केतु मन्त्र द्वारा केतु ग्रह की शांति

केतु मन्त्र

अगर आप केतु के अशुभ प्रभावों से जूझ रहे है, तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है, आप केतु मन्त्र द्वारा केतु ग्रह की शांति कर सकते है और अपने जीवन की परेशानियों को 90% (प्रतिशत) तक कम कर सकते है।

केतु ग्रह

समुद्र मंथन के समय स्वरभानु नामक दानव भी था, जिसने अमृत पिने की कोशिश की थी, जिसमे वह कुछ बूंदे पीने में सफल भी हुआ था, लेकिन इससे पहले  की वह और अमृत पान करें, भगवान विष्णु ने जो की उस समय  मोहिनी अवतार रूप धारण किये हुए थे, उन्होंने स्वरभानु दानव का सर धड़ से अलग कर दिया,
और उस दानव का सर राहु कहलाया और धड़ केतु कहलाया, राहु और केतु ग्रहों का अन्य ग्रहों की तरह रूप नहीं है, यह दोनों एक छाया ग्रहों के रूप से जाने जाते है।

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केतु को एक रहस्यमई ग्रह माना जाता है, अधयात्म के क्षेत्र में केतु ग्रह का अत्यधिक प्रभाव है, गूढ़ रहस्य, ब्रह्मज्ञान, मोक्ष, दविये उपासना, खोज, पुरातत्व विभाग, गहन शिक्षा, कंप्यूटर जैसे कार्य केतु ग्रह के अधीन ही आते है,

केतु ग्रह चर्म रोग, दुःख, दरिद्रता, वात रोग, आंख की कमजोरी, अस्थि रोग, क्षयरोग का कारक है, केतु का प्रभाव मंगल ग्रह की तरह माना गया है, अगर किसी जातक की कुंडली में केतु द्वादश भाव में होता है तो ऐसा माना जाता है की उस जातक को मोक्ष प्राप्त होता है।

केतु एक छाया  ग्रह होने के बाद भी किसी भी जातक के जीवन में बहुत प्रभाव रखता है, अगर केतु  कुंडली में योगकारक है तो केतु बहुत शुभ प्रभाव देखने को मिलते है, यही अगर केतु अशुभ प्रभावों में है तो उसके काफी अशुभ प्रभाव मिलते है,
अशुभ केतु जातक को बहुत विचलित करता है, किसी भी कार्य में सफलता नहीं मिल पाती है, जातक को दरिद्रता घेर लेती है, शारीरिक बीमारियां परेशान करती है,

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अगर  केतु की महादशा चल रही हो तो यह परेशानियां और भी बढ़ चढ़ कर आती है, इसलिए ऐसे समय में एक ही उपाय रहता है की केतु के मन्त्र जप से केतु की शांत रखा जाये,

ग्रहों के मंत्रों में इतनी शक्ति  होती है की अगर इन्हें नियमित रूप से किया जाये तो अशुभ और विनाशकारी ग्रहों को भी शांत किया जा सकता है,
जब भी किसी जातक की कुंडली में केतु अशुभ है और केतु की महादशा शुरू हुई है तो केतु के मंत्रों का जाप शुरू कर देना चाहिए।

केतु मंत्र


नीचे बताए गए केतु मंत्रों में से आप कोई भी एक मन्त्र का चुनाव करके इसे नित्य या प्रत्येक मंगलवार को सुबह १, ३, ५, ७ या ११ माला (माला १०८ मानकों की) जप करना चाहिए,
नित्य मन्त्र जप के विशेष लाभ मिलते है।

लग्न और रत्न

केतु का वैदिक मंत्र


“ऊँ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेश से। सुमुषद्भिरजायथा:”

 केतु का पौराणिक मन्त्र


“पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकम्।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्।।”

लग्नानुसार रत्न निर्धारण

केतु का तांत्रोक्त मंत्र


“ऊँ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं स: केतवे नम:”
“ह्रीं केतवे नम:”
“कें केतवे नम:”

लग्न विश्लेषण

केतु का बीज मंत्र


“ऊँ कें केतवे नम:”

१२ राशियाँ

 केतु का गायत्री मंत्र


“ऊँ धूम्रवर्णाय विद्महे कपोतवाहनाय धीमहि तन्नं: केतु: प्रचोदयात।”

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