ग्रहों का राशि भोग

ग्रहों का राशि भोग: कौन सा ग्रह कितने समय तक एक राशि में रहता है?

ग्रहों का राशि भोग ज्योतिष में यह बताता है कि कोई ग्रह एक राशि में लगभग कितने समय तक रहता है और फिर अगली राशि में जाता है। हर ग्रह की गति अलग होती है। इसी कारण सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि अलग-अलग समय में राशि बदलते हैं। राहु और केतु की गति बाकी ग्रहों से अलग मानी जाती है और ये सामान्य रूप से उल्टी दिशा में राशि परिवर्तन करते हैं।

नीचे ग्रहों का राशि भोग केवल आसान टेबल के माध्यम से समझाया गया है। यह जानकारी जन्म कुंडली, गोचर, ग्रह परिवर्तन और ज्योतिषीय अध्ययन को समझने में मदद करती है।

ग्रहों का राशि भोग — एक नजर में

ग्रह एक राशि में लगभग समय 12 राशियों का एक चक्र लगभग गति का सामान्य तरीका
सूर्य लगभग 1 महीना लगभग 1 वर्ष सीधी गति
चंद्रमा लगभग 2¼ दिन लगभग 27–28 दिन सीधी गति
मंगल लगभग 45 दिन लगभग 1.5–2 वर्ष सीधी, कभी वक्री
बुध लगभग 2–4 सप्ताह लगभग 1 वर्ष सीधी, कभी वक्री
गुरु लगभग 1 वर्ष लगभग 12 वर्ष सीधी, कभी वक्री
शुक्र लगभग 3–4 सप्ताह लगभग 1 वर्ष सीधी, कभी वक्री
शनि लगभग 2.5 वर्ष लगभग 29.5 वर्ष सीधी, वक्री
राहु लगभग 18 महीने लगभग 18 वर्ष उल्टी दिशा
केतु लगभग 18 महीने लगभग 18 वर्ष उल्टी दिशा

सूर्य का राशि भोग

बिंदु सूर्य
एक राशि में रहने का समय लगभग 30 दिन
12 राशियों का चक्र लगभग 1 वर्ष
एक राशि से दूसरी राशि में परिवर्तन लगभग हर महीने
राशि परिवर्तन को क्या कहते हैं? संक्रांति
गोचर में महत्व लगभग हर महीने नई राशि में प्रवेश

सूर्य के राशि भोग की आसान समझ

राशि सूर्य का सामान्य राशि भोग
मेषलगभग 1 महीना
वृषभलगभग 1 महीना
मिथुनलगभग 1 महीना
कर्कलगभग 1 महीना
सिंहलगभग 1 महीना
कन्यालगभग 1 महीना
तुलालगभग 1 महीना
वृश्चिकलगभग 1 महीना
धनुलगभग 1 महीना
मकरलगभग 1 महीना
कुंभलगभग 1 महीना
मीनलगभग 1 महीना

चंद्रमा का राशि भोग

बिंदु चंद्रमा
एक राशि में रहने का समय लगभग 2 से 2¼ दिन
12 राशियों का चक्र लगभग 27–28 दिन
गति बहुत तेज
गोचर में उपयोग दैनिक और मुहूर्त संबंधी ज्योतिष में बहुत महत्वपूर्ण
नक्षत्र से संबंध बहुत महत्वपूर्ण

चंद्रमा का राशि भोग और नक्षत्र

विषय समय / संख्या
कुल राशियां 12
कुल मुख्य नक्षत्र 27
एक नक्षत्र का औसत समय लगभग 1 दिन
एक राशि में चंद्रमा लगभग 2¼ दिन

मंगल का राशि भोग

बिंदु मंगल
एक राशि में सामान्य समय लगभग 45 दिन
पूरे राशि चक्र का समय लगभग 1.5 से 2 वर्ष
वक्री होने पर एक राशि में अधिक समय रह सकता है
गोचर में महत्व साहस, ऊर्जा, भूमि, प्रतियोगिता आदि से जुड़े विषय

बुध का राशि भोग

बिंदु बुध
एक राशि में सामान्य समय लगभग 2 से 4 सप्ताह
पूरे राशि चक्र का सामान्य समय लगभग 1 वर्ष के आसपास
वक्री होने पर राशि में रहने का समय बदल सकता है
मुख्य ज्योतिषीय संकेत बुद्धि, व्यापार, गणना, बोलना

गुरु का राशि भोग

बिंदु गुरु
एक राशि में रहने का समय लगभग 1 वर्ष
12 राशियों का चक्र लगभग 12 वर्ष
वक्री होने पर राशि में रहने का समय बढ़ सकता है
मुख्य संकेत ज्ञान, शिक्षा, धन, संतान, गुरु

