जन्म कुंडली में चंद्र के प्रभाव

जन्म कुंडली में चंद्र के प्रभाव

Image by PublicDomainPictures from Pixabay
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किसी भी व्यक्ति के जीवन में चंद्र अपने विशेष प्रभाव रखता है, चंद्र व्यक्ति का मन और आत्मा है, आइये जानकारी प्राप्त करते है की जन्म कुंडली में चंद्र के प्रभाव क्या क्या हो सकते है।


चंद्र ग्रह

जन्म कुंडली में चंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है, कुंडली में चंद्र जिस राशि में रहता है, व्यक्ति की वही जन्म राशि होती है,
चंद्र को एक सौम्य और शुभ ग्रह माना जाता है।
 

ग्रहों में चंद्र का स्थान सूर्य के बाद आता है, सूर्य के प्रकाश से चमकने वाला चंद्र को ग्रहों की रानी का दर्जा प्राप्त है, चंद्र ग्रह सबसे निर्मल और शांतिदायक ग्रह है, 

चंद्र की अपनी राशि कर्क है और चंद्र रोहिणी, हस्त और श्रवण नक्षत्रों का स्वामी है, सभी ग्रहों में चंद्र सबसे छोटा ग्रह है, लेकिन चंद्र सभी ग्रहों में सबसे अधिक गति से चलता है,

 
चंद्र सवा २ दिन में एक राशि से दूसरी  राशि में भ्रमण करता है, विंशोत्तरी, योगिनी, अष्टोत्तरी दशाएं चंद्र की गति से ही निर्धारित की जाती है, गोचर में भी सभी ग्रहों में चंद्र की अवधि सबसे कम होती है,

जब जातक का जन्म होता है, उसकी राशि जन्म के समय चंद्र की स्तिथि के अनुसार ही मानी जाती है, जन्म कुंडली में चंद्र राशि को ही जातक की राशि माना जाता है, कुंडली में चंद्र जिस किसी भी राशि में होगा, जातक की वही राशि मानी जाएगी। 

 

चंद्र ग्रह मन की नियंत्रित करता है, इसके अलावा चंद्र स्मरणशक्ति, माँ, दिमागी संतुलन, हौंसला, यात्राएं, धन, सुख, संपत्ति, बाईं आंख, शरीर में रक्तः,भावुकता, कल्पना-शक्ति, बुद्धि, भावना, फ़ेफ़डे और छाती को भी नियंत्रित करता  है। 

 

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चंद्र ग्रह का अधिपत्य


  • चंद्र ग्रह कर्क लग्न और राशि का स्वामी है,
  • चंद्र का अपना दिन सोमवार है,
  • चंद्र ग्रह वृषभ राशि में उच्च और वृश्चिक राशि में नीच का होता है,
  • चंद्र अपने से सप्तम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है,
  • चंद्र के मित्र ग्रहों में सूर्य और बुध आते है,
  • चंद्र के सम ग्रहों में शुक्र ,शनि ,मंगल  और बृहस्पति आते है,
  • चंद्र ग्रह की किसी भी ग्रह से शत्रुता नहीं रहती,
  • चंद्र का मौसम वर्षा ऋतु है,
  • चंद्र जल प्रधान ग्रह है,
  • चंद्र वात्त और कफ का कारक है,
  • चंद्र सफ़ेद रंग का प्रतिनिधित्व करता है,
  • चंद्र उत्तर पश्चिम दिशा का स्वामी है,
  • चंद्र की धातु कांस्य और रजत है,
  • चंद्र का रत्न मोती है,
  • चंद्र मन, भावनाओं और माता का कारक है,
  • चंद्र का स्वाभावअस्थिर और चंचल है,
  • चंद्र के स्वामी वरुण देव है। 


 

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कर्क लग्न के जातक

कर्क राशि के जातक

चन्द्र के रत्न मोती के लाभ 

जन्म कुंडली में चंद्र के प्रभाव

मोती रत्न के नुकसान

 

 

 

