Navratri 2025 Date & Vidhi : जानें! नवरात्रि पूजन दिन, तिथि, कलश स्थापना, कन्या पूजन कब और कैसे करें?

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Navratri 2025 Date & Vidhi : जानें! नवरात्रि पूजन दिन, तिथि, कलश स्थापना, कन्या पूजन कब और कैसे करें?

Navratri 2025 (नवरात्रि 2025) का इंतजार हर वर्ष की तरह हर श्रध्दालु को बेसब्री से रहता है। यह पर्व शक्ति, भक्ति, विजय और नवचेतना का पर्व है। जानिए Navratri 2025 कब है, उसकी तिथियाँ, पूजा विधि (Navratri Puja Vidhi), घटस्थापना (Kalash Sthapana) का शुभ मुहूर्त, कन्या पूजन (Kanya Pujan) का सही तरीका, व्रत नियम, व्रत आहार, और नवरात्रि से जुड़ी हर जरूरी जानकारी — एकदम सरल हिंदी में।

यह लेख विशेष रूप से idea4you.in के पाठकों के लिए लिखा गया है। ताकि आपकी नवरात्रि 2025 की तैयारी भी आसान हो ।


नवरात्रि 2025 : कब से कब तक? (Navratri 2025 Dates)

शारदीय नवरात्रि 2025, सोमवार, 22 सितंबर 2025 से शुरू होगी और बुधवार, 1 अक्टूबर 2025 तक रहेगी। दसवां दिन विजयादशमी/दशहरा है, जो इस बार 2 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) को पड़ेगा। ये नौ दिन मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं।
नोट: चैत्र नवरात्रि 2025, 30 मार्च से 7 अप्रैल तक रहेगी, पर यहाँ हम मुख्य रूप से शारदीय नवरात्रि की बात कर रहे हैं।

दिन तारीख नवदुर्गा का स्वरूप तिथि
सोमवार 22 सितंबर 2025 शैलपुत्री प्रतिपदा
मंगलवार 23 सितंबर 2025 ब्रह्मचारिणी द्वितीया
बुधवार 24 सितंबर 2025 चंद्रघंटा तृतीया
गुरुवार 25 सितंबर 2025 कूष्मांडा चतुर्थी
शुक्रवार 26 सितंबर 2025 स्कंदमाता पंचमी
शनिवार 27 सितंबर 2025 कात्यायनी षष्ठी
रविवार 28 सितंबर 2025 कालरात्रि सप्तमी
सोमवार 29 सितंबर 2025 महागौरी अष्टमी
मंगलवार 30 सितंबर 2025 सिद्धिदात्री नवमी
बुधवार 1 अक्टूबर 2025 विजयादशमी दशमी

ऊपर दी गई सारणी आपके लिए हर दिन की देवी स्वरूप, तिथि और तारीख को स्पष्ट करती है। जैसा कि idea4you.in के ज्योतिष लेख में हमेशा दिखाई देता है।
स्रोत: Hindi Boldsky, Drikpanchang, News18


Navratri 2025 शुभ मुहूर्त एवं कार्यक्रम (Shubh Muhurat & Day-wise Schedule)

दिन तारीख शुभ मुहूर्त महत्व
पहला 22 सितंबर घटस्थापना: 06:19-10:19 AM
अभिजीत: 11:55-12:43 PM
मां शैलपुत्री पूजन, घट/कलश स्थापना
अष्टमी 29 सितंबर कन्या पूजन उपयुक्त महा अष्टमी, महागौरी पूजन और कन्या पूजन
नवमी 30 सितंबर कन्या पूजन उपयुक्त सिद्धिदात्री पूजन, कन्या पूजन, व्रत पारण
दशमी 2 अक्टूबर दशहरा नई शुरुआत, रावण दहन

विशेष: घटस्थापना यानी कलश स्थापना नवरात्रि के पहले ही दिन, 22 सितंबर 2025 को सुबह 06:19 बजे से 10:19 बजे तक के बीच सबसे शुभ है। इस दौरान ही पूजा स्थान का शुद्धिकरण, जौं बोए जाते हैं और जल से भरा घट स्थापित होता है। अगर सुबह का यह समय छूट जाए तो अभिजीत मुहूर्त में भी स्थापित कर सकते हैं।


