गोमेद रत्न पहनने की विधि

गोमेद रत्न पहनने की विधि

गोमेद रत्न पहनने की विधि

राहु का रत्न गोमेद अपने शुभ अशुभ प्रभाव बहुत जल्दी दिखलाता है। आइए जानते है गोमेद रत्न के बारे में और “गोमेद रत्न पहनने की विधि” के बारे में।

ज्योतिषशास्त्र में नवरत्नों का विवरण मिलता है जिनका संबंध नवग्रहों से है। यह रत्न ग्रहों की सकारात्मक शक्तियां होती है जिन्हें ग्रहों के शुभ प्रभावों की प्राप्ति के लिए धारण किया जाता है। आज हम बात करेंगे राहु के रत्न गोमेद के बारे में जिसे धारण करने से व्यक्ति अचानक उनत्ति और तरक्की प्राप्त कर सकता है। इस रत्न को धारण करने से वह अपने जीवन की कई परेशानियों और बीमारियों का निवारण कर सकता है। आइये जानते है “गोमेद रत्न पहनने की विधि” और उसके लाभ।

गोमेद रत्न

राहु का रत्न गोमेद भूरे-गोमूत्र के रंग का होता है। भूरा रंग हल्का या गहरा हो सकता है। कई गोमेद तो इतने अधिक गहरे भूरे रंग के होते है जो लगभग काले से दिखते है। गोमेद श्रीलंका जिसे ‘सिलोनी’ गोमेद बोलते है, उड़ीसा का गोमेद और गया का गोमेद आता है। इसमें सिलोनी गोमेद सबसे उच्च क्वालिटी, खूबसूरत रंग और पारदर्शी होता है। उड़ीसा का गोमेद सुन्दर भूरे रंग का होता है लेकिन इसमें चमक कुछ कम होती है और इसकी कठोरता भी सिलोनी गोमेद से कम होती है। तीसरा होता है बौद्ध गया का गोमेद जो गहरे भूरे रंग का होता है जो देखने में काला दिखलाई देता है, जब इसे सूर्य की रौशनी  देखते है तभी यह भूरा दिखलाई देता है।

श्रीलंका का सिलोनी गोमेद सबसे अच्छा और महंगा होता है, उड़ीसा गोमेद सिलोनी गोमेद से काफी कम कीमत का होता है और गया का गोमेद तो 200-400 में आ जाता है। लेकिन गया का गोमेद काम बहुत कर जाता है।

अगर राशि और लग्न के अनुसार गोमेद धारण की बात की जाए तो वृषभ, मिथुन, कन्‍या और तुला व कुंभ राशि/लग्न के लोगों के लिए गोमेद धारण करना काफी लाभदायक होता है। अगर किसी जातक की कुंडली में राहु पहले, चौथे, पांचवें, दसवें या एकादश भाव में बैठा हो तो गोमेद धारण करना काफी लाभदायक हो सकता है। इसके अलावा कुंडली में राहु की स्तिथि को देखने के बाद ही गोमेद धारण करने का फैसला लिया जाता है।
गोमेद धारण करने में इस बात का भी ध्यान रखना पड़ता है की गोमेद के साथ मोती, माणिक, मूंगा धारण नहीं करना चाहिए।
राहु अधिकतर लोगों की कुंडली में अशुभ प्रभावों में ही रहता है और जिनकी कुंडली में राहु के शुभ प्रभाव रहते है वे लोग राहु की दशा-महादशा में बहुत अच्छी उनत्ति-तरक्की करते देखे गए है। शुभ राहु व्यक्ति को बड़ा इंडस्ट्री वाला या राजनेता तक बना देता है।

राहु रत्न गोमेद धारण करने से व्यक्ति अचानक तरक्की कर सकता है, लाटरी, शेयर मार्केट से अचानक धन की प्राप्ति कर सकता है, कहीं से कोई संपत्ति की प्राप्ति हो सकती है, शत्रुओं का खात्मा होता है।

गोमेद रत्न पहनने की विधि

गोमेद रत्न 6 कैरट से ऊपर का ही धारण करना चाहिए। गोमेद कहीं का भी धारण करें बस इस बात का ध्यान रखें की गोमेद साफसुथरा, बगैर दरार, दाग-धब्बों का होना चाहिए।
गोमेद को पंचधातु या अष्टधातु की अंगूठी में ही बनवाकर धारण करना चाहिए। अंगूठी बनने के बाद शनिवार की शाम अंगूठी को गंगाजल से शुद्ध कर लें। भगवान के स्थान पर रख दें, धूप-दीप, अगरबत्ती करें अपने इष्ट देव की पूजा अर्चना करें। उसके बाद राहु मंत्रों “ॐ रां राहवे नमः” का 18,000 की संख्या में जाप करने के बाद मध्यमा उंगली में धारण करें। मंदिर के बाहर गरीबों को कुछ दान-दक्षिणा कर दें।

निष्कर्ष

साथियों, आज की पोस्ट “गोमेद रत्न पहनने की विधि”  में हमने आपको गोमेद रत्न और उसे धारण करने के बारे में बताया। हमारे इसी ब्लॉग में आपको गोमेद रत्न से सम्बंधित अन्य पोस्ट भी मिलेंगी। जिनमें गोमेद रत्न के बारे में आपको पूरी जानकारियां प्राप्त होंगी। अगर आपको पोस्ट अच्छी लगी हो तो कमैंट्स में जरूर बताए। धन्यवाद!

Leave a Comment