गुरु के राशि भोग को आसान उदाहरण से समझें

गुरु का राशि परिवर्तन लगभग समय
एक राशि से अगली राशिलगभग 1 वर्ष
3 राशियों का सफरलगभग 3 वर्ष
6 राशियों का सफरलगभग 6 वर्ष
12 राशियों का पूरा चक्रलगभग 12 वर्ष

शुक्र का राशि भोग

बिंदु शुक्र
एक राशि में सामान्य समय लगभग 3 से 4 सप्ताह
वक्री होने पर एक राशि में अधिक समय रह सकता है
मुख्य संकेत प्रेम, विवाह, सुख, कला, सुंदरता
गोचर में उपयोग प्रेम, रिश्ते, सुख-सुविधा और कला से जुड़े अध्ययन में

शनि का राशि भोग

बिंदु शनि
एक राशि में रहने का समय लगभग 2.5 वर्ष
12 राशियों का पूरा चक्र लगभग 29.5 वर्ष
वक्री होने पर एक ही राशि में लंबे समय तक दिखाई दे सकता है
मुख्य संकेत कर्म, मेहनत, नौकरी, अनुशासन, देरी

शनि का राशि भोग और साढ़ेसाती

चरण शनि की स्थिति लगभग अवधि
पहला चरण चंद्र राशि से पिछली राशि लगभग 2.5 वर्ष
दूसरा चरण चंद्र राशि लगभग 2.5 वर्ष
तीसरा चरण चंद्र राशि से अगली राशि लगभग 2.5 वर्ष
कुल अवधि तीन राशियां लगभग 7.5 वर्ष

राहु का राशि भोग

बिंदु राहु
एक राशि में रहने का समय लगभग 18 महीने
पूरे राशि चक्र का समय लगभग 18 वर्ष
गति सामान्य रूप से उल्टी दिशा
मुख्य संकेत महत्वाकांक्षा, विदेशी विषय, अचानक बदलाव

केतु का राशि भोग

बिंदु केतु
एक राशि में रहने का समय लगभग 18 महीने
पूरे राशि चक्र का समय लगभग 18 वर्ष
गति सामान्य रूप से उल्टी दिशा
मुख्य संकेत आध्यात्मिकता, खोज, अलगाव, गहराई

सभी ग्रहों का राशि भोग — सबसे आसान टेबल

ग्रह राशि में लगभग भोग एक पूरा चक्र गति
सूर्य30 दिन1 वर्षसीधी
चंद्रमा2–2¼ दिन27–28 दिनसीधी
मंगललगभग 45 दिन1.5–2 वर्षसीधी/वक्री
बुध2–4 सप्ताहलगभग 1 वर्षसीधी/वक्री
गुरुलगभग 1 वर्षलगभग 12 वर्षसीधी/वक्री
शुक्र3–4 सप्ताहलगभग 1 वर्षसीधी/वक्री
शनिलगभग 2.5 वर्षलगभग 29.5 वर्षसीधी/वक्री
राहुलगभग 18 महीनेलगभग 18 वर्षउल्टी
केतुलगभग 18 महीनेलगभग 18 वर्षउल्टी

ग्रहों के राशि भोग का ज्योतिष में उपयोग

ग्रह राशि परिवर्तन से जुड़े सामान्य ज्योतिषीय विषय
सूर्यआत्मविश्वास, पिता, सम्मान, नौकरी, अधिकार
चंद्रमामन, भावनाएं, दैनिक स्थिति, यात्रा
मंगलसाहस, भूमि, ऊर्जा, प्रतियोगिता
बुधबुद्धि, व्यापार, शिक्षा, बातचीत
गुरुशिक्षा, धन, विवाह, संतान, ज्ञान
शुक्रप्रेम, विवाह, सुख, कला, वाहन
शनिकर्म, नौकरी, मेहनत, जिम्मेदारी, देरी
राहुविदेश, महत्वाकांक्षा, बदलाव, नई दिशा
केतुआध्यात्मिकता, शोध, अंदर की खोज

ग्रहों का राशि भोग समझते समय ध्यान रखने वाली बातें

ध्यान रखने वाली बात आसान जानकारी
क्या समय हमेशा बिल्कुल समान रहता है? नहीं। ग्रह की गति बदलने से समय में अंतर हो सकता है।
वक्री ग्रह का क्या असर है? वक्री गति के कारण ग्रह किसी राशि में सामान्य से ज्यादा समय रह सकता है।
क्या केवल राशि परिवर्तन से फल तय हो जाता है? नहीं। जन्म कुंडली की पूरी स्थिति देखना जरूरी है।
क्या सभी ग्रह एक समान गति से चलते हैं? नहीं। हर ग्रह की गति अलग होती है।
राहु-केतु कैसे चलते हैं? ज्योतिष में इन्हें सामान्य रूप से उल्टी दिशा में चलने वाला माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

ग्रहों का राशि भोग क्या होता है?