नवरात्रि की नौ देवी (Navdurga) के नाम, स्वरूप और महत्व

Navratri के 9 दिनों में मां दुर्गा के नवदुर्गा स्वरूपों की पूजा की जाती है। हर तिथि में एक विशेष स्वरूप का ध्यान एवं पूजन होता है — यह धार्मिक/आध्यात्मिक जागरूकता, शक्ति, साहस, सुख, वैभव व ज्ञान का प्रतीक है।
आइए जानते हैं नवदुर्गा के नौ रूप, उनके नाम और महत्व।

दिन मां दुर्गा का नाम महत्व मंत्र
1 शैलपुत्री स्थिरता और साहस ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
2 ब्रह्मचारिणी तप, संयम व ध्यान ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
3 चंद्रघंटा साहस, शांति ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
4 कूष्मांडा स्वास्थ्य, सृजनशीलता ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
5 स्कंदमाता ज्ञान, परिवार सुख ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥
6 कात्यायनी विवाह में सफलता ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
7 कालरात्रि भयों से मुक्ति ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
8 महागौरी शांति और शुभता ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
9 सिद्धिदात्री सिद्धियाँ/शक्तियाँ ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥

हर देवी स्वरूप का अपना एक अलग महत्व है, जो हर भक्त को सात्विक, साहसी, स्वस्थ, शांत और धन-वैभव व सिद्धि प्राप्त कराने के लिए प्रेरित करता है।
राशियों के अनुसार देवी स्वरूप जानें — idea4you.in


Navratri 2025 पूजा विधि (Step-by-Step Navratri Puja Vidhi)

1. प्रारंभिक तैयारी

  • पूजा स्थान साफ करें, शुद्ध गंगाजल छिड़कें
  • दीवार या चौकी पर मां दुर्गा की मूर्ति/तस्वीर लगाएं
  • पूजा के लिए आवश्यक सामान रखें (कलश, नारियल, आम के पत्ते, फूल आदि)

2. घटस्थापना/कलश स्थापना (Kalash Sthapana Vidhi)

  • मिट्टी के चौड़े पात्र में मिट्टी डालें, उसमें जौ बोएं
  • कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का, अक्षत, हल्दी डालें
  • कलश के मुख पर 5 आम/अशोक के पत्ते लगाएं
  • कलश के ऊपर नारियल को लाल कपड़े में लपेट कर रखें
  • मौली बांधें, तिलक करें, और कलश को जौ बोए हुए पात्र के बीच रखें

घटस्थापना की क्रमबद्ध विधि

  1. स्नान करके पूजा स्थान पर बैठ जाएं
  2. चौकोर पात्र में मिट्टी डालें, जौ के बीज बोएं, ऊपर से फिर मिट्टी डालें
  3. कलश तैयार करें — उसमें जल, सुपारी, सिक्का, अक्षत, हल्दी, दूर्वा, इत्र डालें
  4. कलश की गर्दन पर मौली बांधें, तिलक लगाएं
  5. 5 आम/अशोक के पत्ते टूटे बिना लगाएं
  6. नारियल पर लाल कपड़ा लपेटें, मौली बांधें और कलश के ऊपर टिकाएं
  7. कलश को जौ वाले पात्र के बीचोंबीच रखें और मां दुर्गा का मंत्र बोल कर आव्हान करें

पूरी विधि धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है और यही मान्यता है कि घट/कलश में मां दुर्गा 9 दिन के लिए निवास करती हैं। कलश स्थापना के समय सही शुभ मुहूर्त का जरूर ध्यान रखें, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार गलत समय पर घटस्थापना करने से नकारात्मक प्रभाव भी संभव है।

घटस्थापना सामग्री सूची (Kalash Sthapana Samagri List)

  • मिट्टी का चौड़ा पात्र
  • साफ मिट्टी
  • जौ (जवारे) के बीज
  • मिट्टी/पीतल/तांबे का कलश
  • गंगाजल/शुद्ध जल
  • सुपारी, सिक्का, हल्दी, अक्षत
  • रक्षा सूत्र/मौली
  • 5 आम/अशोक के पत्ते
  • लाल कपड़ा/चुनरी, नारियल
  • इत्र, फूल, फूल-माला, दूर्वा, धूप, दीपक

