नक्षत्रों के चरण क्या होते हैं

नक्षत्रों के चरण क्या होते हैं? जानिए 27 नक्षत्रों के 108 चरण, नाम अक्षर और महत्व

नक्षत्रों के चरण वैदिक ज्योतिष का एक बहुत महत्वपूर्ण विषय है। केवल यह जानना कि किसी व्यक्ति का जन्म किस नक्षत्र में हुआ है, हमेशा पर्याप्त नहीं माना जाता। जन्म नक्षत्र के साथ यह भी देखा जाता है कि चंद्रमा उस नक्षत्र के किस चरण या पाद में स्थित था। इसी से व्यक्ति के स्वभाव, सोच, रुचि और कई ज्योतिषीय बातों को अधिक बारीकी से समझने में मदद मिलती है।

वैदिक ज्योतिष में कुल 27 मुख्य नक्षत्र माने जाते हैं और हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं। इस तरह पूरे राशि चक्र में कुल 108 नक्षत्र चरण होते हैं। हर नक्षत्र 13°20′ का और उसका प्रत्येक चरण 3°20′ का होता है।

नक्षत्र क्या होता है?

ज्योतिष में आकाश के उस हिस्से को नक्षत्र कहा जाता है, जिसे चंद्रमा अपनी यात्रा के दौरान पार करता है। 360 डिग्री के राशि चक्र को 27 बराबर भागों में बांटा गया है। प्रत्येक भाग को एक नक्षत्र कहा जाता है।

राशि से हमें जीवन के बारे में एक सामान्य जानकारी मिलती है, जबकि नक्षत्र व्यक्ति के स्वभाव और जीवन की कई छोटी बातों को समझने में मदद करता है। इसलिए जन्म कुंडली देखते समय राशि के साथ नक्षत्र को भी महत्व दिया जाता है।

एक नक्षत्र में कितने चरण होते हैं?

हर नक्षत्र चार चरणों में बांटा जाता है। इन्हें प्रथम चरण, द्वितीय चरण, तृतीय चरण और चतुर्थ चरण कहा जाता है। ज्योतिष में चरण को पाद भी कहा जाता है।

विषय संख्या
कुल नक्षत्र 27
हर नक्षत्र के चरण 4
कुल नक्षत्र चरण 108
एक नक्षत्र का विस्तार 13° 20′
एक चरण का विस्तार 3° 20′

नक्षत्र का चरण क्यों महत्वपूर्ण है?

किसी व्यक्ति का जन्म नक्षत्र उसके जीवन और स्वभाव की एक बड़ी तस्वीर देता है, लेकिन नक्षत्र का चरण उस तस्वीर में और अधिक जानकारी जोड़ता है। एक ही नक्षत्र में जन्मे दो लोगों का स्वभाव पूरी तरह एक जैसा नहीं होता। इसका एक कारण उनके जन्म नक्षत्र का अलग-अलग चरण होना भी माना जाता है।

नक्षत्र के चरण का उपयोग ज्योतिष में कई बातों को समझने के लिए किया जाता है। जैसे नाम रखने के अक्षर, नवांश से जुड़ी जानकारी, स्वभाव की बारीकियां और जन्म कुंडली का अधिक गहराई से अध्ययन।

नक्षत्र चरण और नामकरण

भारतीय ज्योतिष परंपरा में बच्चे का नाम रखने के लिए जन्म नक्षत्र और उसके चरण से जुड़े अक्षरों का उपयोग किया जाता है। इसलिए कई परिवार बच्चे का नाम रखने से पहले जन्म का नक्षत्र और उसका चरण जानना पसंद करते हैं।

उदाहरण के लिए किसी नक्षत्र के चार चरणों से चार अलग-अलग नाम अक्षर जुड़े हो सकते हैं। सही जन्म समय के आधार पर पता लगाया जा सकता है कि बच्चा किस चरण में पैदा हुआ है।

27 नक्षत्र और उनके चार चरण

अब जानते हैं 27 नक्षत्रों के नाम और उनके चार चरणों से जुड़े सामान्य नाम अक्षर। अलग-अलग पंचांग या ज्योतिष गणना पद्धति में अक्षरों को लिखने का तरीका थोड़ा अलग दिखाई दे सकता है, लेकिन मूल परंपरा समान रहती है।

