेज और मसालेदार भोजन पसंद करना,
अपने इसी खाने के शौक की वजय से मेष जातकों को पित्त संबंधी समस्याओं और पेट की समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है।

इन्हें क्रोध भी बड़ी जल्दी आता है, बहुत जल्दी विचलित हो उठते है, जिसका नतीजा इनको लोगो द्वारा नापसंदी से मिलता है, हालांकि इनका गुस्सा ऐसा  होता है की एकदम आएगा और एकदम शांत भी हो जायेगा, लेकिन इतने में ही यह लोग अपना नुकसान करवा बैठते है,
इसलिए मेष लग्न के जातकों को अपने दिमाग में यह बात बैठा कर रखनी चाहिए की इन्हें अपने आप को शांत रखना होगा।

दूसरा इनके लिए एक बहुत नुकसानकारी यह भी होता है की इसी गुस्से की वजय से यह लोग बगैर सोचे समझे,  बगैर योजना बनाये किसी पर भी हमला कर देते है, सामने  वाले को आंकते तक नहीं है, या ऐसा भी कह सकते है की आवेश में अपनी बुद्धि तक का इतेमाल नहीं करते और अपना नुकसान कर बैठते है।
मेष लग्न के जातकों के लिए एक खास सलाह यह हो सकती है की इन्हें अपने व्यहवार को विनम्र रखना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा अपने स्वाभाव को मधुर रखना चाहिए, जो इनके  जीवन में तरक्की का एक बहुत बड़ा मार्ग बन सकता है।

मेष लग्न के जातकों के लिए अपने सम्पूर्ण जीवन में धैर्य का बहुत बड़ा महत्त्व है, अगर यह अपने जीवन के हर काम में धैर्य अपनाएंगे तो इनके जीवन में सफलता के बहुत से मार्ग है,
बहुत महत्वकांशी होते है, खाली बैठना पसंद नहीं करते, लगातार मेहनत करने में पीछे नहीं हटते, यही इनके  जीवन की सफलता का राज है, किसी के अधीन काम करना इन्हें बिलकुल पसंद नहीं होता। 


मेष लग्न के जातको का कैरियर


मेष लग्न के जातक प्रैक्टिकल अधिक होते है, यानि की वे ऐसे कार्यो को पसंद करते है, या चुनते है जिनमें बैठने के बजाये शारीरिक श्रम अधिक हो, और अधिकतर देखा गया है की यह लोग ऐसे ही कार्यों में अधिक सफल होते देखे गए है।

मेष लग्न के जातक खेल-कूद, डेंटिस्ट, दवाई विक्रेता, सेना में, पुलिस विभागों में, बिजली विभागों या इलेक्ट्रॉनिक व्यवसायों में, मिठाई विक्रेता आदि में देखा जा सकता  है,  
यदि मेष लग्न के जातकों की जन्म कुंडली में बलिष्ठ मंगल और शुभ ब्रहस्पति हो तो इन्हें सफल वैध, होमियोपैथी डॉक्टर, डॉक्टर, सर्जन भी देखा जा सकता है।

इसके आलावा मेष जातकों को फिल्म लाइन, कम्प्यूटर सम्बंधित कारोबार, जमीन खरीद बिक्री व्यवसाय, सरकारी ठेकेदारी जैसे व्यवसायों में भी सफल देखे जा सकते है।

अगर मेष लग्न के जातकों की जन्म कुंडली में सूर्य, चंद्र, गुरु, एवं शनि शुभ या उच्च के हो तो यह लोग राजनीति, प्रशासनिक कार्यों में भी बहुत सफल देखे जा सकते है। 

मेष लग्न के जातकों की आर्थिक स्तिथि

मेष जातक अपनी ऊर्जा, शक्ति और परिश्रम से अपने जीवन में अच्छा धन कमाने की क्षमता रखते है,
यदु उनकी जन्म पत्रिका में शनि, ब्रहस्पति, सूर्य, मंगल एवं चंद्र की शुभ अवस्था हो तो यह लोग जीवन में अच्छी उनत्ति और तरक्की करते है, अच्छा धन कमाते है।

मेष लग्न के जातकों को नौकरी के अपेक्षा निजी व्यवसायों में अधिक तरक्की और धन कमाते हुए देखा गया है।
एक बात तो तय है की मेष लग्न के जातकों को अपने  जीवन में बहुत से उतार चढ़ाव देखने पड़ते है, संघर्ष करने पड़ते है, यह लोग अपने जीवन में धीरे धीरे तरक्की  है और 50 के बाद सफलता प्राप्त कर लेते है। 


मेष लग्न में शुभ ग्रहों की अवस्था

1. मेष लग्न की जन्म पत्रिका में सूर्य पंचम भाव का स्वामी होता है, अगर मेष लग्न की कुंडली में सूर्य प्रथम, तृतीये, चतुर्थ, पंचम, नवम भाव में हो तो जातक भाग्यवान, अच्छी विद्या, संतान सुख, बुद्धि, कारोबार, उच्च पद की प्राप्ति करता है, सामाजिक सम्मान और सरकारी लाभ प्राप्त करता है।

2. मेष लग्न की जन्म पत्रिका में चंद्र चतुर्थ भाव का स्वामी है, जो की माता का सुख, मानसिक मजबूती, मनोबल, धन, घर, जमीन, संपत्ति, वाहन सुख और सुख का कारक है, अगर चंद्र मेष लग्न की कुंडली में प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, नवम भाव में स्तिथ हो तो व्यक्ति अपने जीवन में इन सभी लाभों की प्राप्ति करता है।