चंद्र की शक्ति


चंद्र पृथ्वी के सबसे नजदीक ग्रह है, चंद्र ग्रह में जबरदस्त चुम्बकीय शक्ति है, अपनी इसी शक्ति से चंद्र समुन्द्र में ज्वार भाटा ला देता है, समुन्द्र में तूफान ला देता है,
पूर्णिमा के दिन चंद्र अपने पूर्ण आकार में होता है, इस समय समय चंद्र में जबरदस्त चुम्बकीय शक्ति उतपन्न रहती है।  

जन्म कुंडली में चंद्र की स्तिथि


ज्योतिष शास्त्र में चंद्र शुभ और सौम्य ग्रह में आता है और इसकी प्रकृति शीतल मानी जाती है, किसी भी व्यक्ति के चरित्र का आंकलन करने के लिए चंद्र की भूमिका देखी जाती है, क्योकि चंद्र व्यक्ति के मन और भावनाओं से संबंध रखता है और उनका नियंत्रण करता है,

चंद्र जब किसी जातक की कुंडली में वृष राशि में होता है तो उसे उच्च का चंद्र कहा जाता है, उच्च का चंद्र कुंडली में सबसे बलशाली होता है और अगर चंद्र अपनी ही राशि कर्क में होगा तो भी चंद्र अपने पूर्ण बल में होता है,

जब चंद्र कुंडली में ऐसी बलशाली स्तिथि में होता है तो जातक तेजवान होता है, मृदु स्वाभाव, संवेदनशील, भावुक और सबसे स्नेह करने वाला होता है,
ऐसे जातकों को अपने जीवन में अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता, वे अपने भाग्य के बल पर जीवन की समस्त सुख सुविधाओं का भोग करते है और उनत्ति प्राप्त करते है।

 

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जन्म कुंडली में चंद्र के प्रभाव


वास्तविक जीवन में चंद्र अपने प्रभाव कला के क्षेत्रों में रखता है, जैसे की ललित कला, काव्य, साहित्य, गीत, नाटक, रंगमंच, फिल्म और टीवी कलाकार, अन्न के कारोबार, औषदी, लवण, जल, सिंचाई कार्य, कृषि, आयात-निर्यात, सम्पदा, कांच के कारोबार, दूध व्यवसाय, यश-सम्मान, मछली व्यवसाय, समुद्री उत्पादों, कृषि, वस्त्र,महिलाओं से सम्बंधित कार्य, यात्रा,  उद्योग,जनता से सम्बन्धित कार्य आदि जैसे क्षेत्रों में अपना अधिपत्य रखता है, 


Precious Gemstones


शारीरिक रूप से चंद्र के प्रभाव उदासी, अनिंद्रा, फेफड़े की बीमारी ,रक्त की बीमारी, पाचन तंत्र की बीमारी, समस्या, मानसिक तनाव, रक्तचाप, नकारात्मक विचार, डिप्रेशन,चेहरा के रोग आदि देखने को मिलेंगे,

इन सभी क्षेत्रों पर केवल चंद्र के ही प्रभाव देखने को मिलेंगे, अगर किसी जातक की पत्रिका में चंद्र की स्तिथि अनुकूल रहेगी तो वह जातक इन सभी कार्यों में सफलता प्राप्त करेगा,
वही प्रतिकूल परिस्थितियों में इन सभी क्षेत्रों में असफलता और हानि प्राप्त होती है और चंद्र से सम्बंधित शारीरिक अंगो से कष्ट और पीड़ा प्राप्त होती है।


भाग्यशाली रत्न

 