News18 और idea4you.in के ज्योतिष अनुभाग में भी इन विवरणों की पुष्टि की गई है।


नवरात्रि की दैनिक पूजा (Daily Navratri Puja Steps)

  • प्रभात में स्नान कर, साफ वस्त्र पहनें
  • पूजा स्थल में दीपक जलाएं, धूप दें
  • मां दुर्गा के स्वरूप या तस्वीर के सामने सिंदूर, अक्षत, पुष्प, माला अर्पित करें
  • Navdurga के नाम का सुमिरन व मंत्र जपें
  • फल-मेवा, हलवा, मिठाई या भोग का प्रसाद चढ़ाएं
  • आरती/भजन गाएं, शिव, लक्ष्मी, सरस्वती का ध्यान करें
  • अष्टमी/नवमी को कन्या पूजन अवश्य करें

पूजन संपन्न करने पर नियम अनुसार नौ दिन आरती, दीपक, और जौ वाले पात्र में रोज पानी डालते रहें। पूजा समापन पर अखंड ज्योत (दीपक) शांत करें।
पूरी पूजा विधि जानने के लिए idea4you.in की पौरोहित्य श्रेणी देखें


नवरात्रि उपवास (व्रत) के नियम और आहार

Navratri Vrat Niyam

  • पूरे 9 या मनचाहा दिन व्रत किया जा सकता है — संयम और श्रद्धा रखें
  • व्रत के समय सात्विक, फलाहारी व सुगम भोजन करें
  • लहसुन, प्याज, अनाज, मांसाहार, अल्कोहल, तम्बाकू वगैरह से दूर रहें
  • फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़ा, कुट्टू आटा आदि का सेवन कर सकते हैं
  • ब्राह्मचर्य और संयम का पालन करें
  • हमेशा साफ-सफाई, सत्य और शांतिपूर्ण व्यवहार रखें

व्रत में उपयुक्त आहार (Vrat Food Table)

समूह क्या खाएं क्या न खाएं
आटा/अनाज कुट्टू, राजगिरा, सिंघाड़ा, सामा चावल, साबूदाना गेहूं, चावल, मैदा, बेसन, रोटी
सब्जी आलू, शकरकंद, अरबी, कद्दू, टमाटर, लौकी प्याज, लहसुन, बैंगन, शलजम, हरी मिर्च
फल-मेवा सभी फल, मखाना, ड्राई फ्रूट्स, केला, सेब
मसाले सेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा, इलायची नमक, हल्दी, धनिया, गरम मसाला
दूध उत्पाद दूध, दही, घी, पनीर

Navratri व्रत में फलाहार के अलावा, व्रत के व्यंजन जैसे साबूदाना खिचड़ी, सिंघाड़े के आटे की पूरी, मखाना खीर, कटहल की सब्जी, और अष्टमी/नवमी पर हलवा, चना, पूरी जरूर बनाएं।
स्रोत:


कन्या पूजन (Kanya Pujan) कब और कैसे करें?

कन्या पूजन तिथि (Kanya Pujan Date 2025)

कन्या पूजन अष्टमी (29 सितंबर 2025) या नवमी (30 सितंबर 2025) तिथि को किया जाता है। दोनों तिथियों में से किसी एक दिन कन्या पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है।

कन्या पूजन की सही विधि

  1. 2 वर्ष से 10 वर्ष तक की कन्याओं को आमंत्रित करें (संख्या 5,7,9 — श्रद्धा अनुसार)
  2. कन्याओं के पांव धोकर आसन पर बैठाएं
  3. माथे पर कुमकुम या रोली, अक्षत से तिलक लगाएं
  4. उनके हाथ में कलावा बांधें
  5. खीर, हलवा, पूरी, चना का भोग/प्रसाद खिलाएं
  6. लाल चुनरी, गिफ्ट, मेवा, दक्षिणा, आदि भेंट करें
  7. कन्याओं के चरण छूकर आशीर्वाद लें
  8. याद रखें — एक लांगूर (छोटा लड़का, भैरव स्वरूप) भी साथ में बैठता है

शास्त्रों के अनुसार कन्या का पूजन अधूरे नवरात्रि व्रत को पूर्ण व फलदायी बनाता है। कन्याओं को मां का स्वरूप मान कर हर्ष व स्नेह से कन्या पूजन जरूरी है।