3. मंगल मेष लग्न की कुंडली का लग्नेश यानि की स्वामी है, मंगल मेष लग्न की जन्म पत्रिका में शारीरिक स्वास्थय, शारीरिक सुंदरता, आयु, जीवन में प्राप्त होने वाली उनत्ति आउट तरक्की, धन, सांसारिक सुखो, दुश्मनों पर विजय प्राप्ति, मानसिक मजबूती, निडरता का स्वामी है,
अगर मेष लग्न की कुंडली में मंगल प्रथम, द्वितीय, पंचम, नवम और दशम भाव में स्तिथ है तो जातक को इन सभी सुखों की प्राप्ति होगी।

4. मेष लग्न की कुंडली में भाग्य का स्वामी ब्रहस्पति अगर प्रथम, चतुर्थ, पंचम, नवम और दशम भाव में स्तिथ हो तो जातक जीवन में अच्छे घर मकान,  धन,संपत्ति, उच्च शिक्षा, पिता का सुख और पैतृक संपत्ति, राजनीती में सफलता, सरकारी पद, आर्थिक उनत्ति की प्राप्ति करता है।

5. मेष लग्न की जन्म पत्रिका में शनि कर्म, कारोबार, नौकरी, लाभ आर्थिक उनत्ति और तरक्की का स्वामी है,
अगर शनि मेष लग्न की कुंडली में द्वितिये, नवम, दशम और एकादश भाव में विराजमान हो तो जातक इन सब सुखों की खूब प्राप्ति करता है।

 6. अगर मेष लग्न की जन्म कुंडली में शुक्र द्वितीय या सप्तम भाव में हो तो यह लाभकारी होता है, ऐसी अवस्था में शुक्र जातक को जीवन में बहुत अच्छा धन, रहन सहन, सांसारिक सुख, सुन्दर जीवनसंगिनी, वैवाहि सुखों की प्राप्ति करवाता है,
अगर शुक्र की ऐसी स्तिथि हो तो जातक शुक्र की महादशा में विशेष उनत्ति, तरक्की और धन लाभ की प्राप्ति करता है।

 मेष लग्न के जातकों के भाग्यशाली रत्न


1. माणिक्य : मेष लग्न के जातकों को माणिक्य धारण करना बहुत लाभकारी हो सकता है, माणिक्य धारण करने से मेष लग्न के जातकों को संतान सुख की प्राप्ति होती है, शिक्षा और विद्या में विशेष लाभ प्राप्त होता है।
घर में मांगलिक कार्यकर्म होते है, सामाजिक मान, सम्मान, प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है और अच्छे और निरोगी स्वास्थय का लाभ प्राप्त होता है।

2. मोती : चंद्र का रत्न मोती भी मेष लग्न के जातकों के लिए लाभकारी होता है, मोती धारण करने से घर निर्माण, अचल संपत्ति, जमीन खरीद, माता से सुख, अच्छे वाहन की प्राप्ति और आर्थिक उनत्ति होती है।

3. लाल मूंगा : तो मेष लग्न के जातकों के लिए वरदान स्वरुप है, लाल मूंगा मेष लग्न के जातकों का स्वामी रत्न है,
लाल मूंगा धारण करने से मेष जातकों को जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है, शारीरिक स्वस्थता प्राप्त होती है, दुश्मन कभी नुकसान नहीं पंहुचा सकते है, मनोबल बढ़ता है, मानसिक शक्ति की प्राप्ति होती है, कारोबारी  लाभ प्राप्त होता है, नौकरी में उच्च पद की प्राप्ति होती है, धन और सामाजिक प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।

4. पीला पुखराज : ब्रहस्पति का रत्न पीला पुखराज भी मेष लग्न के जातकों के लिए वरदान स्वरुप है, पीला पुखराज धारण करने से मेष जातक जीवन में बहुत अच्छी तरक्की प्राप्त करते है, ज्ञान की प्राप्ति होती है, उच्च शिक्षा प्राप्त होती है, भाग्य बहुत प्रबल हो जाता है, धार्मिक यात्राएं संपन्न होती है और जीवन में खूब धन लाभ होता है।

5. नीलम : मेष लग्न की कुंडली में शनि व्यापार-व्यवसाय, नौकरी, उच्च पदों, सरकारी संस्थानों से लाभ, राजनीती में लाभ, कारोबार में लाभ, धन की आवक का स्वामी है, इसलिए मेष लग्न के जातक पहले अपनी जन्म पत्रिका का विश्लेषण करवाकर शनि की महादशा में या हमेशा शनि का रत्न नीलम धारण कर सकते है,
नीलम धारण करने से मेष लग्न के जातकों को उपरोक्त सभी लाभ प्राप्त होंगे।

6. हीरा : मेष लग्न की कुंडली में अगर शुक्र दिव्तीये भाव में विराजमान है, केवल तभी शुक्र का रत्न हीरा या सफ़ेद जिरकॉन शुक्र की महादशा में धारण किया जा सकता है, वैसे शुक्र मेष लग्न की कुंडली में मारक होता है,
इसलिए शुक्र की महादशा चलने पर शुक्र का रत्न धारण करके परिक्षण किया जा सकता है।

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