किसी ग्रह के एक राशि में रहने के समय को सामान्य रूप से ग्रह का राशि भोग कहा जाता है।

सूर्य एक राशि में कितने दिन रहता है?

सूर्य सामान्य रूप से एक राशि में लगभग एक महीने रहता है और लगभग एक वर्ष में 12 राशियों का चक्र पूरा करता है।

चंद्रमा एक राशि में कितने दिन रहता है?

चंद्रमा एक राशि में लगभग 2 से 2¼ दिन रहता है और लगभग 27 से 28 दिनों में राशि चक्र का एक चक्र पूरा करता है।

गुरु एक राशि में कितने समय तक रहता है?

गुरु सामान्य रूप से एक राशि में लगभग एक वर्ष रहता है और लगभग 12 वर्षों में 12 राशियों का चक्र पूरा करता है।

शनि एक राशि में कितने साल रहता है?

शनि सामान्य रूप से एक राशि में लगभग 2.5 वर्ष रहता है और लगभग 29.5 वर्षों में राशि चक्र का एक चक्र पूरा करता है।

राहु और केतु एक राशि में कितने समय रहते हैं?

राहु और केतु सामान्य रूप से एक राशि में लगभग 18 महीने रहते हैं और लगभग 18 वर्षों में राशि चक्र का चक्र पूरा करते हैं।

क्या ग्रहों का राशि भोग हमेशा एक जैसा होता है?

नहीं। ग्रह की वास्तविक गति, वक्री अवस्था और अन्य खगोलीय स्थितियों के कारण किसी राशि में रहने का समय थोड़ा कम या ज्यादा हो सकता है।

क्या ग्रह के राशि भोग से भविष्य बताया जा सकता है?

राशि परिवर्तन और गोचर ज्योतिष में महत्वपूर्ण हैं, लेकिन केवल राशि भोग देखकर पूरा भविष्य बताना सही नहीं माना जाता। जन्म कुंडली, दशा और अन्य ग्रह स्थितियों को भी देखना चाहिए।

दुर्ग-भिलाई में ज्योतिष परामर्श

ज्योतिषाचार्य लक्ष्मी नारायण, दुर्ग-भिलाई जन्म कुंडली, ग्रहों की स्थिति, ग्रह गोचर, विवाह, करियर, व्यवसाय, ग्रह दोष और रत्न परामर्श जैसी ज्योतिष सेवाएं प्रदान करते हैं। व्यक्तिगत कुंडली में ग्रहों का राशि भोग और गोचर किस तरह काम कर रहा है, यह जानने के लिए पूरी जन्म कुंडली का अध्ययन किया जा सकता है।

प्रमुख सेवाएं

सेवा जानकारी
जन्म कुंडलीजन्म कुंडली का विस्तृत अध्ययन
विवाह कुंडली मिलानविवाह और रिश्ते से जुड़े ज्योतिषीय परामर्श
करियर परामर्शनौकरी और करियर से जुड़े कुंडली संकेत
व्यवसाय परामर्शव्यवसाय और आर्थिक मामलों का ज्योतिषीय अध्ययन
ग्रह दोष परामर्शमंगल, शनि, राहु-केतु आदि से जुड़े ज्योतिषीय मार्गदर्शन
रत्न परामर्शकुंडली के आधार पर रत्न संबंधी सलाह

संपर्क विवरण

ज्योतिषाचार्य: लक्ष्मी नारायण

क्षेत्र: दुर्ग-भिलाई, छत्तीसगढ़

पता: 1400, कृपाल नगर, अवन्ति बाई चौक, सुपेला, भिलाई, छत्तीसगढ़

मोबाइल / WhatsApp: 70001-30353

उपयोगी आंतरिक लिंक

“`

इस लेख में आपने जाना ग्रहों का राशि भोग, ग्रह कितने दिन एक राशि में रहते हैं, सूर्य का राशि भोग, चंद्रमा का राशि भोग, मंगल का राशि भोग, बुध का राशि भोग, गुरु का राशि भोग, शुक्र का राशि भोग, शनि का राशि भोग, राहु केतु का राशि भोग, ग्रह गोचर, ग्रह राशि परिवर्तन, ज्योतिष में ग्रहों की गति, दुर्ग भिलाई ज्योतिषी, ज्योतिषाचार्य लक्ष्मी नारायण

Leave a Comment