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मूल त्रिकोण क्या है? सभी ग्रहों की मूल त्रिकोण राशि केवल टेबल से समझें
| विषय |
आसान जानकारी |
| मूल त्रिकोण |
किसी ग्रह की वह विशेष राशि या राशि का भाग, जहां वह ग्रह अपनी शक्ति को अच्छे और संतुलित तरीके से काम करने में सक्षम माना जाता है। |
| मूल त्रिकोण का अर्थ |
“मूल” यानी अपना और “त्रिकोण” यानी विशेष तीन-भाग वाला संबंध। ज्योतिष में इसका उपयोग ग्रह की ताकत समझने में किया जाता है। |
| उच्च राशि से अंतर |
उच्च राशि में ग्रह को बहुत मजबूत माना जाता है, जबकि मूल त्रिकोण राशि में ग्रह को अपने सामान्य काम करने के लिए बहुत अच्छा स्थान माना जाता है। |
| स्वराशि से अंतर |
स्वराशि ग्रह की अपनी राशि है। मूल त्रिकोण राशि में ग्रह को विशेष रूप से मजबूत माना जाता है, लेकिन यह हमेशा पूरी राशि में नहीं होती। |
सभी ग्रहों की मूल त्रिकोण राशि
| ग्रह |
मूल त्रिकोण राशि |
मूल त्रिकोण की डिग्री |
मुख्य बात |
| सूर्य |
सिंह |
0° से 20° |
सिंह राशि में 20° तक सूर्य का मूल त्रिकोण माना जाता है। |
| चंद्रमा |
वृषभ |
4° से 30° |
वृषभ राशि में चंद्रमा का मूल त्रिकोण माना जाता है। |
| मंगल |
मेष |
0° से 12° |
मेष राशि के शुरुआती 12° को मंगल का मूल त्रिकोण माना जाता है। |
| बुध |
कन्या |
16° से 20° |
कन्या राशि में 16° से 20° तक बुध का मूल त्रिकोण माना जाता है। |
| गुरु |
धनु |
0° से 10° |
धनु राशि के शुरुआती 10° को गुरु का मूल त्रिकोण माना जाता है। |
| शुक्र |
तुला |
0° से 15° |
तुला राशि के शुरुआती 15° को शुक्र का मूल त्रिकोण माना जाता है। |
| शनि |
कुंभ |
0° से 20° |
कुंभ राशि में 20° तक शनि का मूल त्रिकोण माना जाता है। |
मूल त्रिकोण, उच्च और स्वराशि में अंतर
| स्थिति |
सरल अर्थ |
ग्रह की स्थिति |
| उच्च राशि |
ग्रह को बहुत मजबूत माना जाता है। |
ग्रह अपने विशेष उच्च स्थान पर होता है। |
| मूल त्रिकोण |
ग्रह को अपनी शक्ति और स्वभाव के अनुसार काम करने का अच्छा स्थान माना जाता है। |
ग्रह की खास डिग्री में विशेष बल माना जाता है। |
| स्वराशि |
ग्रह अपनी ही राशि में रहता है। |
ग्रह को सामान्य रूप से मजबूत माना जाता है। |
| मित्र राशि |
ग्रह मित्र ग्रह की राशि में होता है। |
सहयोग मिलने की संभावना मानी जाती है। |
| शत्रु राशि |
ग्रह शत्रु ग्रह की राशि में होता है। |
ग्रह को काम करने में चुनौती मानी जाती है। |
सूर्य का मूल त्रिकोण
| बिंदु |
जानकारी |
| मूल त्रिकोण राशि |
सिंह |
| डिग्री |
0° से 20° |
| स्वराशि |
सिंह |
| उच्च राशि |
मेष |
| मुख्य संकेत |
आत्मविश्वास, पिता, नेतृत्व, सम्मान और अधिकार। |
चंद्रमा का मूल त्रिकोण
