रत्न और ज्योतिष सिद्धान्त

रत्न और ज्योतिष सिद्धान्त

रत्न और ज्योतिष हमारे जीवन पर कैसे प्रभाव ड़ालते है, कैसे रत्न हमारे जीवन में बदलाव ला सकते है, यह विचार सबके मन में आता ही है, आइये इस पोस्ट “रत्न और ज्योतिष सिद्धान्त” के माध्यम से यही जानकारी प्राप्त करते है। 

रत्न और ग्रह

सौरमंडल में मौजूद हर ग्रह का अपना एक विषिष्ट वर्ण का प्रकाश है, उस ग्रह से निकलने वाली किरणें समस्त ब्रह्माण्ड पर अपना असर डालती है,
सृष्टि पर मौजूद प्रत्येक प्राणी पर उन किरणों का असर पड़ता है, जब किसी व्यक्ति का जन्म होता है, उस समय सौरमंडल में मौजूद ग्रहों की स्तिथि के अनुसार ही व्यक्ति अपने पुरे जीवन में प्रभावित रहता है,

सौरमंडल में २७ नक्षत्र, ९ ग्रह और १२ राशियां है, जिनकी किरणें पृथ्वी पर मौजूद प्रत्येक जिव-जंतु, पशु-पक्षी, वनस्पति और मानव जाति पर पड़ती है,
सौरमंडल में मौजूद इन्हीं ग्रहों, राशियों और नक्षत्रों से मानव पूरी तरह से प्रभावित रहता है और अपना सम्पूर्ण जीवन इन्हीं ग्रहों की अनुकूलता और प्रतिकूलता के अनुसार व्यतीत करता है,

अनुकूल ग्रह व्यक्ति के जीवन में खुशहाली और तरक्की लाते है जबकि प्रतिकूल ग्रह व्यक्ति के जीवन में बाधाएं उत्पन्न करते है, जिनके निवारण की आवश्यकता पड़ती है,

नवरत्नों में हर रत्न एक ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है और वह रत्न उस ग्रह की ऊर्जा का सञ्चालन करता है,
जब व्यक्ति उस रत्न को धारण करता है, तो उस ग्रह की ऊर्जा व्यक्ति में समाती है, जिससे व्यक्ति के अंदर उस ग्रह की शक्तियों का संचार होने लगता है।

रत्नों का प्रभाव

रत्नों के लाभ प्राप्त करने के लिए यह भी जानना जरुरी होता है की कौन सा रत्न क्या प्रभाव देता है, यह जानने के लिए व्यक्ति को अपनी जन्म कुंडली का निरिक्षण करवाना चाहिए की उसकी कुंडली में किस ग्रह की दशा कैसी है,

प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में हर ग्रह अपने अलग प्रभाव देता है, कोई ग्रह व्यक्ति को आर्थिक और कारोबारी प्रभाव देता है, कोई स्वास्थय, कोई परिवारिक और वैवाहिक जीवन, तो कोई धन संपत्ति के प्रभाव देता है,

इसलिए कुंडली विश्लेषण से यह जान लेना जरुरी होता है की हमारे जीवन के किस सुख की कमी है और उसको कौन सा ग्रह प्रभावित कर रहा है और कौन से ग्रह हमारे जीवन के लिए शुभ है,
उसी के अनुसार उपाय और रत्न धारण करने चाहिए।

रत्न सीधे तौर से ग्रहों की तरंगों से जुड़े रहते है, उनकी ऊर्जाओं का संचालन करते है, इसलिए अगर सोच विमर्श कर रत्न धारण किया जाये तो व्यक्ति अपने जीवन में अच्छी बुलंदियों पर पहुंच सकता है।

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