मोती रत्न के नुकसान

मोती रत्न के नुकसान

 

मोती रत्न के नुकसान
मोती रत्न के नुकसान

ज्यादातर मोती रत्न को लेकर लोगों की धारणा है की इसे कोई भी धारण कर सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है आइये जानते है मोती रत्न के नुकसान
 

चंद्र और उसके अशुभ योग

जब किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्र दूषित, नीच, या पाप प्रभावित हो जाता है, तब ऐसे व्यक्तियों पर सबसे ज्यादा उनके मन और मस्तिष्क पर इसका प्रभाव पड़ता है, व्यक्ति कोई भी कार्य टिककर नहीं करता, उसका मन किसी भी कार्य में एकाग्र नहीं हो पाता,
उसका स्वास्थय बहुत जल्दी प्रभावित होता है, उसकी इम्युनिटी बहुत कमजोर रहती है,

किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्र राहु,केतु,शनि या सूर्य से शीर्ण हो जाता है या कुंडली में चंद्र निर्बल, नीच हो जाता है तब ऐसी अवस्था में चंद्र का रत्न मोती जरूर धारण करना चाहिए,

चंद्र मन का स्वामी है, इसलिए जब भी किसी जातक की कुंडली में चंद्र कमजोर हो जाता है, ऐसे व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर होते है, डरने वाले होते है, उनका कॉफिडेंस लेवल बहुत कमजोर होता है, किसी का सामना करने से घबराते है, है काम में पीछे रहते है या बार बार काम को बदलते रहते है, उनका मन विचलित रहता है,

चंद्र कमजोर होने से स्टूडेंट है का मन पढ़ाई में नहीं लगेगा, व्यक्ति के कारोबार में बरकत नहीं होगी, हर सरकारी कार्यो में या नौकरी में परेशानियां आएंगी, माता की तबियत ख़राब रहेगी, जमीन जायदाद में झनझटें रहेगी, भाग्य कमजोर हो जायेगा, बार बार वाहन की परेशानियां आएंगी, प्रेम विवाह में अड़चने आएंगी और वैवाहिक जीवन में भी परेशानियां होने लगेंगी,

वृष, मिथुन, सिंह, कन्या, मकर और कुम्भ लग्न के जातकों को चंद्र का रत्न मोती धारण नहीं करना चाहिए, इन लग्नों में चंद्र के प्रभाव शुभ नहीं होते है, इसलिए इन जातकों को मोती नहीं धारण करना चाहिए,

जिनकी राशि वृष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर और कुम्भ है उन जातकों को मोती धारण नहीं करना चाहिए,

 जन्म कुंडली में जब कर्क राशि छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो तब मोती सोच समझकर धारण करना चाहिए,

मोती के साथ कभी भी हीरा, पन्ना, गोमेद, लहसुनियां या नीलम नहीं धारण करना चाहिए,

अगर आप अत्यधिक उत्साहित व्यक्ति है तो भी आपको मोती धारण नहीं करना चाहिए,

किसी भी व्यक्ति की कुंडली में चंद्र एक महत्वपूर्ण भूंमिका निभाता है, जिनकी भी कुंडली में जिस कारण से भी चंद्र कमजोर है, उन्हें उसका निवारण करना चाहिए,
फिर चाहे वह चंद्र मन्त्र द्वारा हो, चंद्र यंत्र द्वारा हो या चंद्र का रत्न मोती धारण के द्वारा हो, चंद्र का उपाय जरूर करना चाहिए,

किन स्तिथियों में मोती धारण करना चाहिए


जब कुंडली में चंद्र उच्च का हो तो मोती धारण करें
जब कुंडली में चंद्र शुभ होकर नीच का हो गया हो तो मोती धारण करें
जब कुंडली में कर्क राशि  १, ४, ५, ९, १० भाव में हो तो मोती धारण करें
जब कुंडली में कर्क राशि शुभ भाव में हो और चंद्र ६, ८, १२ में हो तो मोती पहनें
चंद्र की युति सूर्य के साथ हो तो मोती पहनें
चंद्र की युति शनि, राहु, केतु के साथ हो तो मोती पहनें
चंद्र पर शनि, राहु, केतु की दृष्टि हो तो मोती पहनें
शुभ चंद्र की महादशा हो तो मोती पहनें 

मोती कैसा होना चाहिए


जब भी मोती धारण करें, वो गोल, चिकना, सफ़ेद, चमकदार होना चाहिए, फीका और  चमकरहित मोती कभी भी धारण नहीं करना चाहिए। 

मोती धारण के नियम


मोती सोमवार को धारण करना चाहिए
मोती चांदी में बनवाना चाहिए
मोती कनिष्ठा उंगली में धारण करना चाहिए
मोती चंद्र की पूजा और मन्त्र जप के बाद धारण करना चाहिए
मोती केवल संध्या सूर्यास्त के बाद धारण करना चाहिए

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