क्रम नक्षत्र चरण 1 चरण 2 चरण 3 चरण 4
1अश्विनीचुचेचोला
2भरणीलीलूलेलो
3कृत्तिका
4रोहिणीवावीवु
5मृगशिरावेवोकाकी
6आर्द्राकु
7पुनर्वसुकेकोहाही
8पुष्यहुहेहोडा
9आश्लेषाडीडूडेडो
10मघामामीमूमे
11पूर्वाफाल्गुनीमोटाटीटू
12उत्तराफाल्गुनीटेटोपापी
13हस्तपू
14चित्रापेपोरारी
15स्वातिरूरेरोता
16विशाखातीतूतेतो
17अनुराधानानीनूने
18ज्येष्ठानोयायीयू
19मूलयेयोभाभी
20पूर्वाषाढ़ाभूधाफाढा
21उत्तराषाढ़ाभेभोजाजी
22श्रवणजूजेजो
23धनिष्ठागागीगुगे
24शतभिषागोसासीसू
25पूर्वाभाद्रपदसेसोदादी
26उत्तराभाद्रपददूथा
27रेवतीदेदोचाची

नक्षत्र चरण और राशि का संबंध

हर नक्षत्र केवल एक राशि में ही नहीं रहता। कुछ नक्षत्र दो राशियों में भी फैलते हैं। इसलिए केवल नक्षत्र का नाम जानना पर्याप्त नहीं है। जन्म के समय चंद्रमा किस डिग्री पर था, यह जानना भी जरूरी है। इसी आधार पर नक्षत्र और उसका चरण निश्चित किया जाता है।

एक राशि में कितने नक्षत्र चरण होते हैं?

एक राशि 30 डिग्री की होती है और एक नक्षत्र चरण 3°20′ का होता है। इस हिसाब से एक राशि में लगभग 9 नक्षत्र चरण आते हैं। इसी कारण नक्षत्र और राशि दोनों को साथ देखकर कुंडली का अधिक सही अध्ययन किया जाता है।

ज्योतिषीय भाग विभाजन महत्व
राशि 12 जीवन का सामान्य क्षेत्र और स्वभाव
नक्षत्र 27 मन, स्वभाव और जीवन की विशेष प्रवृत्तियां
नक्षत्र चरण 108 नक्षत्र की अधिक बारीक जानकारी
नवांश 9 भाग कुंडली के गहरे फलित अध्ययन में उपयोग

नक्षत्र चरण से कौन-कौन सी बातें देखी जाती हैं?

1. बच्चे का नाम रखने में मदद

नक्षत्र के चरण से जुड़े अक्षरों के आधार पर बच्चे के नाम का पहला अक्षर चुना जाता है। यही कारण है कि जन्म के समय, तारीख और स्थान के साथ सही जन्म समय का महत्व बढ़ जाता है।

2. व्यक्ति के स्वभाव को समझना

एक ही नक्षत्र के अलग-अलग चरण व्यक्ति के स्वभाव में कुछ अंतर दिखा सकते हैं। कोई व्यक्ति अधिक शांत हो सकता है, कोई ज्यादा सक्रिय, कोई सोचने वाला और कोई लोगों के साथ जल्दी घुलने-मिलने वाला हो सकता है।

3. नवांश से संबंध

ज्योतिष में प्रत्येक नक्षत्र चरण को नवांश से भी जोड़ा जाता है। इसलिए कुंडली का गहरा अध्ययन करते समय नक्षत्र चरण की जानकारी उपयोगी होती है।

4. विवाह कुंडली मिलान

विवाह के लिए कुंडली मिलान करते समय केवल राशि देखना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। नक्षत्र, जन्म नक्षत्र, चरण और अन्य ग्रह स्थितियों को भी देखा जाता है। इससे दोनों व्यक्तियों के स्वभाव और आपसी तालमेल का ज्योतिषीय अध्ययन किया जाता है।

5. जन्म कुंडली का विस्तृत अध्ययन

जब किसी व्यक्ति की कुंडली का विस्तार से अध्ययन किया जाता है, तब लग्न, चंद्र राशि, नक्षत्र, नक्षत्र स्वामी, चरण और ग्रहों की स्थिति जैसी कई बातों को एक साथ देखा जाता है। इसलिए नक्षत्र चरण कुंडली विश्लेषण की एक उपयोगी कड़ी है।

नक्षत्र चरण कैसे पता करें?

