गोमेद रत्न पहनने के फायदे और नुकसान

गोमेद रत्न पहनने के फायदे और नुकसान

 

गोमेद रत्न पहनने के फायदे और नुकसान
गोमेद रत्न पहनने के फायदे और नुकसान

जब भी आप गोमेद रत्न धारण करने की सोच रहे है तो धारण करने से पहले गोमेद रत्न पहनने के फायदे और नुकसान जान ले। 


राहु रत्न गोमेद


राहु का रत्न गोमेद देखने में भूरे रंग का होता है, यह गहरा भूरा और इतना गहरा भूरा की हथेली में रख कर देखा जाये तो काला दिखता है और जब उसे सूरज की रौशनी में देखा जाये तो भूरा दीखता है,
गोमेद छाया ग्रह राहु का रत्न है, इसमें राहु की ऊर्जा को संचालित करने की क्षमता होती है, इसलिए जब कोई व्यक्ति गोमेद धारण करता है तो उसे राहु की ऊर्जा प्राप्त होनी शुरू हो जाती है,

राहु रत्न गोमेद बहुत प्रभावकारी रत्न है, कुंडली में राहु की स्तिथि के अनुसार गोमेद धारण करना चाहिए, अगर कुंडली में राहु शुभ और बलहीन है तो गोमेद धारण करने से लाभ होता है और अगर राहु पीड़ित होकर अशांत है तब भी गोमेद धारण किया जाता है, लेकिन इसके लिए कुंडली का परिक्षण करना आवश्यक होता है,

अगर किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में राहु से काल सर्प दोष का निर्माण हो रहा हो तो ऐसी परिस्थितियों में भी गोमेद धारण करना लाभकारी हो सकता है,

नवरत्नों में गोमेद एक ऐसा रत्न है जो काफी जल्दी अपने प्रभाव दिखाता है, अगर लाभकारी रहेगा तो व्यक्ति को बहुत जल्दी उनत्ति, तरक्की और धन लाभ देता है और अगर कुंडली में राहु अशुभ है तो भी यह बहुत जल्दी अपने प्रभाव दिखाता हुए व्यक्ति को परेशानियों में डाल देता है,
राहु एक क्रूर ग्रह है, इसके तुरंत प्रभाव देखने को मिलते है, इसीलिए यह जरुरी हो जाता है की गोमेद रत्न धारण करने से पहले किसी ज्योतिष से विचार विमर्श कर लिया जाये। 

गोमेद रत्न कब धारण किया जा सकता है


1. जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में राहु मिथुन राशि में बैठा हो तो वह उच्च का होता है, इसलिए जब कुंडली में राहु उच्च का हो तो गोमेद धारण करना चाहिए, प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम, षष्ठ, नवम, दशम, एकादश भाव में उच्च का होकर बैठा है तो राहु अपने काफी सकारात्मक और लाभकारी प्रभाव देता है,
ऐसी अवस्था में गोमेद धारण कर लाभ उठाया जा सकता है।

2. अगर कुंडली में राहु प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम, षष्ठ, नवम, दशम, एकादश भाव में है, तो भी गोमेद धारण किया जा सकता है, लें इन किसी भी भावों में राहु धनु राशि का नीच का नहीं होना चाहिए।

3. अगर जन्म कुंडली में राहु उच्च का होकर बैठा है तो गोमेद धारण किया जा सकता है और अगर कुंडली के किसी भाव में राहु नीच का होकर बैठा है तो बगैर किसी ज्योतिष के परामर्श के गोमेद धारण करने से बचना चाहिए।

4. वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ लग्न के जातकों के लिए राहु लाभकारी होता है, इसलिए इन लग्नों के जातक गोमेद राहु की दशा के अनुसार धारण कर सकते है।

5. वृष, मिथुन, कन्या, तुला और कुंभ राशि के जातकों के लिए गोमेद धारण करना लाभकारी हो सकता है, बशर्ते यह देखना जरुरी है की उनकी कुंडली में राहु किस भाव में किस कंडीशन में बैठा है।

6. राहु राजनीती में सफलता दिलाता है, उच्च पद दिलाता है, ऐसे व्यक्ति जो राजनीती से जुड़े हुए है और सफल भी है, तो ऐसा मानिये की राहु उनकी कुंडली में जरूर शुभ होगा, इसलिए राजनीती में जुड़े व्यक्तियों को गोमेद धारण करना चाहिए।

7. जो व्यक्ति तेल, पेट्रोल, कोयला, मशीनरी, फैक्ट्री, टायर व्यापार, लोहा व्यापार, ट्रक ट्रांसपोर्ट, कबाड़ी, लॉटरी व्यवसाय, शेयर मार्किट, ट्रेडिंग कार्य आदि जैसे व्यवसायों से जुड़े हुए है उन व्यक्तियों को गोमेद धारण करने से लाभ होता है।

8. जो व्यक्ति शराब डिस्टिलिरी या शराब कार्यो से जुड़े है, उन्हें गोमेद बहुत लाभ और उनत्ति देता है।

9. जिन युवकों को सरकारी नौकरी प्राप्त करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, उन युवकों के लिए गोमेद धारण करना लाभकारी हो सकता है।  

10. ऐसे व्यक्ति जो सरकारी क्षेत्रों में तरक्की और परमोशन प्राप्त करना चाहते है, उन व्यक्तियों के लिए भी गोमेद बहुत लाभकारी सिद्ध हो सकता है।

11. जो व्यक्ति शासन प्रशासन, सरकारी ठेकों से जुड़े हुए है, उन व्यक्तियों के लिए भी गोमेद धारण करना लाभकारी रहता है।

12. ऐसे व्यक्ति जो एक्सपोर्ट इम्पोर्ट का व्यवसाय करते है, और उनके पास दूसरे देशों का धन आता है, ऐसी व्यक्तियों के लिए भी गोमेद धारण करना बहुत लाभकारी होता है।

13. ऐसे व्यक्ति जो विदेश में सेटल होना चाहते है, या विदेशों से अपना काम करना चाहते है ऐसे व्यक्तियों के लिए भी गोमेद धारण करना बहुत लाभकारी होता है। 

गोमेद धारण में सावधानियां


जब भी आप गोमेद धारण करना चाहे, तो सबसे पहले आप अपनी जन्म पत्रिका में राहु की स्तिथि जाँच ले और किसी परामर्श के द्वारा गोमेद धारण करने का निर्णय ले।

राहु का रत्न गोमेद एक ऐसा रत्न है जो आपकी जन्म पत्रिका में अपनी स्तिथि के अनुसार लाभ और नुकसान देता है, अगर लाभ देगा तो बहुत जल्दी आपको बुलंदियों तक ले जायेगा और अगर नुकसान देगा तो बहुत जल्दी सर्वनाश भी करेगा, इसलिए  की आप जब भी गोमेद धारण करें किसी योग्य ज्योतिष से परामर्श अवशय लें। 

गोमेद रत्न धारण करने के नियम


गोमेद को हमेशा चांदी की अंगूठी में बनवाकर शनिवार की शाम शुभ मुहूर्त में राहु मंत्रों का जाप करते हुए मध्यमा उंगली में धारण करना चाहिए।

राहु मन्त्र


ऊँ रां राहवे नम:

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