भारत में की जाने वाली ज्योतिष जो ग्रहों, नक्षत्रों और राशियों पर आधारित रहती है, जिनकी गणनाओं से किसी भी व्यक्ति के जीवन के बारे में भवष्यवाणी की जाती है उसे ही “वैदिक ज्योतिष” कहा जाता है। वैदिक ज्योतिष भारत का बहुत प्राचीन ग्रन्थ है। इसका निर्माण हमारे ऋषि मुनियों ने हजारों वर्ष पूर्व ही कर दिया था, जिससे आज भी किसी भी व्यक्ति के भविष्य को जाना जा सकता है और भारत की “वैदिक ज्योतिष” सबसे उन्नत और सटीक है।
Vaidik Jyotish के अनुसार किसी भी व्यक्ति के जन्म लेने के समय आकाश मंडल में जो ग्रहों, नक्षत्रों और राशियों की स्तिथि बनती है, व्यक्ति उन्हीं की स्तिथियों की गणना के आधार पर अपना जीवन जीते हुए सभी प्रकार के सुख दुख देखता है। इन्हीं के अनुसार एक व्यक्ति की जन्म कुंडली का निर्माण होता है और व्यक्ति के स्वभाव, भाग्य और भविष्य के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है, इसी को “वैदिक ज्योतिष” बोला जाता है।
वैदिक ज्योतिष में मुख्य रूप से नवग्रह जिनमें सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु और 27 नक्षत्र और 12 राशियों का हिसाब किताब रहता है, जिनकी सहायता से लग्न कुंडली का निर्माण होता है और यही लग्न कुंडली किसी भी व्यक्ति के जीवन का आईना होती है जो उसके सम्पूर्ण जीवन का ब्यौरा देती है, इसी को “Vaidik Jyotish” बोला जाता है।
नीचे एक टेबल दी गई है, जो वैदिक ज्योतिष के मुख्य पहलुओं को स्पष्ट रूप से समझाती है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| वैदिक ज्योतिष क्या है? | यह एक प्राचीन भारतीय विद्या है जो ग्रहों, नक्षत्रों, राशियों और तिथियों के आधार पर मनुष्य के जीवन की भविष्यवाणी करती है। |
| प्राचीनता | वैदिक ज्योतिष का आरंभ वेदों से हुआ था, खासकर “ज्योतिष वेद” में इसका उल्लेख है, जो लगभग 5000 साल पुराना है। |
| मुख्य अवधारणा | यह सिद्धांत यह मानता है कि ग्रहों और नक्षत्रों का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है और यह जीवन के घटनाओं को प्रभावित करता है। |
| ग्रह और नक्षत्र | प्रत्येक ग्रह और नक्षत्र का व्यक्ति पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है, जैसे सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि आदि। |
| राशियाँ | 12 राशियाँ होती हैं (मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ, मीन) जिनके आधार पर व्यक्तित्व का अध्ययन किया जाता है। |
| कुंडली | हर व्यक्ति की जन्म कुंडली जन्म समय, स्थान और तिथि के आधार पर बनती है, जो उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं का संकेत देती है। |
| दशा प्रणाली | यह प्रणाली व्यक्ति के जीवन के विभिन्न समयों के बारे में बताती है कि किस समय कौन से ग्रहों का प्रभाव अधिक रहेगा। |
| महत्वपूर्ण शास्त्र | “बृहत पराशर होरा शास्त्र”, “ज्योतिष पारिजात”, “सारत संहिता” आदि प्रमुख शास्त्र हैं जो वैदिक ज्योतिष के अध्ययन के लिए प्रसिद्ध हैं। |
| उपयोग | वैदिक ज्योतिष का उपयोग भविष्यवाणी करने, जीवन के निर्णयों को बेहतर बनाने, व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन के मार्गदर्शन के लिए किया जाता है। |