नक्षत्र चरण निकालने के लिए केवल जन्म तारीख जानना काफी नहीं है। सामान्य रूप से जन्म तारीख, जन्म का सही समय और जन्म स्थान की जरूरत होती है। जन्म के उस समय चंद्रमा की स्थिति देखकर यह पता लगाया जाता है कि वह 27 नक्षत्रों में से किस नक्षत्र में और उसके किस चरण में था।

सही जन्म समय क्यों जरूरी है?

चंद्रमा काफी तेजी से राशि चक्र में आगे बढ़ता है। इसलिए जन्म समय में अंतर होने पर नक्षत्र या उसका चरण बदल सकता है, खासकर तब जब जन्म नक्षत्र के चरण बदलने का समय आसपास हो।

अगर जन्म समय सही पता न हो तो?

ऐसी स्थिति में किसी अनुभवी ज्योतिषी से जन्म कुंडली और उपलब्ध जीवन घटनाओं के आधार पर सलाह ली जा सकती है। कुछ मामलों में जन्म समय सुधार की प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। लेकिन इसका निर्णय पूरी कुंडली देखने के बाद ही करना बेहतर होता है।

क्या एक ही नक्षत्र के चारों चरण अलग होते हैं?

हाँ। एक नक्षत्र के चारों चरण एक ही नक्षत्र का हिस्सा होते हैं, लेकिन उनके बीच ज्योतिषीय स्तर पर अंतर माना जाता है। चरण बदलने से उससे जुड़ा नाम अक्षर और नवांश संबंध भी बदल सकता है। इसलिए जन्म नक्षत्र के साथ उसका चरण भी लिखना महत्वपूर्ण है।

नक्षत्र चरण और 108 का महत्व

27 नक्षत्रों को चार-चार चरणों में बांटने पर 108 चरण बनते हैं। भारतीय परंपरा में 108 संख्या का विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिष में भी 108 नक्षत्र चरणों की यह व्यवस्था बहुत उपयोगी मानी जाती है।

इससे यह समझना आसान होता है कि केवल 12 राशियों के आधार पर व्यक्ति को समझने की तुलना में नक्षत्र और चरण से अधिक बारीक स्तर पर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

नक्षत्र चरण जानने से क्या फायदा होता है?

  • जन्म नक्षत्र को सही तरीके से समझने में मदद मिलती है।
  • बच्चे के नाम के लिए पारंपरिक नाम अक्षर चुना जा सकता है।
  • कुंडली के स्वभाव संबंधी संकेतों को अधिक बारीकी से देखा जा सकता है।
  • विवाह कुंडली मिलान में अतिरिक्त जानकारी मिलती है।
  • नवांश और अन्य ज्योतिषीय गणना को समझने में सहायता मिलती है।
  • चंद्रमा की स्थिति का अधिक विस्तृत अध्ययन किया जा सकता है।

नक्षत्र चरण को समझने का आसान तरीका

इसे बहुत आसान तरीके से समझें। पहले पता करें कि आपका जन्म किस नक्षत्र में हुआ। इसके बाद देखें कि चंद्रमा उस नक्षत्र के पहले, दूसरे, तीसरे या चौथे चरण में था। फिर उस चरण से जुड़े नाम अक्षर और ज्योतिषीय संबंध को देखा जाता है।

उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति का जन्म रोहिणी नक्षत्र के तीसरे चरण में हुआ है, तो उसका नक्षत्र रोहिणी और चरण तीसरा माना जाएगा। इस जानकारी को आगे कुंडली के बाकी ग्रहों और भावों के साथ जोड़कर देखा जाता है।

नक्षत्र चरण के बारे में आम गलतफहमियां

क्या केवल नक्षत्र से पूरी कुंडली पता चल जाती है?

नहीं। नक्षत्र कुंडली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन पूरी कुंडली का फल जानने के लिए लग्न, ग्रह, भाव, दशा, गोचर, चंद्र राशि और अन्य जरूरी स्थितियों को भी देखना पड़ता है।

क्या केवल नाम के पहले अक्षर से जन्म नक्षत्र पता चल सकता है?

