मूंगा किस धातु में पहने

मूंगा किस धातु में पहने

मूंगा किस धातु में पहने
मूंगा किस धातु में पहने


मंगल का रत्न लाल मूंगा किस धातु में पहने, यह जानकारी आज हम इस पोस्ट के माध्यम से प्राप करेंगे। 


 लाल मूंगा

मंगल का रत्न लाल मूंगा बहुत जल्दी अपने प्रभाव दिखाने वाला रत्न है, लाल मूंगा धारण करने से व्यक्ति में जोश से भर जाता है, पराक्रमी हो जाता है, किसी से डरता नहीं है, उसमे उग्रता आ जाती है,
क्योंकि मंगल के यही गुण है, मंगल एक योद्धा है, ग्रहों का सेनापति है, दुश्मनों का नाश करता है, मंगल में अग्नि भरी हुई है, यही कारण है की जितने भी पराक्रम के क्षेत्र है उनमें आपको मंगल प्रधान व्यक्ति मिलेंगे, उनकी जन्म कुंडली में कही न कही मंगल की महत्वपूर्ण भूमिका मिलेगी,

अगर इसी मंगल के प्रभाव राहु के साथ आ जाये तो व्यक्ति की अग्नि और भी भड़क जाती है, व्यक्ति लड़ाई-झगड़े, मार-पीट वाला हो सकता है, यहाँ तक की वह किसी हथियार से हमला करने वाला भी हो सकता है,

इसका निरिक्षण तो कुंडली के जहां अध्धयन के बाद ही किया जा सकता है,

लेकिन ऐसा नहीं है की मंगल केवल उग्र स्वाभाव ही देता है, मंगल व्यक्ति को जीवन में सम्मान, उनत्ति और तरक्की भी प्रदान करता है, मंगल धन प्रदान करता है, आर्थिक उनत्ति प्रदान करता है और जिस जातक की कुंडली में मंगल शुभ होकर बैठा है मंगल उन जातकों को जीवन के सभी सुख और लंबी और स्वस्थ आयु भी प्रदान करता है।

बड़े बड़े पदों पर डॉक्टर, सर्जन, इंजीनियर, सेना अधिकारी, पुलिस अधिकारी, उच्च पदों पर शिक्षण संस्थानों में, जज, वकील, बड़े होटल और रेस्टॉरंट मालिक आपको मंगल प्रधान व्यक्ति ही मिलेंगे।

जिन व्यक्तियों को रक्तः, हृदय की बीमारी है, मनोबल और आत्मबल की कमी है उन व्यक्तियों के लिए लाल मूंगा बहुत लाभकारी होता है।

मूंगा किस धातु में पहने


मंगल एक अग्नि ग्रह है, इसलिए इसके रत्न को भी कोई ऐसी धातु ही संभाल सकती है जो अग्नि को झेल सके, इसलिए सूर्य की धातु तांबा मंगल रत्न लाल मूंगा के लिए सबसे श्रेष्ठ होती है,
इसके अलावा सोने या अष्टधातु की धातु में भी लाल मूंगा धारण किया जा सकता है।

मंगल रत्न लाल मूंगा को मंगलवार के दिन धारण किया जाता है, लाल मूंगा को विधि अनुसार पूजा करके मंगल देव की पूजा करनी चाहिए और १०८ बार मंगल मन्त्र (ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः) का जाप करना चाहिए।

मंगल एक उग्र और आक्रामक ग्रह है, इसलिए कभी भी अपनी मर्जी से इस रत्न को धारण नहीं करना चाहिए, इस रत्न को परामर्श के बाद ही धारण करना चाहिए।

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