चंद्र का रत्न मोती


चंद्र का रत्न मोती है, मोती समुन्द्र की तलहटी से सीप के अंदर प्राप्त होता है, कुदरत ने मोती में ऐसे प्रभाव दिए है जो की चंद्र की तरंगो का संचालन करता है,
जब कोई मनुष्य मोती धारण करता है, तो मोती चंद्र के प्रभावों और शक्तियों को धारणकर्ता तक पहुंचाने का माध्यम बनता है,
चंद्र के लाभ प्राप्त करने के लिए मोती से अच्छा अन्य कोई रत्न नहीं है, इतना जरूर है की अगर किसी कारणवश मोती उपलब्ध नहीं है तो ऐसे में एक उपरत्न जिसे मूनस्टोन या चंद्रमणि के नाम से जाना जाता है, इस रत्न को मोती के स्थान पर धारण किया जा सकता है,
चंद्रमणि भी चंद्र के पूर्ण लाभ देने से समर्थ होता है और अच्छा लाभकारी सिद्ध होता है।

अनमोल रत्न

 

चंद्र का रत्न मोती कौन धारण कर सकता है


ऐसे जातक जिनकी जन्म कुंडली में चंद्र शुभ होकर भी निर्बल है, पाप ग्रहों के संपर्क या दृष्टि में है, ऐसे जातकों को चंद्र को बल देने के लिए मोती अवशय धारण करना चाहिए,
मोती धारण करने से उनकी किस्मत के द्वार खुलते है, जीवन में आ रही रुकावटें ख़त्म होती है, जिन युवाओं को सरकारी नौकरी लगने में बार बार रूकावट आती है उन युवाओं को भी लाभ मिलता है,
मोती धारण करने से कला जगत से जुड़े लोगों की प्रसिद्धि बढ़ती है,

मेष, तुला, वृश्चिक और मीन लग्न के जातकों के लिए चंद्र योगकारक होता है, इन जातकों को चंद्र का रत्न मोती धारण करने से बहुत लाभ मिलते है,

रोहिणी, हस्त, श्रवण, पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों के जातकों के लिए भी चंद्र बहुत योगकारक ग्रह होता है, उन जातकों को भी मोती धारण करने से काफी लाभ प्राप्त हो सकते है,

 

 लग्नानुसार रत्न निर्धारण

 

राशियों में मेष, तुला, वृश्चिक और मीन राशि के जातक भी एक बार अपनी जन्म पत्रिका का विश्लेषण करवाकर मोती धारण कर सकते है,

चिकित्सा की दृष्टि से भी मोती धारण के कई लाभ है, ऐसे व्यक्ति जो डिप्रेशन के शिकार है, हृदय रोग से पीड़ित है, ब्लडप्रेशर के शिकार है, मानसिक रोग से पीड़ित है, गुस्सा बहुत जल्दी हावी हो जाता है, अचानक मूर्छा आ जाती है, पेट के रोग, सर्दी-जुखाम-कफ से पीड़ित रहते है, बवासीर से पीड़ित है, पाचन शक्ति में कमजोरी, मुँह और दन्त रोग है, पेट में बहुत गर्मी रहती है आदि रोगों में मोती धारण करना बहुत लाभदायक साबित हो सकता है,
लेकिन ऐसा नहीं है की मोती हमेशा लाभ ही देता है, मोती धारण के लिए अपनी कुंडली में चंद्र की स्तिथि देख लेना आवशयक होता है,
इसलिए जब भी मोती धारण करें एक बार अपनी जन्म पत्रिका का विश्लेषण अवशय करवा ले।


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मोती धारण करने से नियम


सबसे पहले तो जब भी मोती धारण करें तो एक बार अपनी कुंडली में चंद्र की स्तिथि जरूर देख ले,
मोती को चांदी की अंगूठी या लॉकेट में बनवाना चाहिए और इसकी अंगूठी को धारण करने का सबसे शुभ दिन सोमवार शाम सूर्यास्त के बाद का है,
शुभ मुहूर्त देखते हुए मोती की अंगूठी धरना करनी चाहिए,

Semi-precious Gemstone 

 

अंगूठी धारण करने से पहले उसे गंगाजल से शुद्ध कर ले, और अपने इष्ट देव की पूजा करने के बाद, चंद्र देव की भी पूजा और चंद्र मन्त्र (“ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:, १०८ बार”) का जाप करने के बाद अपनी कनिष्ठा उंगली यानि की सबसे छोटी उंगली में धारण करें।

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