नाम अक्षर से केवल अनुमान लगाया जा सकता है। सही जन्म नक्षत्र और चरण जानने के लिए जन्म तारीख, सही समय और जन्म स्थान के आधार पर कुंडली की गणना करना अधिक उचित है।

नक्षत्रों के चरण: संक्षिप्त सार

प्रश्न उत्तर
कुल नक्षत्र कितने हैं? 27 मुख्य नक्षत्र
हर नक्षत्र में कितने चरण हैं? 4 चरण
कुल चरण कितने हैं? 108
एक नक्षत्र कितने डिग्री का है? 13°20′
एक चरण कितना होता है? 3°20′
चरण का एक उपयोग नाम अक्षर और कुंडली के सूक्ष्म अध्ययन में

नक्षत्र चरण और ज्योतिष परामर्श

अगर आप अपना जन्म नक्षत्र, नक्षत्र चरण, चंद्र राशि और कुंडली सही तरीके से समझना चाहते हैं, तो जन्म तारीख, जन्म समय और जन्म स्थान के आधार पर पूरी कुंडली का अध्ययन करना उपयोगी रहता है। केवल एक नक्षत्र देखकर जीवन के हर विषय का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में ज्योतिष परामर्श के लिए ज्योतिषाचार्य लक्ष्मी नारायण से संपर्क किया जा सकता है। वे जन्म कुंडली, कुंडली मिलान, विवाह, करियर, धन, ग्रह दोष और रत्न परामर्श जैसी सेवाएं प्रदान करते हैं।

ज्योतिषाचार्य लक्ष्मी नारायण — दुर्ग-भिलाई

ज्योतिषाचार्य लक्ष्मी नारायण दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में ज्योतिष परामर्श के लिए जाने जाते हैं। उनकी सेवाओं में जन्म कुंडली विश्लेषण, विवाह कुंडली मिलान, करियर और व्यवसाय संबंधी ज्योतिष परामर्श, ग्रह दोष संबंधी मार्गदर्शन तथा रत्न परामर्श शामिल हैं।

प्रमुख ज्योतिष सेवाएं

  • जन्म कुंडली विश्लेषण
  • नक्षत्र और नक्षत्र चरण की जानकारी
  • विवाह कुंडली मिलान
  • विवाह में देरी से जुड़े ज्योतिषीय परामर्श
  • करियर और नौकरी संबंधी ज्योतिष परामर्श
  • व्यवसाय और आर्थिक मामलों में ज्योतिषीय मार्गदर्शन
  • मांगलिक दोष और अन्य ग्रह दोष संबंधी परामर्श
  • शनि, राहु-केतु आदि ग्रहों से जुड़े उपाय
  • रत्न परामर्श
  • व्यक्तिगत कुंडली परामर्श

संपर्क विवरण

नाम: ज्योतिषाचार्य लक्ष्मी नारायण

क्षेत्र: दुर्ग-भिलाई, छत्तीसगढ़

पता: 1400, कृपाल नगर, अवन्ति बाई चौक, सुपेला, भिलाई, छत्तीसगढ़

मोबाइल / WhatsApp: 70001-30353

उपयोगी ज्योतिष वेबसाइट

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल — FAQ

नक्षत्र के चरण कितने होते हैं?

हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं। 27 नक्षत्रों के कुल 108 चरण होते हैं।

एक नक्षत्र का एक चरण कितने डिग्री का होता है?

एक नक्षत्र 13°20′ का होता है और उसका प्रत्येक चरण 3°20′ का माना जाता है।

नक्षत्र चरण का क्या महत्व है?

नक्षत्र चरण से नाम अक्षर, नवांश संबंध और जन्म कुंडली के कुछ सूक्ष्म ज्योतिषीय संकेतों का अध्ययन किया जाता है।

अपना नक्षत्र चरण कैसे पता करें?

जन्म तारीख, जन्म का सही समय और जन्म स्थान के आधार पर कुंडली की गणना करके अपना जन्म नक्षत्र और उसका चरण पता किया जा सकता है।

क्या एक ही नक्षत्र के चारों चरणों का फल समान होता है?

नक्षत्र एक ही होता है, लेकिन चारों चरणों से जुड़े ज्योतिषीय संबंध अलग हो सकते हैं। इसलिए चरण को भी कुंडली अध्ययन में देखा जाता है।

क्या नक्षत्र चरण से बच्चे का नाम रखा जा सकता है?

हाँ। ज्योतिष की पारंपरिक नामकरण पद्धति में जन्म नक्षत्र और उसके चरण से जुड़े अक्षरों का उपयोग बच्चे का नाम रखने के लिए किया जाता है।

क्या केवल नक्षत्र देखकर पूरी कुंडली का फल बताया जा सकता है?

नहीं। पूरी कुंडली के लिए लग्न, ग्रह, भाव, दशा, राशि, नक्षत्र और अन्य जरूरी ज्योतिषीय स्थितियों को साथ में देखना चाहिए।

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नक्षत्र

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