ग्रहों की दृष्टि

ग्रहों की दृष्टि – ज्योतिषीय टेबल्स

ग्रहों की दृष्टि:

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की दृष्टि बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर ग्रह अपनी स्थिति से कुछ विशेष भावों पर दृष्टि डालता है। यह दृष्टि व्यक्ति के जीवन, स्वभाव और भाग्य को प्रभावित करती है। नीचे दिए गए टेबल्स में ग्रहों की दृष्टि को सरल भाषा में समझाया गया है।

ग्रहों की सामान्य दृष्टि

ग्रह सामान्य दृष्टि कुल दृष्टि
सूर्य 7वीं भाव 1 दृष्टि
चंद्र 7वीं भाव 1 दृष्टि
मंगल 4वीं, 7वीं, 8वीं भाव 3 दृष्टि
बुध 7वीं भाव 1 दृष्टि
गुरु 5वीं, 7वीं, 9वीं भाव 3 दृष्टि
शुक्र 7वीं भाव 1 दृष्टि
शनि 3वीं, 7वीं, 10वीं भाव 3 दृष्टि

ग्रहों की विशेष दृष्टि

ग्रह विशेष दृष्टि असर
मंगल 4वीं और 8वीं भाव भूमि, संपत्ति, साहस
गुरु 5वीं और 9वीं भाव ज्ञान, धर्म, शिक्षा
शनि 3वीं और 10वीं भाव कर्म, संघर्ष, अनुशासन

जीवन पर असर

ग्रह दृष्टि का भाव जीवन पर असर
सूर्य 7वीं भाव विवाह, साझेदारी
चंद्र 7वीं भाव भावनाएँ, मानसिक शांति
मंगल 4वीं भाव भूमि, घर
गुरु 9वीं भाव धर्म, भाग्य
शनि 10वीं भाव कर्म, करियर

निष्कर्ष

दृष्टि कुंडली विश्लेषण में बहुत महत्वपूर्ण होती है। सही दृष्टि से ग्रह जीवन में सकारात्मक परिणाम देते हैं, जबकि कमजोर या अशुभ दृष्टि चुनौतियाँ ला सकती है।

ग्रहों की दृष्टि – सामान्य प्रश्न

ग्रहों की दृष्टि क्यों महत्वपूर्ण है?

दृष्टि से पता चलता है कि ग्रह किस भाव को प्रभावित कर रहा है और उसका असर जीवन पर कैसे पड़ेगा।

कौन-से ग्रहों की विशेष दृष्टि होती है?

मंगल, गुरु और शनि की विशेष दृष्टि होती है। मंगल 4वीं और 8वीं भाव पर, गुरु 5वीं और 9वीं भाव पर, और शनि 3वीं और 10वीं भाव पर दृष्टि डालते हैं।

क्या हर ग्रह केवल 7वीं भाव पर दृष्टि डालता है?

हाँ, सभी ग्रहों की सामान्य दृष्टि 7वीं भाव पर होती है। लेकिन मंगल, गुरु और शनि की अतिरिक्त विशेष दृष्टियाँ भी होती हैं।

एस्ट्रोलॉजर लक्ष्मी नारायण (दुर्ग-भिलाई)

लक्ष्मी नारायण जी दुर्ग-भिलाई के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य हैं। वे कुंडली विश्लेषण, विवाह परामर्श, ग्रह दोष निवारण, रत्न परामर्श जैसी सेवाएँ प्रदान करते हैं।

पता: दुर्ग-भिलाई, छत्तीसगढ़ मोबाइल: 70001-30353

यदि किसी ग्रह का बल कम हो तो ज्योतिष में कई उपाय बताए गए हैं। जैसे:

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