नवरात्रि के 9 रंग और उनका महत्व (Navratri 2025 Colours & Significance)

दिन तिथि रंग महत्व
दिन 1 22 सितंबर सफेद शांति, पवित्रता
दिन 2 23 सितंबर लाल शक्ति, साहस
दिन 3 24 सितंबर रॉयल ब्लू गौरव, आत्मविश्वास
दिन 4 25 सितंबर पीला ख़ुशी, ऊर्जा
दिन 5 26 सितंबर हरा शांति, उन्नति
दिन 6 27 सितंबर ग्रे संतुलन, स्थिरता
दिन 7 28 सितंबर ऑरेन्ज उर्जा, रचनात्मकता
दिन 8 29 सितंबर मोरपंखी हरा ताजगी, सहृदयता
दिन 9 30 सितंबर गुलाबी स्नेह, प्रेम

हर दिन अलग रंग पहनना नवरात्रि की परंपरा है। इससे न केवल पॉजिटिव एनर्जी आती है बल्कि मां दुर्गा के हर रूप की कृपा भी बरसती है। कई राज्यों में पूजा के दौरान इन्हीं रंगों की चुनरी या वस्त्र मां को अर्पित किए जाते हैं।


नवरात्रि का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

Navratri के 9 दिन मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप की उपासना के लिए प्रसिद्ध हैं। मान्यता है कि देवी दुर्गा ने इसी कालखंड में महिषासुर राक्षस का वध करके आसुरी शक्तियों को नष्ट किया था। इसलिए navratri अच्छाई की बुराई पर विजय का पर्व भी कहलाता है।
पौराणिक संदर्भ से, देवी दुर्गा, शिव, विष्णु, ब्रह्मा सहित सभी देवताओं की शक्ति का संयुक्त रूप हैं।
नवरात्रि का पर्व अपने आप में साधना, शक्ति-आराधना, आत्मशुद्धि और नया आरंभ (दशहरा) का प्रतीक बन गया है। पूरे भारत में अलग-अलग तरीके से (गरबा, डांडिया, पंडाल, रामलीला, कुड़ी पूजा, इत्यादि) navratri मनाई जाती है।
राशियों की जानकारी के लिए भी idea4you.in पर पढ़ें।
स्रोत:



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FAQ – Navratri 2025 )

Navratri 2025 कब है?

Navratri 2025 की शुरुआत सोमवार, 22 सितंबर 2025 से और समापन 1 अक्टूबर 2025 (बुधवार) को होगी। दशहरा 2 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) को मनाया जाएगा।

Navratri 2025 के लिए घटस्थापना शुभ मुहूर्त क्या है?

22 सितंबर 2025 को सुबह 06:19 से 10:19 AM तक घटस्थापना का सर्वोत्तम समय है।

कन्या पूजन कब करें?

अष्टमी (29 सितंबर) या नवमी (30 सितंबर) को कन्या पूजन करना सबसे शुभ है।

Navratri व्रत में क्या खाएं?

फल, दूध, मखाना, सिंघाड़ा/कुट्टू आटा, आलू, सेव, साबूदाना — और स्पेशल व्रत व्यंजन। अनाज, प्याज-लहसुन, मांसाहार, नमक न लें।

नवरात्रि क्यों मनाते हैं?

नवरात्रि, मां दुर्गा द्वारा महिषासुर राक्षस पर विजय, शक्ति और भक्ति का उत्सव है। यह आत्मशुद्धि, सकारात्मता और नए आरंभ का पर्व है।


निष्कर्ष—Navratri 2025 एक नयी ऊर्जा की शुरुआत

Navratri 2025 प्रेम, शक्ति, भक्ति, नियम, अनुशासन और नए आरंभ का संगम है। ये नौ दिन अपने भीतर सात्विकता, श्रद्धा, साधना, सामाजिक सद्भाव, महिलाओं और कन्याओं का सम्मान शामिल करते हैं।
आइए, मां दुर्गा की कृपा से इस बार Navratri को पूरी श्रद्धा और ऊर्जा के साथ मनाएं — और idea4you.in पर अन्य ज्योतिष लेख पढ़कर अपने जीवन को और बेहतर बनाएं।


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