| बिंदु |
जानकारी |
| मूल त्रिकोण राशि |
वृषभ |
| डिग्री |
4° से 30° |
| स्वराशि |
कर्क |
| उच्च राशि |
वृषभ |
| मुख्य संकेत |
मन, भावना, माता, सुख और मानसिक शांति। |
मंगल का मूल त्रिकोण
| बिंदु |
जानकारी |
| मूल त्रिकोण राशि |
मेष |
| डिग्री |
0° से 12° |
| स्वराशि |
मेष और वृश्चिक |
| उच्च राशि |
मकर |
| मुख्य संकेत |
साहस, ऊर्जा, भूमि, भाई और प्रतियोगिता। |
बुध का मूल त्रिकोण
| बिंदु |
जानकारी |
| मूल त्रिकोण राशि |
कन्या |
| डिग्री |
16° से 20° |
| स्वराशि |
मिथुन और कन्या |
| उच्च राशि |
कन्या |
| मुख्य संकेत |
बुद्धि, व्यापार, गणना, लेखन और बोलने की क्षमता। |
गुरु का मूल त्रिकोण
| बिंदु |
जानकारी |
| मूल त्रिकोण राशि |
धनु |
| डिग्री |
0° से 10° |
| स्वराशि |
धनु और मीन |
| उच्च राशि |
कर्क |
| मुख्य संकेत |
ज्ञान, शिक्षा, गुरु, धर्म, संतान और धन। |
शुक्र का मूल त्रिकोण
| बिंदु |
जानकारी |
| मूल त्रिकोण राशि |
तुला |
| डिग्री |
0° से 15° |
| स्वराशि |
वृषभ और तुला |
| उच्च राशि |
मीन |
| मुख्य संकेत |
प्रेम, विवाह, कला, सुंदरता और सुख-सुविधा। |
शनि का मूल त्रिकोण
| बिंदु |
जानकारी |
| मूल त्रिकोण राशि |
कुंभ |
| डिग्री |
0° से 20° |
| स्वराशि |
मकर और कुंभ |
| उच्च राशि |
तुला |
| मुख्य संकेत |
मेहनत, कर्म, अनुशासन, नौकरी और जिम्मेदारी। |
मूल त्रिकोण राशि का कुंडली में महत्व
| स्थिति |
ज्योतिषीय महत्व |
| ग्रह मूल त्रिकोण में हो |
ग्रह को मजबूत और अपने स्वभाव के अनुसार काम करने योग्य माना जाता है। |
| ग्रह मूल त्रिकोण की निश्चित डिग्री में हो |
ग्रह की विशेष ताकत का अध्ययन किया जाता है। |
| मूल त्रिकोण भाव में हो |
ग्रह जिस भाव का स्वामी है, उस भाव के फल को समझने में यह स्थिति उपयोगी हो सकती है। |
| दशा में मूल त्रिकोण ग्रह |
दशा के फल का अध्ययन करते समय ग्रह की ताकत को ध्यान में रखा जाता है। |
मूल त्रिकोण और ग्रह बल
| ग्रह की स्थिति |
सामान्य ज्योतिषीय विचार |
| उच्च |
बहुत मजबूत स्थिति मानी जाती है। |
| मूल त्रिकोण |
ग्रह के लिए बहुत अच्छी और मजबूत स्थिति मानी जाती है। |
| स्वराशि |
ग्रह को अपनी राशि में रहने का बल मिलता है। |
| मित्र राशि |
ग्रह को मित्र राशि का सहयोग मिल सकता है। |
| सम राशि |
सामान्य स्थिति मानी जाती है। |
| शत्रु राशि |
ग्रह के फल में चुनौती आ सकती है। |
| नीच राशि |
ग्रह की शक्ति कमजोर मानी जा सकती है। |
मूल त्रिकोण को उदाहरण से समझें
| उदाहरण |
स्थिति |
आसान समझ |
| सूर्य सिंह 10° |
मूल त्रिकोण |
सूर्य मूल त्रिकोण की सीमा में है। |
| सूर्य सिंह 25° |
स्वराशि |
सूर्य सिंह में है, लेकिन मूल त्रिकोण की 0°–20° सीमा से बाहर है। |
