लग्न के अनुसार माणिक्य धारण के लाभ manik dharan karne ki vidhi

सूर्य का रत्न माणिक बहुत ही लाभकारी, प्रभावशाली और चमत्कारी रत्न है, माणिक धारण करने से व्यक्ति के जीवन में कई लाभकारी परिवर्तन आते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि कोई भी कभी भी माणिक धारण कर सकता है, आइए जानते हैं लग्न के अनुसार माणिक्य धारण के लाभ

सूर्य

सर्वोच्च वैभव और ग्रहों का राजा, सूर्य व्यक्ति के सिर, हृदय, कमर, संवहनी प्रणाली, हड्डियों, दाहिनी आंख, विद्या, मानसिक दृढ़ता, आत्म-संयम, रुचि, कल्याण आदि का स्वामी है।
सूर्य जातक के पिता के सुख का कारक होने के साथ-साथ भाई के सुख का कारक भी होता है, सूर्य न्याय, यांत्रिकी, रत्न व्यवसाय, औषधि निर्माण, चित्रकला, राज-शक्ति, प्रशासनिक सेवा, प्रसिद्धि, राजनीती, उच्च सरकारी पद, जादू-टोना आदि पर अपना अधिकार रखता है।

सूर्य का रत्न माणिक है, सूर्य का रत्न होने के कारण माणिक्य को रत्नों के राजा की उपाधि दी गई है।

पाश्चात्य मत अनुसार रत्न धारण

लेकिन ऐसा नहीं है कि किसी भी लग्न का जातक सूर्य का रत्न माणिक धारण कर सकता है, लग्न के अनुसार ही माणिक्य धारण किया जाता है क्योंकि प्रत्येक लग्न में सूर्य की अलग-अलग स्थिति होती है,
ऐसे में यदि लग्न और सूर्य की स्थिति के अनुसार माणिक्य धारण न किया जाए तो माणिक्य धारण करने से बहुत से विनाशकारी प्रभाव पड़ सकते हैं,

आइए, आज की इस पोस्ट में हम प्रत्येक 12 लग्न के अनुसार माणिक धारण करने की स्थिति पर चर्चा करेंगे और जानेंगे कि किस लग्न में माणिक्य धारण किया जा सकता है, लग्न के अनुसार माणिक्य धारण के लाभ

मेष लग्न

मेष लग्न की कुंडली के जातक के लिए सूर्य पंचम भाव का स्वामी होता है, पंचम भाव में सूर्य बुद्धि, आत्मसंयम, संतान सुख और विद्या और धन को नियंत्रित करता है, इसलिए किसी भी मेष लग्न के जातक को माणिक्य धारण करने से सूर्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस लग्न के जातक के लिए माणिक्य धारण करना बहुत ही लाभदायक होता है।

वृषभ लग्न

वृष लग्न वाले जातकों का स्वामी शुक्र होता है और वृष लग्न में सूर्य चतुर्थ भाव का स्वामी होता है।
चतुर्थ भाव संपत्ति, भूमि, भाव, वाहन, माता के सुखों का भाव है, चतुर्थ भाव की दृष्टि से देखा जाए तो वृष लग्न में सूर्य कारक ग्रह है,
लेकिन वहीं दूसरी ओर वृष लग्न का स्वामी शुक्र सूर्य का परस्पर विरोधी ग्रह है, इस दृष्टि से माणिक धारण करना उचित नहीं है।

लेकिन वृष लग्न में सूर्य शुभ भाव का स्वामी होने के कारण सूर्य की महादशा में माणिक धारण कर सकता है, लेकिन फिर भी माणिक धारण करने से पहले अपनी कुंडली में सूर्य की स्थिति की जांच कर लें।

लग्नानुसार रत्न निर्धारण

मिथुन लग्न

मिथुन लग्न के जातकों के लिए माणिक धारण करना कभी भी लाभकारी नहीं होता, इसका कारण यह है कि मिथुन लग्न की कुंडली में सूर्य तीसरे भाव का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे ज्योतिष में शुभ नहीं माना जाता है।

