लहसुनिया कब धारण करना चाहिए?

लहसुनिया कब धारण करना चाहिए?

 

लहसुनिया कब धारण करना चाहिए?
लहसुनिया कब धारण करना चाहिए?


लहसुनिया

कई बार हमारे मन में विचार उठता है की लहसुनिया धारण किया जाये, आइये जानते है की लहसुनिया कब धारण करना चाहिए?
 

केतु का रत्न लहसुनिया बहुत जल्दी अपने प्रभाव दिखाने वाला रत्न है, जिन जातकों की जन्म कुंडली में केतु अशुभ है और जातक अपने जीवन में बार बार परेशानियों का सामना कर रहा है, कारोबार पूरी तरह से बंद है या बहुत मेहनत करने पाए भी चलता नहीं है, जिसकी वजय से व्यक्ति की मानसिक स्तिथि भी ख़राब रहने लग जाती है, शारीरिक बीमारियों से व्यक्ति परेशान रहता है, घर में बार बार अचानक कोई न कोई दुर्घटनाओं का शिकार होता रहता है,

ऐसी परिस्थिति में केतु का रत्न लहसुनिया धारण करने से लाभ होता है, केतु एक छाया ग्रह है, जिसकी बुरी दशा व्यक्ति के जीवन का सर्वनाश कर देती है, अगर केतु अपनी महादशा में अति बुरी अवस्था में है, तो जातक की भीख तक मांगने की नौबत आ सकती है,

जन्म कुंडली में केतु की स्तिथि और उसके बुरे प्रभावो को देखते हुए लहसुनिया धारण करने की सलाह दी जाती है, ऐसी स्तिथि में लहसुनिया धारण करने से आर्थिक और कारोबारी लाभ होता है, व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत होता है, उसका झुकाव अध्यात्म की तरफ बढ़ता है,
जुए-सट्टे, शेयर मार्केट और ट्रेडिंग जैसे व्यवसायों में बहुत लाभ मिलता है, व्यक्ति अचानक अपने जीवन में तरक्की करने लगता है और जीवन में सुख साधनों की बढ़ोतरी होने लगती है,

लहसुनिया धारण करने से जेल जाने का डर, अचानक दुर्घटनाएं और गुप्त शत्रुओं के वार से सुरक्षा मिलती है,

जब कुंडली में केतु 1, 2, 4, 5, 7, 9, 10 वें भाव में हो तो लहसुनिया धारण करना चाहिए।

लहसुनिया कब धारण करना चाहिए?


लहसुनिया शनिवार के दिन धारण करना चाहिए, लहसुनिया हमेशा 7, 9 या 11 कैरट का ही धारण करें, लहसुनिया को हमेशा चांदी की अंगूठी में अपनी मध्यमा ऊँगली में ही धारण करें,
धारण करने से पहले शुभ मुहूर्त देख ले और विधि विधान से पूजा अर्चना करें, केतु के मंत्रो का कम से कम 108 बार जाप करें और धारण करें।

केतु मंत्र


ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः


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