| मंगल मेष 8° |
मूल त्रिकोण |
मंगल अपनी मूल त्रिकोण सीमा में है। |
| मंगल मेष 20° |
स्वराशि |
मंगल अपनी राशि मेष में है, लेकिन मूल त्रिकोण की सीमा से बाहर है। |
| गुरु धनु 7° |
मूल त्रिकोण |
गुरु मूल त्रिकोण की सीमा में है। |
| गुरु धनु 20° |
स्वराशि |
गुरु अपनी राशि धनु में है, लेकिन मूल त्रिकोण सीमा से बाहर है। |
मूल त्रिकोण — सभी ग्रहों का अंतिम सार
| ग्रह |
मूल त्रिकोण |
डिग्री |
स्वराशि |
उच्च राशि |
| सूर्य | सिंह | 0°–20° | सिंह | मेष |
| चंद्रमा | वृषभ | 4°–30° | कर्क | वृषभ |
| मंगल | मेष | 0°–12° | मेष, वृश्चिक | मकर |
| बुध | कन्या | 16°–20° | मिथुन, कन्या | कन्या |
| गुरु | धनु | 0°–10° | धनु, मीन | कर्क |
| शुक्र | तुला | 0°–15° | वृषभ, तुला | मीन |
| शनि | कुंभ | 0°–20° | मकर, कुंभ | तुला |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
| सवाल |
जवाब |
| मूल त्रिकोण क्या होता है? |
ग्रह की वह खास राशि या राशि का खास भाग जहां उसे मजबूत और अपने स्वभाव के अनुसार काम करने योग्य माना जाता है। |
| सूर्य की मूल त्रिकोण राशि कौन सी है? |
सिंह राशि में 0° से 20° तक सूर्य का मूल त्रिकोण माना जाता है। |
| चंद्रमा की मूल त्रिकोण राशि कौन सी है? |
वृषभ राशि में 4° से 30° तक चंद्रमा का मूल त्रिकोण माना जाता है। |
| मंगल की मूल त्रिकोण राशि कौन सी है? |
मेष राशि में 0° से 12° तक मंगल का मूल त्रिकोण माना जाता है। |
| बुध की मूल त्रिकोण राशि कौन सी है? |
कन्या राशि में 16° से 20° तक बुध का मूल त्रिकोण माना जाता है। |
| गुरु की मूल त्रिकोण राशि कौन सी है? |
धनु राशि में 0° से 10° तक गुरु का मूल त्रिकोण माना जाता है। |
| शुक्र की मूल त्रिकोण राशि कौन सी है? |
तुला राशि में 0° से 15° तक शुक्र का मूल त्रिकोण माना जाता है। |
| शनि की मूल त्रिकोण राशि कौन सी है? |
कुंभ राशि में 0° से 20° तक शनि का मूल त्रिकोण माना जाता है। |
| क्या राहु और केतु की मूल त्रिकोण राशि होती है? |
राहु और केतु के मूल त्रिकोण को लेकर अलग-अलग ज्योतिष परंपराओं में मत मिलते हैं, इसलिए इनके लिए एक ही नियम सभी परंपराओं में समान नहीं है। |
Lakshmi Narayan, 7000130353
दुर्ग-भिलाई में ज्योतिष परामर्श
| विवरण |
जानकारी |
| ज्योतिषाचार्य |
लक्ष्मी नारायण |
| क्षेत्र |
दुर्ग-भिलाई, छत्तीसगढ़ |
| सेवाएं |
जन्म कुंडली, विवाह कुंडली मिलान, करियर, व्यवसाय, ग्रह दोष और रत्न परामर्श |
| पता |
1400, कृपाल नगर, अवन्ति बाई चौक, सुपेला, भिलाई, छत्तीसगढ़ |
| मोबाइल / WhatsApp |
70001-30353 |
उपयोगी वेबसाइट
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