कर्क लग्न

कर्क लग्न की कुंडली में सूर्य द्वितीय भाव का स्वामी है , द्वितीय भाव धन-समृद्धि का भाव है,
इसके साथ ही सूर्य कर्क लग्न के स्वामी चंद्रमा का मित्र भी है, जो कर्क लग्न में बहुत प्रभावशाली होता है। कर्क लग्न जातकों को माणिक्य धन और कारोबार से सम्बंधित लाभ देता है, सूर्य की महादशा में माणिक्य धारण करना लाभदायक हो सकता है,
अगर आंखों से जुड़ी कोई समस्या है तो उसमें भी उन्हें लाभ मिलता है।

सिंह लग्न

सिंह लग्न के जातकों के लिए माणिक धारण करना अनिवार्य है सिंह लग्न की कुंडली में सूर्य उनका लग्न स्वामी है।
माणिक्य धारण करने से सिंह लग्न के जातकों को साहस, बल, विवेक, विजय, आर्थिक उन्नति, शारीरिक स्वास्थ्य, यश और सामाजिक मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।

भाग्यशाली रत्न

कन्या लग्न

कन्या लग्न की कुंडली में सूर्य बारहवें भाव का स्वामी होता है जो खर्च, शारीरिक कष्ट, दुर्घटना, चोरी, परेशानी और जेल का घर होता है।
इसलिए किसी भी कन्या लग्न के जातक को माणिक्य से दूर ही रहना चाहिए।

तुला लग्न

तुला लग्न की कुंडली में सूर्य एकादश भाव का स्वामी बनता है जो सूर्य के लिए लाभकारी स्थान नहीं माना जाता है।
दूसरी बात यह है कि सूर्य तुला लग्न के स्वामी शुक्र का भी प्रबल विरोधी हैं, इसलिए किसी भी तुला लग्न के लिए माणिक्य धारण करना कभी भी शुभ नहीं हो सकता है।

वृश्चिक लग्न

वृश्चिक लग्न के जातकों के लिए सूर्य अवश्य ही लाभकारी होता है, वृश्चिक लग्न में सूर्य दशम भाव का स्वामी होता है, दशम भाव उन्नति, नौकरी, प्रसिद्धि, राजनीती और व्यापार का भाव होता है,
वृश्चिक लग्न के जातकों को माणिक्य धारण करने से मान-सम्मान, व्यवसाय, प्रशासनिक कार्य, राजनीति, सरकारी नौकरी में बहुत लाभ मिलता है।

धनु लग्न

धनु लग्न की कुंडली में सूर्य भाग्य का स्वामी बनता है, सूर्य नवम भाव का प्रतिनिधित्व करता है,
धनु लग्न के जातकों को पिता का सुख, पिता की संपत्ति, जीवन के हर क्षेत्र में उन्नति, भाग्य की उन्नति, विदेश यात्रा और धन की प्राप्ति होती है।
वैसे तो धनु लग्न के जातक माणिक को कभी भी धारण कर सकते हैं लेकिन यदि सूर्य की महादशा चल रही हो तो माणिक्य धारण करने से बहुत ही लाभ मिलता है।

मकर लग्न

मकर लग्न में सूर्य अष्टम भाव का स्वामी होता है अर्थात मृत्यु और रोग इस लग्न के जातकों को कभी भी माणिक नहीं पहनना चाहिए।
वैसे भी लग्न भगवान शनि और सूर्य आपस में भयंकर शत्रु हैं।

कुंभ लग्न

कुम्भ लग्न की कुण्डली में सूर्य सप्तम भाव का स्वामी बनता है, सूर्य सप्तम भाव में दाम्पत्य जीवन में वियोग बनाता है,
साथ ही कुम्भ लग्न के स्वामी शनि और सूर्य आपस में भयंकर शत्रु हैं इसलिए कुम्भ लग्न के लोगों को माणिक कभी नहीं पहनना चाहिए।

मीन लग्न

मीन लग्न की कुंडली में भी सूर्य छठे भाव का स्वामी यानी रोग और कर्ज का स्वामी होता है इसलिए मीन लग्न के जातकों के लिए माणिक्य धारण करना शुभ नहीं होता है।

माणिक्य के साथ वर्जित रत्न

ऐसा नहीं है कि कोई भी व्यक्ति माणिक धारण कर सकता है, माणिक धारण करने से पहले किसी की कुंडली में सूर्य की स्थिति देखना आवश्यक है,

साथ ही यह जानना भी जरूरी है कि माणिक्य के साथ हीरा, नीलम या गोमेद नहीं पहनना चाहिए।

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